- जरूरत के साथ क्या अब आका बदल गए, विधायक से थी जब नजदीकी,पार्टी के वरिष्ठ थे दूर
- विधायक की अनुपस्थिति की वजह से एक साल तक रुका रहा क्रिकेट मैच का फाइनल
- फिर अचानक वरिष्ठ कांग्रेसजनों की उपस्थिति में संपन्न कर दिया गया क्रिकेट मैच का फाइनल
- स्वार्थ की राजनीति या आर्थिक स्वार्थ के लिए राजनीति, मामला जो हो अजीब है
- चार सालों में ही विधायक से मोह हुआ भंग,विधायक से हो गई दूरी
- कभी विधायक के सबसे हुआ करते थे खास बिना विधायक नहीं बनती थी कोई बात
- जिस विधायक ने नाम और परिचय से नवाजा अब उसी को किनारे लगाने की तैयारी
- मामला एक शासकीय कर्मचारी की नेतागिरी से जुड़ा हुआ,जिनके घर के सदस्य भी हैं जनपद उपाध्यक्ष
- पहले शासकीय कर्मचारी को नेतागिरी करने पर बचाने का लगता था विधायक पर आरोप
- अब विधायक से बढ़ी दूरी ऐसे में कौन दे रहा शासकीय कर्मचारी को राजनीति करने की सरपरस्ती

-रवि सिंह –
बैकुण्ठपुर 05 दिसम्बर 2022(घटती-घटना)। वर्तमान परिदृश्य में राजनीति और स्वार्थ एक दूसरे के पूरक हैं, जब तक स्वार्थ सिद्ध होता रहता है, समर्थन बना रहता है, जब स्वार्थ सिद्धि बंद हो जाती है पाला बदल लिया जाता है और यह भी एक अटल सत्य है कि राजनीति में न तो कोई स्थाई दुश्मन होता है, ना ही कोई स्थाई दोस्त। ऐसा ही कुछ आजकल बैकुंठपुर विधानसभा में देखने को मिल रहा है जहां विगत 4 वर्षों से वर्तमान विधायक के निकट और करीबी रहे लोगों ने पाला बदलना प्रारंभ कर दिया है,जिसकी बानगी सरेआम देखने को मिल रही है। आश्चर्य का विषय तो यह है कि विधानसभा चुनाव पश्चात निर्वाचित विधायक ने जिनके सर पर हाथ रखकर जिन्हें पद, कद और परिचय दिलाया, जिन्होंने वर्तमान सत्ता शासन में लगभग 3 वर्षों तक विधायक महोदय की सरपरस्ती में खुलेआम लूट मचा रखी थी, वही लोग अब विधायिका के खिलाफ मुखर होने लगे हैं। राजनीति में शुचिता नहीं रही, क्योंकि पहले लोग विचार और मंतव्य के मेल ना खाने से पाला बदलते थे। वहीं अब लोग स्वार्थ की दाल ना गलने पर बर्तन बदलते नजर आ रहे हैं।
खबर बैकुंठपुर विधायक की समर्थित जनपद पंचायत बैकुंठपुर के उपाध्यक्ष श्रीमती आशा साहू और उनके समर्थकों सहित विधायिका से बढ़ती दूरियों को लेकर है। विगत 3 वर्षों से विधायिका के प्रबल और कट्टर समर्थकों में जनपद उपाध्यक्ष श्रीमती आशा महेश साहू उनके शिक्षक पति और उनके साथियों का नाम शुमार होता आया है और यह सर्वविदित भी है कि विधानसभा के वरिष्ठ कांग्रेसियों को दरकिनार कर वर्तमान विधायक ने उपरोक्त नामों को सर्वाधिक महत्व भी दिया, परंतु विगत वर्ष जनपद उपाध्यक्ष पति और जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के मध्य तनाव की स्थिति में जब मुख्य कार्यपालन अधिकारी का स्थानांतरण नहीं हो पाया, वहीं से विधायिका और उनके खास समर्थकों के बीच दूरियां बढ़ती चली गई। एक समय ऐसा था की विधानसभा में होने वाले प्रत्येक कार्यक्रम में साथ शिरकत करने वाले, बैनर पोस्टरों में साथ दिखाई देने वाले अचानक ही अलग-थलग पड़ गए। विधायिका के हाथ खींच लेने के बाद जब कार्यकलापों में मंदी आनी शुरू हुई और मनमर्जियां कम होने लगीं तो नये आकाओं की तलाश प्रारंभ हो गई। विवशता भी क्या चीज होती है, कि विधायिका के साथ रहने पर जो वरिष्ठ कांग्रेसी पहले बुरे लगते थे, पीठ पीछे जिन्हें थका हुआ और हारा हुआ कहा जाता था, पानी पी पीकर जिन्हें कोसा जाता था, उन्हीं के शरण में आने पर जिले के वही वरिष्ठ कांग्रेसी आज सबसे अच्छे हो गए। विधायिका से दूरियां बढ़ने की वजह चाहे जो भी हो और वरिष्ठ कांग्रेसी से जुड़ने की वजह चाहे जैसी भी रही हो, परंतु आम जनमानस का तो यही कहना है कि स्वार्थ की राजनीति में जब दाल नहीं गली तो नये आकाओं की आवश्यकता पड़ी है।
1 वर्ष तक जिस प्रतियोगिता का नहीं हो पाया फाइनल, वरिष्ठ कांग्रेसियों की आतिथ्य में हुआ समापन कार्यक्रम
सूत्रों की माने तो जनपद पंचायत बैकुंठपुर के उपाध्यक्ष श्रीमती आशा साहू द्वारा विगत वर्ष हाई स्कूल तरगांवा के ग्राउंड में क्रिकेट प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। जिनके उद्घाटन और समापन की आतिथ्य की जिम्मेदारी वर्तमान विधायिका महोदया की थी। परंतु सूत्रों के अनुसार आपसी अनबन होने और प्रतियोगिता की इनामी राशि की व्यवस्था ना हो पाने के कारण प्रतियोगिता का फाइनल संपन्न नहीं हो पाया था। जिसका फाइनल मैच और समापन समारोह 1 वर्ष पश्चात विगत दिनों कराया गया। आश्चर्य का विषय रहा कि लगातार प्रतिवर्ष होने वाले इस प्रतियोगिता में जहां एक ओर पहले विधायिका के बैनर पोस्टर चारों ओर नजर आते थे, वहीं इस बार उनका कहीं नामोनिशान नहीं था और तो और बतौर अतिथि भी उनका नाम शुमार नहीं था। अपितु जिले के कद्दावर और वरिष्ठ कांग्रेसी के आतिथ्य में प्रतियोगिता का समापन समारोह संपन्न हुआ। जिसे लेकर लोगों में तरह-तरह की चर्चाएं व्याप्त थीं और यह कहा जा रहा था कि विधायक से दूरी बढ़ने पर नए आशियाने की तलाश में यह कवायद की गई थी। बहरहाल वजह जो भी हो पर अस्तित्व पर संकट देख यह कवायद जरूरी भी है।
पहले विधायक का था शासकीय कर्मचारी को संरक्षण, अब कौन दे रहा संरक्षण
जनपद उपाध्यक्ष के परिवार से आने वाले शासकीय कर्मचारी को पहले विधायक बैकुंठपुर का करीबी माना जाता था और उनका ही संरक्षण है ऐसा मानकर उन्हें कार्यालयीन समय मे राजनीति करने की छूट बराबर मिलती आ रही थी वहीं अब जब विधायक से उनकी दूरी हो गई है ऐसे में कौन उन्हें संरक्षण दे रहा है यह भी सवाल उठ रहा है।
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