- आर्थिक रूप से पिछड़े सामान्य वर्ग के लोगों को मिलने वाले 10 प्रतिशत आरक्षण में भी की गई कटौती
- 10 प्रतिशत की जगह अब आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को मिलेगा 4 प्रतिशत आरक्षण
- आरक्षण विधेयक पर राज्यपाल से हस्ताक्षर लेने पहुँचे मंत्री भी थे सामान्य वर्ग से
- वोट बैंक की ऐसी राजनीति की सभी का एक समान विकास हो सके किसी राजनेता की सोच नहीं
- प्रदेश में 90 विधायकों में से 25 से 30 सामान्य वर्ग के फिर भी सामान्य वर्ग का हित किसी के लिए मुद्दा नहीं
- सामान्य वर्ग को लेकर सरकार की सोच परायेपन वाली, छत्तीसगढ़ सरकार के आरक्षण विधेयक ने सामान्य वर्ग को किया निराश
- कम वोट प्रतिशत की वजह से सरकार के लिए सामान्य वर्ग का कोई महत्व नहीं,सामान्य वर्ग लाभ से वंचित रहे सरकार की सोच हुई उजागर

बैकुंठपुर 4 दिसम्बर 2022 (घटती-घटना)। सामान्य वर्ग को शोषित किये जाने का प्रयास बड़ी तेजी से छत्तीसगढ़ में जारी हो चुका है ऐसा कहना सरकार के आरक्षण विधेयक के बाद बिल्कुल गलत नहीं होगा जिसमें सामान्य वर्ग को या आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग को मिलने वाले 10 प्रतिशत में भी कटौती कर दी गई और इसे 4 प्रतिशत कर दिया गया। हमेशा से राजनीतिज्ञों के हाशिये पर ही रहने वाले सामान्य वर्ग के लिए यह किसी कुठाराघात से कम नहीं साबित हुआ और सामान्य वर्ग निराश हुआ यह देखा भी जा रहा है।
सामान्य वर्ग वोट बैंक के हिसाब से राजनीतिक दलों की कभी पसंद नहीं रहा और इसीलिए सामान्य वर्ग को हाशिये पर डालने का प्रयास निरंतर जारी है यह समझा जा सकता है। सामान्य वर्ग को जिस तरह लगातार सरकार उपेक्षित कर रही है उससे यह भी साबित हो रहा है कि सामान्य वर्ग को लेकर सरकार की सोच साफ और वह सामान्य वर्ग के लिए कोई भी सोच ऐसी नहीं रखती जिससे सामान्य वर्ग का विकास हो सके और उन्हें कुछ भी लाभ मिल सके। सामान्य वर्ग राजनीतिक लाभ हानि के हिसाब से राजनीतिक दलों के लिए कोई महत्व नही रखता यह भी नए आरक्षण विधेयक से स्पष्ट हो गया। आरक्षण मामले में सामान्य वर्ग काफी निराश नजर आ रहा है और प्रश्न लेकर खड़ा भी है कि क्या यही सबका विकास और सबका विकास है,जिसको किसी बहाने कुछ मिलने की उम्मीद भी थी उसे भी छीन लेना कहां तक उचित है यह सामान्य वर्ग सवाल उठा रहा है।
सभी लाभों से वंचिततो फिर 4 प्रतिशत की भी जरूरत क्यों?
सामान्य वर्ग के लोगों का यह भी कहना है कि सामान्य वर्ग को यदि सभी लाभों से वंचित ही किया जाना है तो फिर 4 प्रतिशत की भी उन्हें जरूरत नहीं है और वह किसी तरह अपनी व्यवस्था कर ही लेंगे और सरकार से उनकी मांग भी है कि सामान्य वर्ग किस श्रेणी में सरकार की नजर में है यह सरकार को स्पष्ट करना चाहिए वहीं सामान्य वर्ग के लोग उनके प्रति भी नाराजगी रखे हुए हैं जो सामान्य वर्ग के हैं और राजनीति में पक्ष या विपक्ष की भूमिका में हैं और वह भी पूरे मामले में मौन हैं और कहीं न कहीं वह भयभीत हैं की आरक्षण विरोध की वजह से उनकी कुर्सी खतरे में न पड़ जाए और उनको नुकसान न हो जाये।
सामान्य वर्ग के मंत्रियों व नेताओं को भी सामान्य वर्ग की भावनाएं की चिंता नहीं
छत्तीसगढ़ का जो आरक्षण विधेयक नया पारित हुआ उसे राज्यपाल तक लेकर जाने वाले सामान्य वर्ग के मंत्रियों व नेताओं को लेकर भी सामान्य वर्ग की भावनाएं सामने आईं और यह कहते सुना गया कि अन्य वर्ग के नेता जहां अपने लोगों के आरक्षण के लिए लड़ते रहे तब सामान्य वर्ग के नेता अपनी कुर्सी बची रहे केवल इसलिए मौन रहे वहीं अपने ही लोगों को मिलने वाले 10 प्रतिशत को 4 प्रतिशत करने की सलाह देते रहे जो साबित करता है कि ऐसे नेता केवल कुर्सी के मोह में जकड़े हुए हैं यह अपनी सोच को सर्व विकास की नहीं बना सकते जो दिख भी रहा है।
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