- पुलिस पर व्यक्ति ने उठाया सवाल तो लगा बुरा, नोटिस जारी कर मागा जवाब,पुलिस तब कहां थी जब चैट हुआ था वायरल?
- पुलिस की वायरल चैट मामले में पुलिस चैट वायरल करने वाले तक ना पहुंच कर पत्रकार पर किया था मामला दर्ज
- पुलिस की दोषपूर्ण कार्यप्रणाली को लेकर सोशल मीडिया पर लिखना युवक के लिए बना सिरदर्द
- सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर पुलिस ने युवक को किया तलब,मामले में जबाव देने दिया नोटिश
- युवक ने बैकुंठपुर शहर में अंतरराज्जीय जुआ फड़ संचालन और उसपर कार्यवाही नहीं करने को लेकर सोशल मीडिया पर किया था पोस्ट
- छोटे लोगों पर कार्यवाही व बड़े जुआ फड़ संचालकों को छूट युवक ने लिखकर बैकुंठपुर पुलिस की कार्यप्रणाली का किया था विरोध
- पुलिस ने मामले में युवक को ही थमाया नोटिश,जवाब संतोषजनक नहीं होने पर विधि अनुसार कार्यवाही की दी चेतावनी
-रवि सिंह-
कोरिया 4 दिसम्बर 2022 (घटती-घटना)। बैकुंठपुर शहर के युवक साथ ही गौ सेवक अनुराग दुबे को अनुविभागीय अधिकारी पुलिस बैकुंठपुर ने नोटिश जारी कर जवाब मांगा है और जवाब संतोषजनक नहीं होने पर विधि अनुसार कार्यवाही करने की चेतावनी भी दी है जिसको लेकर अब पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक नया सवाल खड़ा हो रहा है और वह यह कि क्या पुलिस अपने ऊपर लग रहे आरोपों से बचने के लिए यही तरीका अख्तियार करेगी और पुलिस की किसी भी दोषपूर्ण कार्यवाही पर सवाल उठाने वालों को कानून का भय दिखाकर भयभीत करेगी।वैसे यदि इस मामले में देखा जाए तो बिल्कुल ऐसा ही लग रहा है और यह तय दिख रहा है कि बैकुंठपुर की पुलिस अपने ऊपर लग रहे किसी आरोप पर सज्ञान लेकर कार्यवाही नहीं करेगी बल्कि आरोप लगाने वालों पर कार्यवाही कर आरोपियों को सह देती रहेगी।
बैकुंठपुर निवासी व गौ सेवक अनुराग दुबे ने बैकुंठपुर शहर के मुख्य मार्ग में चल रहे किसी जुआ फड़ को लेकर वाट्सएप्प समूह में यह लिखा था कि बड़े जुआ फड़ अंतरराज्यीय जुआ फड़ पर पुलिस कार्यवाही नहीं करती बशर्ते छोटे लोगों पर पुलिस तत्काल कार्यवाही करती है। अनुराग दुबे की इसी पोस्ट पर पुलिस ने सज्ञान लिया है और उन्हें नोटिश जारी कर जवाब मांगा है और जवाब संतोषजनक नहीं होने पर विधि अनुसार कार्यवाही की बात नोटिश में लिखी है। कुल मिलाकर पुलिस आरोपों पर सज्ञान लेने की बजाए आरोप लगाने वाले पर ही सख्त हो रही है और अपनी मुख्य भूमिका निभाने की बजाए वह उस भूमिका का निर्वहन कर रही है जहाँ कोई भी पुलिस की किसी दोषपूर्ण कार्यवाही पर कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा न कर सके और ऐसा ख्याल आते ही वह भयभीत हो जाये।
क्या बैकुंठपुर पुलिस के द्वारा जारी नोटिश अभिव्यक्ति की आजादी का हनन तो नहीं?-
बैकुंठपुर पुलिस के द्वारा जारी यह नोटिश पूरी तरह अभिव्यक्ति की आजादी का हनन है और समाज मे भय उत्तपन्न करने वाला है जो आगे से किसी भी गलत कार्य के दौरान उठ रही आवाज को दबाने का उदाहरण पुलिस द्वारा स्थापित किये जाने का प्रयास है और समाज को भयभीत करने का प्रयास है। नव पदस्थ सरगुजा पुलिस महानिरीक्षक जहां अपनी पुलिस को सोशल पुलिसिंग का पाठ पढ़ा रहें हैं वह जहां बिट प्रणाली और लोगों को पुलिस से जोड़कर अपराध मुक्त समाज की स्थापना की बात कर रहें हैं वहीं बैकुंठपुर पुलिस खुद पर आरोप लगते ही बौखलाहट में आ गई है और भयभीत करने का अपना उपक्रम जारी किए हुए है,जबकि पुलिस मामले में युवक से यह भी जानकारी लेने का गुप्त रूप से प्रयास कर सकती थी कि कहां बड़े स्तर पर जुआ का फड़ शहर में संचालित हो रहा है और उसपर पुलिस कार्यवाही कर अपनी पीठ ठोक सकती थी जबकि पुलिस युवक पर ही नोटिश तामील कर उसको भयभीत कर रही है और उसको सार्वजनिक रूप से अवैध कार्यों के खिलाफ लिखने वाला साबित कर रही है और जिससे युवक को अवैध कारोबारियों से खतरा हो सकता है और उसे सुरक्षा भी नहीं मिलने वाली है।
पूर्व में भी बैकुंठपुर पुलिस इसी तरह दोषपूर्ण कार्यवाही कर चुकी है पत्रकार पर
पूर्व में भी एक मामले में जहां एक पत्रकार ने सोशल मीडिया से एक वारयल चैट को आधार बनाकर खबर प्रकाशित किया था और उस मामले ने तूल पकड़ा था और मामले में जो विषय सोशल मीडिया पर वायरल था उसे पत्रकार ने नहीं किसी अन्य ने वायरल किया था और पुलिस ने पत्रकार पर अपराध पंजीबद्ध किया था, जबकि पुलिस को चैट वायरल करने वाले मोबाइल नम्बर के मालिक तक पहुंचकर उसपर अपराध दर्ज करना था, जिसतक पुलिस नहीं पहुंच पाई और पुलिस ने द्वेषवश पत्रकार को निशाना बनाया और उसपर अपराध दर्ज कर उसको परेशान किया। कुलमिलाकर किसी भी मामले को पुलिस के सज्ञान में लाना ही कोरिया जिले में अपराध हो चुका है और ऐसा करने पर पुलिस ऐसा करने वाले के ही खिलाफ कार्यवाही करेगी न कि वह अपराधी या गलत करने वाले पर अपराध दर्ज करेगी।
मामले से जुड़े कुछ सवाल
सवाल: पुलिस पर व्यक्ति ने उठाया सवाल तो लगा बुरा, नोटिस जारी कर मागा जवाब, पुलिस तब कहा थी जब चैट हुआ था वायरल?
सवाल: अभिव्यक्ति की आजादी के तहत नगर के व्यक्ति ने उठाया सवाल तो पुलिस ने जारी कर दिया नोटिस, क्या पुलिस भयभीत करना चाहती है नागरिकों को?
सवाल: पुलिस की नोटिश में उल्लेख, युवक ने पुलिस की छवि धूमिल करने का किया है काम, क्या सवाल उठाना गलत?
सवाल: क्या युवक को भयभीत कर अन्य को भी सोशल मीडिया में लिखने से रोकना चाहती है बैकुंठपुर पुलिस?
सवाल: क्या भयभीत कर अभिव्यक्ति की आजादी को कुचलना चाहती है बैकुंठपुर पुलिस?
सवाल: क्या कोई भी मामले को पुलिस के सज्ञान में लाना ही कोरिया जिले में अपराध?
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