- भाजपा कार्यालय में बनी गैलरी को मनमर्जी से बना लिया दुकान, पुत्र के लिए चाय दुकान खोलने की तैयारी।
- कोर कमेटी को भी बताना उचित नही समझा गया, क्या दुबारा मिला मौका तो हो गए तानाशाह?
–रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर 27 नवम्बर 2022 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ में मिशन 2023 फतह करने में लगी भारतीय जनता पार्टी का प्रदेश नेतृत्व भले ही युद्व स्तर पर तैयारी कर रहा है लेकिन उससे अलग कोरिया जिले में भाजपा संगठन एकदम सुस्त और कागजी खानापूर्ति में मस्त है। प्रदेष नेतृत्व द्वारा सौपे गए कार्यो को जिला भाजपा संगठन कागज में जरूर पूरा कर लेता है लेकिन उसकी जमीन हकीकत कोसो दूर है। प्रदेश नेतृत्व को बरगलाने और झूठी वाहवाही लूटने में भी भाजपा संगठन को महारथ हासिल है। यह अलग बात है कि पार्टी ने वर्तमान जिलाध्यक्ष को फिर से रिपीट कर दिया है लेकिन उनके भरोसे आखिर कैसे 2023 का मिशन कामयाब होगा यह सोचनीय विषय है। क्योंकि पार्टी की वर्तमान स्थिति देखकर सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिलाध्यक्ष पार्टी को एक प्रायवेट लिमिटेड कंपनी की तरह चला रहे हैं, एकला चलो की नीति के कारण अन्य पदाधिकारियों को उनके द्वारा अक्सर नीचा दिखलाया जाता है जिससे कि पदाधिकारियों में भी उनके खिलाफ अंदरूनी असंतोष व्याप्त है लेकिन पार्टी पदाधिकारी संगठन से बंधे होने के कारण कुछ भी बोलना उचित नही समझते। अब एक ताजा मामला भाजपा जिला कार्यालय में बन रहे दुकान का सामने आया है जिसमें अपनी मनमर्जी से जिलाध्यक्ष द्वारा गैलरी के रास्ते को अतिक्रमण करते हुए दुकान का निर्माण कराया जा रहा है, उस दुकान में चाय की दुकान खोली जाएगी और दुकान का संचालन या कि जिलाध्यक्ष के पुत्र द्वारा किया जाएगा,कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि पुत्र के भविष्य को देखते हुए भाजपा जिलाध्यक्ष द्वारा दुकान बनवाकर उसे कब्जा किया जा रहा है।
इस बारे में अनेक भाजपा नेताओं से हुई चर्चा के अनुसार बताया गया कि पूर्व में भाजपा कार्यालय निर्माण के वक्त पांच दुकानें भी बनाई गई थी, जिसे लेने वाले दुकानदारों ने 5-7 लाख देकर क्रय किया था, उस दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष रहे नेता ने न तो खुद के लिए दुकान लिया था और न ही इस प्रकार की चलाकी दिखलाई थी लेकिन अब अपने पद का दुरूपयोग करते हुए वर्तमान जिलाध्यक्ष द्वारा मनमर्जी से गैलरी के जगह को खत्म करते हुए अपने पुत्र के लिए दुकान बनवाया जा रहा है जो कि कहीं से उचित नही है। इसका आषय यह हुआ कि जो भी जिलाध्यक्ष रहेगा वह स्वार्थ वष कुछ भी करता रहेगा और अन्य पार्टी पदाधिकारी कार्यकर्ता हाथ पर हाथ धरे बैठे रहेंगे। यहां यह सवाल उठता है कि जो पार्टी लगातार एकता,संगठन और नियम कायदों की बात करती है उसके एक जिलाध्यक्ष ही इस प्रकार का काम कर रहे हैं जो कि समझ से परे है।
ऊपर हुई शिकायत तो बनाया बहाना
भाजपा कार्यालय की गैलरी को अधिग्रहित करते हुए पुत्र के लिए बनवाये जा रहे दुकान के बारे मे सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार इससे नाखुष एक वरिष्ठ नेता ने पिछले दिनों पार्टी कार्यालय में एक जिम्मेदार पद पर बैठे पदाधिकारी से इसकी मौखिक षिकायत भी की थी, जिसके बाद जिलाध्यक्ष के पास काल भी आया लेकिन उनके द्वारा उल जलूल दुहाई देकर मामले को रफा कर दिया गया। और पार्टी के नेता को भी अपने विष्वास में ले लिया गया। अब सवाल यह उठता है कि पार्टी कार्यालय में दुकान बनाकर कब्जा कर रहे भाजपा जिलाध्यक्ष क्या अपनी मनमर्जी से पार्टी का संचालन कर रहे हैं उन पर किसी का नियंत्रण नही है। वही सर्वेसर्वा हैं और उनकी जो मर्जी आएगी वही करेंगे। बतलाया यह जा रहा है कि जिला विभाजन के बाद अब कोरिया जिले में भाजपा के पास वैसे भी कोई वरिष्ठ नेता नही है और वर्तमान जिलाध्यक्ष ने पूर्व मंत्री को अपने विष्वास में ले लिया है, पूर्व मंत्री भी आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट की चाह में जिलाध्यक्ष के खिलाफ बोलना उचित नही समझते जिसका फायदा जिलाध्यक्ष द्वारा उठाया जा रहा है। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है वर्तमान जिलाध्यक्ष पार्टी को एक प्रायवेट लिमिटेड कंपनी की तरह चला रहे हैं, जिससे अन्य पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं में भारी निराषा देखने को मिल रही है। कोरिया जिले में बन रही इस स्थिति से बचने के लिए पार्टी संगठन को भी संज्ञान लेना चाहिए।
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