-राजा मुखर्जी-
कोरबा, 04 अक्टूबर 2022 (घटती-घटना)। पांच साल के पुत्र की मौत के बाद पिता को कोरबा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में शव वाहन की सुविधा नहीं मिल सकी। किसी तरह उसने बाइक में शव को रख बच्चे के अंतिम संस्कार करने की प्रक्रिया पूर्ण करने अस्पताल से रवाना हो गया। अभी वह कुछ दूर ही पहुंचा था कि, कुछ लोगों ने शव वाहन की व्यवस्था कर व्यथित पिता को राहत पहुंचाई। खरमोरा के रुद्र नगर में रहने वाले राजेश चौरसिया का पुत्र हेमंत चौरसिया (पांच साल) कुछ दिन से अस्वस्थ चल रहा था। उसकी तबीयत खराब हो जाने से आनन फानन में उसे कोरबा मेडिकल कालेज स्थित अस्पताल में लेकर पहुंचा गया। अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने परीक्षण उपरांत उसे मृत घोषित कर दिया। चूंकि अस्पताल में बच्चे को मृत अवस्था में लाया गया था, इसलिए पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूर्ण किया जाना था ढ्ढ इसलिए रात को शव मर्च्यूरी में रख दिया गया। सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद शव को पिता राजेश के सुपुर्द कर दिया गया। शव को घर तक पहुंचने की गुजारिश राजेश द्वारा अस्पताल के कर्मचारियों से करता रहा, पर शव वाहन उपलब्ध नहीं होने की बात कर्मचारियों द्वारा कहकर पल्ला झाड़ लिया गया। उसकी आर्थिक स्थिति भी ऐसी नहीं थी कि अपने स्तर पर वाहन की बुकिंग कर सके, लिहाजा उसने एक सहयोगी के साथ बाइक के पीछे बैठ कर बच्चे का शव गोद में रख घर जाने रवाना हो गया। अस्पताल परिसर में खड़े कुछ जागरूक लोगों को इसकी जानकारी लगी और उन्होंने अस्पताल परिसर में ही संचालित एक होटल के संचालक से शव वाहन उपलब्ध कराने का आग्रह किया। उसने यह बात सहज स्वीकार कर लिया और राजेश को रास्ते में रोक कर शव वाहन उपलब्ध कराया गया। साहचर्य प्रयास से शव वाहन तो मिल गया, पर न जाने कितने ही जरूरतमंद स्वजन हैं, जो अपने को खोने के बाद शव को घर तक ले जाने में काफी मशक्कत करते हैं। बता दे के जिले में डायल 1099 में मुक्तांजलि योजना के तहत अस्पताल प्रबंधन द्वारा निशुल्क शव वाहन की सेवा उपलब्ध कराई जाती है। इसके लिए पूरे जिले में केवल दो शव वाहन की व्यवस्था है, इसमें एक कटघोरा व दूसरा मेडिकल कॉलेज अस्पताल को उपलब्ध कराया गया है। बताया जा रहा है की मेडिकल अस्पताल का शव वाहन खराब हो गया है और उसे मरम्मत के लिए गैरेज भेजा गया है, इस वजह से कटघोरा का शव वाहन कोरबा बुलाया गया था पर वह वाहन भी उस वक्त उपलब्ध नही था। अस्पताल प्रबंधन द्वारा मुक्तांजलि योजना के तहत जिले के अंदर ही शव वाहन की सुविधा दी जाती है पर मुक्तांजलि के लिए बनाए गए इस कायदे का भी जमकर उल्लंघन किया गया। सूत्रों का दावा है कि ,एक शव वाहन जो मेडिकल अस्पताल में उपलब्ध था, उसे भैयाथान भेज दिया गया,जो के अंबिकापुर जिले में है। यह गड़बड़ी वाहन के चालक के स्तर पर की गई, या फिर अधिकारियों की भी इसमें सहभागिता रही, यह तो जांच के बाद ही पता चल सकेगा। बहरहाल इस तरह कायदों की अनदेखी किए जाने की वजह से आवश्यकता पड़ने पर जरूरतमंदों को इसकी सुविधा नहीं मिल पाती है। इस पूरे मामले के बारे में डा गोपाल कंवर,अधीक्षक मेडिकल कालेज का कहना है के अस्पताल में दो एंबुलेंस है एक खराब है और दूसरा एंबुलेंस शव छोड़ने गया था, इसलिए उपलब्ध नहीं हो पाया, ऐसी परिस्थितियों में समाजसेवी संगठनों से संपर्क कर शव वाहन की व्यवस्था कराई जाती है पर मुझे इसकी जानकारी नहीं लग पाई, नहीं तो ऐसी स्थिति निर्मित नही होती। अब प्रश्न यह है के कर्मचारियों द्वारा क्यों मामले कि जानकारी नहीं दी गई ?
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