- एसईसीएल कटकोना में डेंगू का दस्तक,एक ही घर के दो मासूम बच्चे डेंगू की चपेट।
- डेंगू से पीडि़त दोनों मासूम बच्चों का इलाज चल रहा अपोलो बिलासपुर में।
- एक बार फिर जिले में डेंगू की दस्तक, दहशत में लोग।
- एसईसीएल की लापरवाही से डेंगू ने दिया दस्तक साफ सफाई पर एसईसीएल का ध्यान नहीं।
-रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर 07 सितम्बर 2022 (घटती-घटना)। एसईसीएल महिला कर्मी के दो मासूम बच्चे को डेंगू होने की पुष्टि हुई है दोनों बच्चे का इलाज अपोलो अस्पताल बिलासपुर में चल रहा है, एक बार फिर कुछ सालों बाद डेंगू ने कोरिया जिले में वापस दस्तक दिया है, आखिर इस दस्तक की वजह क्या है? डेंगू की पुष्टि होते ही एसईसीएल की लापरवाही की पोल भी खुल गई, एनुअल मेंटेनेंस किलिंग के नाम पर 3 करोड़ 68 लाख का ठेका फिर भी गंदगी के बीच जीवन यापन कर रहे एसईसीएल कर्मी जिसका नतीजा है डेंगू जैसी बीमारी का होना। एसईसीएल के द्वारा करोड़ों रुपए खर्च करने के बावजूद एसईसीएल कर्मी पर डेंगू जैसे गंभीर बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है, एसईसीएल प्रबंधन की उदासीनता की वजह है डेंगू जैसी बीमारिया अपना पैर पसार रही है।
मिली जानकारी के अनुसार रुखसाना आश्मीन जो एसईसीएल में पदस्थ हैं जिसकी एक 6 साल की बच्ची और एक 9 महीने की बच्ची इस समय डेंगू के चपेट में आ गई हैं, जिसका इलाज अपोलो अस्पताल बिलासपुर में हो रहा है हमने इस संबंध में पीडç¸त के परिजनों से बात की तो उन्होंने कहा कि बच्चे की तबीयत काफी दिनों से खराब थी, जिसे लेकर हम बिलासपुर इलाज के लिए पहुंचे जहां जांच के दौरान डेंगू होना बताया गया, इन दोनों मासूम बच्चों को डेंगू होने से उसके परिजन काफी परेशान हैं वहीं उन्होंने बताया कि घर के आसपास काफी ज्यादा गंदगी है शायद इसी वजह से डेंगू के मछर उस क्षेत्र में पनप रहा है।
क्या एनुअल मेंटेनेंस के नाम पर खानापूर्ति?
एसईसीएल कटकोना क्षेत्र में कर्मचारियों के घर के आवास के पास साफ सफाई व घरों के मरम्मत के लिए एनुअल मेंटेनेंस के नाम पर 3 करोड़ 68 लाख का टेंडर निकाला गया था, जिसे 9 महीने बीत चुके हैं पर 9 महीने बाद भी कर्मचारियों के आवास के आस-पास गंदगी का आलम है, श्रमिक गंदगी के बीच जीवन यापन करने के लिए विवश है, आखिर इतने पैसे खर्च होने के बावजूद श्रमिकों को गंदगी में रहने की आखिर क्या है वजह? श्रमिकों का कहना है कि हमारे घर के आस-पास बिल्कुल भी सफाई नहीं होती ना ही मच्छरों के लिए कोई छिड़काव होता है और नहीं मच्छरों को भगाने के लिए बाकी उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है, घरों के पीछे की नालियां गंदगी से बजबजा रही है पर ना जाने कौनसी सफाई हो रही है जिसमे करोडो रूपए खर्च हो रहे है।
3 करोड़ 68 लाख के काम को 48 प्रतिशत से कम में लेकर कैसे कर रहा ठेकेदार काम
अंधेर नगरी चौपट राजा यह कहना बिल्कुल भी गलत नहीं होगा यही वजह है कि इतने बड़े काम को ठेकेदार ने इतने कम दरों पर ले लिया है और इस काम में खानापूर्ति की जा रही है, जब काम ना करने की क्षमता थी तो फिर इतने कम दामों में काम लेने की आखिर वजह क्या थी? सुपरविजन करने वाले अधिकारी भी ना जाने ठेकेदार से किस प्रकार मोहित हैं कि उनके कामों की तरफ उनका ध्यान ही नहीं जा रहा, आज जिसका नतीजा है कि डेंगू जैसी बीमारियों के चपेट में आने का खतराकर्मियों व उनके परिजनों को सता रहा है।
डेंगू के बाद जागा प्रबंधन
कटकोना एसईसीएल प्रबंधन डेंगू की पुष्टि होने के बाद जाग गया है और अब साफ सफाई करने में जुट गया है पर आखिर सवाल यह है क्या प्रबंधन ऐसी बीमारियों का इंतजार कर रहा था? कि जब ऐसी बीमारियां फैलने की तब वह साफ सफाई पर ध्यान देगा? आखिर ठेकेदार की मदद क्यों की जा रही थी? जब एसईसीएल के द्वारा कर्मचारियों के आवासों को सर्वसुविधा युक्त बनाने के लिए करोड़ों खर्च करने को तैयार है तो फिर खर्च कराने वाले भ्रष्टाचार करने पर क्यों जुटे है, जिसका जीता जागता उदाहरण है एसईसीएल में एनुअल मेंटेनेंस क्लीनिंग के काम में भारी भ्रष्टाचार देखा जा रहा, 9 महीने के बाद डेंगू के दशक के बाद प्रबंधन गहरी नींद से जागा है और अब साफ सफाई पर ध्यान दे रहा है आखिर 9 महीने तक क्या ठेकेदार को लाभा पहुंचाने के लिए उसके काम पर ध्यान नहीं दिया जा रहा था।
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