- शिक्षकों के स्कूल से नदारद होने व नेतागिरी करने की शिकायतें आम, शिकायतों पर कार्यवाही से पहले ही शिक्षकों को मिल जाती है जानकारी कैसे?
- शिकायतकर्ता जो वास्तव में समाज के प्रहरी हैं,
- जो सिस्टम की वजह से हो रहे हैं निराश।
- शिक्षकों को शिकायतों पर जांच से पहले कैसे अधिकारियों की आने की भनक पड़ जाती है, कर लेते हैं पूरी तैयारी?
- जांच अधिकारी के आने से पहले शिक्षक शिकायतकर्ता को मैनेज कर रहते हैं तैयार,क्या यही है जांच पद्धति?
-रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर, 31 अगस्त 2022 (घटती-घटना)। अभी तक जितनी भी शिकायतें शिक्षकों के हुए, सभी पर जांच दल पहुंच तो रहा, पर शिक्षक मिल रहे अप टू डेट। ऐसा लग रहा पहले से ही शिक्षकों को अधिकारियों के आने की रहती है जानकारी। यूं तो शासकीय कर्मचारियों के राजनीतिक दखलअंदाजी पर सेवा नियमों के अनुरूप प्रतिबंध रहता है। परंतु कोरिया जिले में बिल्कुल इसके उलट कार्य होता नजर आ रहा है। जहां कई शासकीय शिक्षक पद में रहते हुए खुलेआम सत्ता पक्ष की सांठगांठ से नेतागिरी कर रहे हैं, पंचायतों में ठेकेदारी कर रहे हैं, कार्य के समय के दौरान जमीन की दलाली, राजनीतिक गतिविधियों में हिस्सा और सोशल मीडिया में राजनीतिक पोस्ट डालने से भी नहीं डरते। ऐसे शिक्षक जिनकी विद्यालयों में उपस्थिति नहीं के बराबर है, अपने विद्यालयीन कार्यकाल का पूरा समय अन्यंत्र अतिरिक्त आय अर्जित करने में व्यतीत करते हैं, जिनकी अनेक अनेक शिकायतें बारंबार विभागीय अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत की जाती रही है, पर जाने ऐसा कौन सा दबाव है कि अधिकारी इन पर कार्यवाई करने से डरते हैं या कार्यवाही का केवल दिखावा प्रस्तुत करते हैं।
ताजा घटनाक्रम के अनुसार विगत दिनों छत्तीसगढ़ शासन के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कोरिया दौरे के भेंट मुलाकात कार्यक्रम के दौरान ऐसे ही कई शिक्षकों और सरकारी कर्मचारियों की शिकायतें जनता ने मुख्यमंत्री के समक्ष आवेदन के माध्यम से प्रस्तुत की। परंतु विडंबना यह है कि जिन शिक्षकों के विरुद्ध शिकायतें दर्ज हुई, उन पर अधिकारियों ने जांच के पूर्व ही शिकायतकर्ताओं के नाम उजागर कर दिए और साथ ही उन्हें इस बात से भी अवगत करा दिया गया कि अमुक दिन आप की जांच के लिए आने वाले है। कुछ मामलों में हुआ यह कि जिनके विरुद्ध शिकायत थी उन्होंने समयानुसार शिकायतकर्ताओं को मैनेज कर लिया और स्वयं शिकायतकर्ताओं के साथ ही जांच वाले दिन अधिकारियों का एक साथ इंतजार करते दिखे यह कैसी जांच? और यह कैसा दिखावा ? कि अधिकारियों द्वारा उस व्यक्ति को पहले ही सूचित कर दिया जाता है जिसके विरुद्ध शिकायत है और साथ ही शिकायतकर्ता का नाम पहले से उजागर कर दिया जाता है ताकि उसे मैनेज किया जा सके। यदि निष्पक्ष जांच नहीं करनी है, शिकायतकर्ता की बातों को नजरअंदाज ही करना है, ऐसे कदाचरण वाले कर्मचारियों पर कार्यवाही नहीं करनी है,तो फिर यह जांच करने का दिखावा क्यों? जहां एक और शासन-प्रशासन शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए नित नए प्रयोग कर रहे हैं, एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ऐसे कदाचरण वाले शिक्षकों के बारंबार शिकायत होने पर भी कार्यवाही ना होना और केवल कार्यवाही का तथा जांच का दिखावा होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। ऐसे में विद्यालयों और शिक्षा की बदहाल स्थिति तथा छात्रों के अंधकारमय भविष्य का जिम्मेदार आखिर कौन है?
शिकायतकर्ता जो वास्तव में समाज के प्रहरी हैं, हो रहे हैं निराश
आमतौर पर शासकीय कार्यों के क्रियान्वयन के लिए और सुचारू संचालन के लिए जहां शासन प्रशासन और अधिकारी कर्मचारी जिम्मेवार हैं, वहीं दूसरी ओर समाज की जागरूक जनता भी सुचारू संचालन में अपना महत्वपूर्ण कदम निभाती है। कमियां पाई जाने पर जनता द्वारा की जाने वाली शिकायतें भी इसी का एक रूप है। परंतु जब एक ही प्रकार की शिकायत एक ही व्यक्ति पर होने पर भी कार्यवाही ना हो और जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा लीपापोती कर मामले को रफा-दफा कर दिया जाए, तो कहीं ना कहीं जागरूक जनता का मन भी हताश और निराश हो जाता है। जहां एक ओर शिकायतकर्ता का मनोबल टूटता है वही रसूखदार व्यक्तियों के शिकायत के कारण शिकायतकर्ताओं को और कई प्रकार की परेशानियां झेलनी पड़ती है। इसका दूरगामी परिणाम यह होगा कि जैसा चलता है वैसा चलने दो” की तर्ज पर लोग और निरंकुश होते जाएंगे और कार्य योजना का लक्ष्य अधूरा रह जाएगा। लाभान्वित होने वाले लोग अपने आप को ठगा महसूस करेंगे। आवश्यकता है कि शिकायतकर्ताओ कि गोपनीयता का ध्यान रखते हुए उचित जांच कर कार्यवाही सुनिश्चित करने की ताकि व्यवस्था बनी रहे।
शिकायतें कई टेबल से होते हुए हम तक पहुंचती है इस बीच इसकी जानकारी किसी को हो जाती है तो उसमें हम क्या कर सकते हैं, ऐसे जांचों के लिए औचक निरीक्षण की आवश्यकता है कभी ऐसा हो तो तत्काल शिकायत करें ताकि औचक निरीक्षण हो सके।
देवेश जयसवाल
ब्लॉक अधिकारी बैकुंठपुर
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