रायपुर, 30 अगस्त 2022। छत्तीसगढ़ मे अब आदिवासियो की जमीन पर लगे हुए पेड़ काटने पर 3 साल की सजा के साथ एक लाख रुपए का जुर्माना भरना पड़ेगा। छत्तीसगढ़ की राज्यपाल अनुसुइया उईके ने छत्तीसगढ़ आदिम जनजाति सरक्षण अधिनियम 1999 के सशोधित विधेयक पर अपनी मोहर लगा दी है।
आदिम जनजाति का सरक्षण अधिनियम 1999 की धारा 9 मे किए बदलाव के अनुसार आदिवासियो की जमीन के वृक्षो को अगर कोई काटता है या नुकसान पहुचता है तो वो अपराध के श्रेणी मे गिना जाएगा। साथ ही इसके लिए सजा का भी प्रावधान होगा।
बता दे कि राज्यपाल अनुसुइया उईके ने छत्तीसगढ़ आदिम जनजातियो का सरक्षण (वृक्षो मे हित) (सशोधन) विधेयक 2022 पर हस्ताक्षर कर दिया है। मूल अधिनियम की पाच धाराओ मे सशोधन करने के साथ इसकी एक धारा को विलोपित किया गया है। विधानसभा मे राज्य सरकार द्वारा इस विधेयक को सर्व सहमति से पास करवाया गया था।
प्रमुख सशोधन
अधिनियम की धारा 4 के अनुसार आदिम जनजाति के जमीन मालिक को पेड़ काटने की अनुमति के लिए अब कलेक्टर की जगह अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को आवेदन देना होगा। “अनुविभागीय अधिकारी” आवेदन की जाच कराएगा। जिसके बाद ही राजस्व विभाग और वन विभाग के सयुक्त जाच प्रतिवेदन पर विचार कर अनुमति के सबध मे कोई निर्णय लिया जाएगा। वही मूल अधिनियम की धारा 5 को विलोपित किया गया है।
धारा 6 मे सशोधन किया गया है कि जमीन मालिक को पैसे का भुगतान अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमो और प्रक्रियाओ के अनुसार किया जाएगा। धारा 8 मे अपील, पुनरीक्षण और पुनर्विलोकन के उपबध जैसे कि वे सहिता मे बताया गया है।
धारा 9 के सशोधन के अनुसार कोई व्यक्ति जो आदिम जनजातियो के जमीन के वृक्षो को काटता है, नुकसान पहुचाता है, काट-छाट करता है या किसी भाग को हटाता है तो आरोप सिद्ध होने पर तीन साल की सजा और एक लाख रुपये जुर्माना देना होगा।बता दे इससे पूर्व जुर्माना रकम केवल दस हजार रुपये निर्धारित थी।
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