
अम्बिकापुर,28 अगस्त 2022 (घटती-घटना)।. नारायणी परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के आज दूसरे दिन में धाम वृंदावन से पधारे पूज्य श्री अनिरुद्धाचार्य जी महाराज के पावन मुखारविंद से कथा का श्रवण पान करने पधारे हजारों भक्तों को आज द्वितीय दिवस की पावन कथा में आरती के साथ शुभारंभ करते हुए बताया कैसे हम अपने कर्मों से महान बनते हैं कैसे हमारे कर्म ही हमें पूजनीय वंदनीय बनाते हैं और कैसे हमारे कर्मों के बिगड़ जाने पर हम इस समाज से तिरस्कृत किये जाते हैं । वह कर्म ही है जो हमें महान बनाते हैं कर्म ही हमें योग्य बनाते हैं ।इस करण आप यह देखें कि आप जो भी कर्म कर रहे हैं क्या वह आपकी और भगवान की दृष्टि में सही हो सकते हैं ।
कर्म प्रधान विश्व रचि राखा। जो जस करहि सो तस फल चाखा
तुलसीदास जी की इस चौपाइ का अर्थ बताते हुए पूज्य महाराज जी ने बताया – की तुलसीदास जी कहते हैं कि यह विश्व, यह जगत कर्म प्रधान है। जो जैसा कर्म करता है, उसे वैसा ही फल प्राप्त होता है। इस प्रकार कर्मों की प्रधानता के ऊपर से प्रकाश डालते हुए बताया साथ ही वहां बैठे हजारों भक्तों को अपनी मधुर आवाज में संगीत के साथ मधुर भजनों का आनंद प्राप्त कराया ।जिससे वहां बैठे लोग मस्ती और आनंद में होकर झूमने लगे । दिव्य आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ में कथा का विश्राम हुआ । बंसल परिवार पावड़ा साहू वाले समस्त भक्त जनों के साथ उपस्थित रहे ।
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