-राजा मुखर्जी-
कोरबा , 27 अगस्त 2022 (घटती-घटना)। हसदेव बायीं तट नहर की मरम्मत 16 दिन बाद भी नहीं हो पाई है। अब जो हिस्सा धंसा था, वहां मिट्टी भरने की बजाय मिट्टी से भरी बोरियों से फिलिंग की जा रही है। इससे पानी का प्रेशर से फिर दबने की आशंका व्यक्त की जा रही है। नहर से अभी सिंचाई पूरी तरह बंद है। बारिश थमने के बाद अब पानी की डिमांड रही है। हसदेव बायीं तट नहर का 10 अगस्त को सीतामढ़ी के पास डक्ट किनारे का मिट्टी धंसने से आसपास की बस्तियों में पानी भर गया था। डक्ट और मिट्टी का बड़ा हिस्सा कटने के साथ ही नहर के दोनों ओर छेद होने से पानी तेज गति से जा रहा था। अब दोनों छेद को कंक्रीट से भरने के बाद मिट्टी फीलिंग करा रहे थे, लेकिन चीफ इंजीनियर एके सोमावार और अधीक्षण अभियंता डीके बूमेरकर ने मिट्टी फिलिंग को बंद करा दी, उसके स्थान पर बोरी में मिट्टी और रेत डालकर गड्ढे को पाट रहे हैं, लेकिन मुख्य नहर होने की वजह से पानी का तेज बहाव होता है, इससे फिर से नहर दबने की आशंका व्यक्त की जा रही है। विभाग के इंजीनियर ही दबी जुबान से कह रहे हैं कि, जिस तरह अस्थाई मरम्मत का काम चल रहा है, वह टिकाऊ नहीं है। इतने दिन में तो नए सिरे से नहर ही बन जाती, लेकिन बड़े अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। मिट्टी फिलिंग का काम एक-दो दिन में हो जाना था।
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