
-ओमकार पांडेय-
सूरजपुर 25 अगस्त 2022 (घटती-घटना)। केंद्र से लेकर राज्य की सरकार महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना में राशि खर्च कर ग्रामीण अंचलों में ग्रामीणों को रोजगार व वाटर लेबल दुरुस्त करने के उद्देश्य से कुंआ का निर्माण के लिए राशि स्वीकृत कर रही है। किंतु वहीँ दूसरी ओर अफसर इस हितग्राही मुलक योजना में भ्रष्टाचार कर रहे है। जिस कुंआ से ग्रामीण पानी का उपयोग में लाते वो कुंआ अब सो पीस बन कर रह गया है। जिला मुख्यालय के समीप ग्राम पर्री निवासी पीताम्बर आत्मज मदन राम के निजी भूमि पर कुंप निर्माण कराया गया है। जिसका प्रशासनिक स्वीकृति 4 लाख 50 हजार रुपये है। इस कार्य का प्रारम्भ 16 मई 2020 को किया गया था। साथ ही कार्य 16 दिसम्बर 2020 को पूर्ण किया गया है। इस कुंआ की गहराई 3 – 4 मीटर है। चौड़ाई 5 मीटर आस पास होगी। जबकि महात्मा रोजगार गारंटी योजना में 60 / 40 रेसीयू से कार्य कराया जाता है। 60 मटेरियल लगता है तो वहीँ 40 प्रतिशत मजदूरों से कार्य कराया जाता है। 4 लाख 50 की लागत से निर्मित कुंआ में 8-10 मीटर की गहराई होना चाहिए था। जिसमें बंधाई 6 मीटर होना था।
मेटेरियल बंधाई में बरती गई अनिमियता
जनपद के एसडीओ, तकनीकी सहायक द्वारा माप दंड को दरकिनार कर कार्य कराया जा रहा है। जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण इस कुँआ में देखने को मिल सकता है। कुँआ में लीपा पोती कर लाखों की राशि गबन कर दिया गया है। कुँआ 1 वर्ष में ही सुख गया है। क्योंकि गहराई की खुदाई नही की गई थीं। वहीँ कुँआ के बंधाई दौरान बने जगत भी टूटने लगे है। कुँआ का जगत उपयोग हुए बगैर ही टूटने लगा है। जिस कारण 1 वर्ष में ही टूटने लगे है। सूरजपुर जनपद पंचायत में एसडीओ होने के बाद भी उपयंत्री को एसडीओ का प्रभार दिया गया है। प्राभारियो के मत्थे होने के कारण कार्य मे लापरवाही बरती जा रही है।मामले की निष्पक्षता से जांच हो तो दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा।
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