
अम्बिकापुर,09 अगस्त 2022(घटती-घटना)। मुस्लिम समुदाय द्वारा पूरे जिले में मंगलवार को मुहर्रम का पूर्व शांति व भाईचारे के साथ सादगी पूर्वक मनाया गया। मुहर्रम के दस वें दिन शहर में मुस्लिम समाज के लोगों ने शांति पूर्वक जुलूस निकाला। पिछले दो वर्ष बाद मुहर्रम के अवसर पर शहर में जुलूस निकाला गया। कोरोना काल के दौरान दो वर्षों से धार्मिक आयोजनों पर प्रतिबंध था। इस वर्ष कोरोना की रफ्तार कम रहने के कारण उत्साह पूर्वक मोहर्रम का त्योहार मनाया गया। ताजिए व अलमदार अपने-अपने चौक पर सुबह 8 बजे से फातेहा खानी व लंगरखानी की गई। फतेहा गरबानी के बाद दसवीं मोहर्रम का जुलूस श्रीगढ़ की गई। इसके बाद जुलूस पर्राडांड, महामाया रोड, महामाया चौक, कदम्बी चौक, सदर रोड, अग्रसेन चौक से होते हुए पैलेस रोड होते हुए वापस हुई। इसके बाद अंत में करबला में फातिहाखानी कर मुहर्रम के पहलाम का विधिवत समापन देर रात को किया गया। मुस्लिम समाज द्वारा इमाम हसन-हुसैन के शहादत की याद का मातमी पर्व मुहर्रम पिछले 10 दिनों से मनाया जा रहा था। समाज के लोगों द्वारा अपने घरों में फतिहाखानी के साथ ही मिलाद शरीफ का आयोजन किया। समाज के लोगों द्वारा मुहर्रम की आठ तारीख को छोटी चौक व नौ तारीख को बड़ी चौक बिठाकर फातिहाखानी की गई वहीं अंतिम दिन मंगलवार को पहलाम मनाया गया। मुहर्रम की 10 तारीख को सुबह से ही लोगों द्वारा मिलाद शरीफ व लंगरखानी का आयोजन किया गया। विश्व आदिवासी दिवस व मुहर्रम का आयोजन एक दिन होने से पुलिस प्रशासन की परेशानी बढ़ी रही। दोनों बड़े आयोजन थे। इस लिए पुलिस प्रशासन द्वारा आयोजन को लेकर पूर्व से ही तैयारी की गई थी। सुबह से ही जगह-जगह पुलिस बल तैनात किए गए थे। मुहर्रम जुलूस के दौरान भी पुलिस की सक्रियता देखी गई। वहीं शांति व्यवस्था बनाए रखने में मुस्लिम समाज के लोग व विश्व आदिवासी दिवस कार्यक्रम में शामिल होने आए लोगों ने भी भूमिका अहम रही।
समाज के लोग अपने ताजिया व अलम के साथ शहर के विभिन्न मार्ग से होते हुए सदर रोड स्थित कदम्बी चौक पहुंचे। यहां समाज के लोगों द्वारा जुलूस की मिलन कराई गई व विभिन्न प्रकार के करतब दिखाए गए। इस दौरान जुलूस में महिलाएं भी शामिल रहीं। महिलाओं द्वारा इमाम हसन-हुसैन के शहादत की याद मातमि गीत गाती रहीं।
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