–नगर संवाददाता-
अम्बिकापुर,04 अगस्त 2022(घटती-घटना)।सरगुजा संभाग में एक बार फिर धरती डोली। इस भूकंप का केंद्र सूरजपुर जिला रहा। इससे संभाग के सूरजपुर, कोरिया व सरगुजा जिले में भूकंप के झटके लोगों ने महसूस किए। इस भूकंप से कहीं किसी प्रकार के नुकसान की खबर नहीं है। हालांकि सूरजपुर जिले के भैयाथान ब्लॉक स्थित एक स्कूल की दीवारों पर दरारें आ गईं। इसे देखते हुए सूरजपुर जिले के सभी सरकारी व प्राइवेट स्कूलों में 12.30 बजे के बाद छुट्टी दे दी गई। इस बार आए भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4.7 मापी गई। इसके पूर्व 11 जुलाई को 4.3 रिक्टर तथा 29 जुलाई को 4.6 रिक्टर का भूकंप आया था। इन दोनों ही भूकंप का केंद्र कोरिया जिले के बैकुंठपुर व चरचा कॉलरी के आसपास रहा। सरगुजा संभाग में 4 अगस्त को भारतीय मानक समय पर 11 बजकर 57 मिनट व 1 सेकंड पर एक बार फिर भूकंप आया। पिछली बार 11 जुलाई को संभाग के कोरिया जिला मुख्यालय बैकुंठपुर के पास 4.3 रिक्टर का भूकम्प आया था। इसके 18 दिन बाद 29 जुलाई को लगभग उसी जगह 4.6 रिक्टर पैमाने का भूकम्प आने से लोगों को हैरानी हुई थी। त्वरित दो भूकम्पों की आवृत्ति के बाद आज सूरजपुर जिले में अंबिकापुर से पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम दिशा में 41 किमी दूर फिर से धरती डोलने की घटना में लोगों को हैरान किया है।
भूकम्प की तीव्रता 3.0 रिक्टर
मौसम वैज्ञानिक एमएम भट्ट के अनुसार गुरुवार को आए भूकम्प की तीव्रता भूमि सतह से 10 किमी की गहराई में 3.0 रिक्टर मापी गई। वहीं भूकंप का केंद्र 23.0 उत्तरी अक्षांश और 82.8 पूर्वी देशान्तर पर स्थित था। हालांकि यह सामान्य श्रेणी का भूकम्प था जो बड़ा नुकसान पहुंचाने की क्षमता नहीं रखता। फिर भी केंद्र के पास जहां कंपन अधिक होता है वहां यह प्रभावकारी हो सकता है। भूकंप से भैयाथान ब्लॉक के गंगोटी स्थित हाईस्कूल की दीवारों पर दरारें आ गई हैं। इधर भूकंप के कारण सूरजपुर कलक्टर इफ्फत आरा ने डीईओ विनोद राय को जिले के सभी शासकीय व निजी स्कूलों में छुट्¸टी करने के निर्देश दिए। निर्देश के पालन में डीईओ ने व्हाट्सएप गु्रप में छुट्टी का आदेश जारी किया। इसके बाद दोपहर 12.30 बजे से सभी स्कूलों में छुट्टी कर दी गई।
इस कारण आता है भूकंप
‘भूकम्प’ का शाब्दिय अर्थ भूकम्प अर्थात भूमि या धरती का कम्पन है। भूकम्प की परिभाषा में कहा गया है कि भूकम्प भूपटल के कम्पन की वह अवस्था होती है जो धरातल के नीचे अथवा ऊपर के विशाल चट्टानों या पहाड़ों के लचीलेपन या गुरुत्वीय संघर्षण के कारण उत्पन्न क्षणिक अव्यवस्था के कारण होती है।
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