लगभग दो दशक तक बंद रहने के बाद आखिर फिर से किसके संरक्षण में सक्रिय हुए सूदखोर और बैंक दलाल।
चिरमिरी के सभी बैंकों में बड़ढ़ी दलालों की सक्रियता,बैंक के सामने अक्सर दलालों,सूदखोरों और मजदूरों के बीच होती है छीना झपटी व हुज्जत
-रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर 03 अगस्त 2022 (घटती-घटना)।कहते हैं कि प्रशासन के सहमति बगैर एक तिनका भी नहीं हिल सकता, इन दिनों चिरमिरी क्षेत्र के सक्रिय चर्चित दलाल और सूदखोर काफी सुर्खियों में बने हुए हैं, एक बार फिर इन सूदखोरों के गिरफ्त में आकर एक भोले-भाले श्रमिक में इनकी प्रताड़ना को बर्दाश्त नहीं कर सका और मजबूरन आत्महत्या करनी पड़ी विडंबना तो यह है कि इन सब कार्यों पर अंकुश लगाने वाली पुलिस उन सूदखोरों पर कार्यवाही के आज तक उनके गिरेबा तक नहीं पहुंचने पाई साथ ही जब पीडि़त पक्ष ने लिखित आवेदन थाने में दिया तो उस पर आज भी कार्यवाही करने से कतरा रही है कार्रवाई करने के बजाय कंप्रोमाइज पर ज्यादा बल दे रही है चिरमिरी इलाके में अवैध कार्यों की उगाही के और सेटिंग करने में महारत प्राप्त प्रसिद्ध गोलू पुलिस कि यहां पर भी स्थिति संदिग्ध बताई जाती है इसका संबंध अंकुर जैन से काफी मधुर है जन चर्चा यह भी है कि इसके द्वारा लगभग तीन लाख लिए गए है यदि आरोप गलत हैं तो उक्त दलाल और पुलिस के बीच क्या रिश्ता है? आखिर क्यों पुलिस उक्त दलाल पर कार्रवाई करने से कतरा रही है इस तरह का यह अकेला मामला नहीं है लगभग पूरे चिरमिरी बैकुंठपुर मनेंद्रगढ़ झगड़ा खंड लेदरी खोंगा पानी सहित आसपास के क्षेत्रों में निवासरत लगभग 150 एसईसीएल श्रमिक इसके गिरफ्त में हैं और इसी तरह का शोषण इसके द्वारा किया जा रहा है।
विदित हो कि चिरमिरी क्षेत्र के कोरिया इलाके में निवासरत श्रमिक अपने परिवार के साथ रख कर अपना जीवन यापन कर रहे थे भोला भाला श्रमिक जो दिन-रात कोयला खदानों में काम करके घर और अपने परिवार को ही अपना सब कुछ समझ कर अपना साधारण जीवन यापन करने वाले का संपर्क अंकुर जैन नामक जनरल स्टोर संचालक जो हल्दीबाड़ी में निवास करता है से हो गई उसने बावली राउल के नाम पर सेंट्रल बैंक और स्टेट बैंक दोनों बैंकों से लाखों रुपए निकाले गए जिसमें चार लाख की राशि अंकुर जैन ने यह बोलकर ले लिया कि आपके एसबीआई अकाउंट में जमा कर दूंगा, आरोप है कि उसने एक भी पैसा बैंक में जमा नहीं किया।
मासिक सैलरी आते ही शुरू होता है खेल
बैंक के नियमों के मुताबिक एक श्रमिक जिसका मासिक सैलरी जिस बैंक में आता है, वही से उसे लोन प्राप्त होगा, आखिर ऐसा कैसे हो सकता है कि जिस बैंक में उसकी सैलरी नहीं आ रही है वह बैंक उससे ऋण कैसे दे सकता है, इन सभी मामलों की जब बारीकी से पड़ताल की गई तो एसईसीएल के अकाउंट शाखा में बैठे अधिकारियों और कर्मचारियों की स्थिति काफी संदिग्ध है यह इन दलालों से मधुर संबंध रखते हैं एसईसीएल के अधिकारियों और बैंक प्रबंधन के बीच कुछ वर्ष पहले इस बात का समझौता हुआ था कि जब तक जिस बैंक में सैलरी आ रही है वह बैंक मैनेजर की अनापत्ति प्रमाण पत्र ना मिले तब तक दूसरे बैंक में उस श्रमिक को प्रबंधन से मिलने वाली मासिक सैलरी का हस्तांतरण नहीं किया जा सकेगा और बड़े दिनों तक इस पर अमल भी किया गया लेकिन इन दिनों एसईसीएल जी एम ऑफिस में लालची प्रवृत्ति के बैठे अधिकारी और बाबू इन दलालों से मधुर संबंध रखकर एक मोटी राशि लेकर के उनके आवेदन पर बैंक प्रबंधन की बिना एन ओ सी के एक बैंक से दूसरे बैंक में सैलरी भेज देते हैं, इस तरह से भोले भाले के श्रमिकों को फंसा कर एक श्रमिक के नाम पर दो दो जगह लोन कराने का सिलसिला पूरे चिरमिरी क्षेत्र में बदस्तूर जोरों से चल रहा है, बैंक प्रबंधन भी इस पूरे मामले में संदेह की स्थिति में है बैंक मैनेजर अपने 10, 15 प्रतिशत कमीशन के लिए वह सांस की राशि को अधिक से अधिक वितरण करने की चेष्टा रखते हैं और दलालों को हटाकर काफी बड़े पैमाने में क्षेत्र में लोन बांट रहे हैं बैंक प्रबंधन को चाहिए कि एसईसीएल के अकाउंट शाखा में बैठे भ्रष्ट बाबू की सीबीआई सहित अन्य जांच एजेंसियों में इनकी शिकायत करें ताकि यह नियमों के विरुद्ध जाकर चंद पैसे के लालच में भोले भाले श्रमिकों को लूटने का काम इन दलालों के माध्यम से कर रहे हैं यदि इन मामलों की बारीकी से जांच की जाए तो लगभग पूरे चिरमिरी इलाके में 200 से 300 श्रमिक हैं जिन का सैलरी एक बैंक से दूसरे बैंक में हस्तांतरित किया गया है एक मजदूर की मासिक कमाई सीमित है दो जगह से लोन निकालकर उसका पूरा जीवन अस्त-व्यस्त कर देने वाले दलाल इन दिनों 25.25 लाख रुपए की गाडç¸यों में घूम रहे हैं और कई करोड रुपए की अकूत संपत्ति के मालिक बन बैठे हैं, आखिर चिरमिरी पुलिस इन पर कार्यवाही करने से क्यों कतरा रही है?
दो दशक पूर्व जिस तरह सूदखोरों के गिरफ्त में हुआ रहते थे वैसा ही नजारा फिर से चिरमिरी में दिखने लगा
स्मरण रहे कि लगभग दो दशक पूर्व जिस तरह से सूदखोरों के गिरफ्त में चिरमिरी के श्रमिक हुआ करते थे वैसा ही कुछ नजारा फिर से चिरमिरी में देखने को मिल रहा है सूदखोरों का बढ़ता जाल,और आतंक फिर पूरे चिरमिरी पर इनका दबदबा, बैंकों में दलालों की बढ़ी सक्रियता,बैंक के मैनेजरो की मिलीभगत,शिकायत के बाद भी कार्यवाही नहीं,जैसी स्थिति चिरमिरी क्षेत्र में फिर हावी हुई है उस दौर में जब चिरमिरी में सूदखोरों का आतंक हुआ था आतंक के माहौल में पुलिस का एक जिम्मेदार अधिकारी प्रदुमन तिवारी तेजतर्रार अफसर के रूप में अपनी पहचान रखते हैं के द्वारा सूदखोरों और दलालों के आतंक को पूरी तरह से चिरमिरी से खत्म कर दिया गया था कई दलाल और सूदखोर चिरमिरी छोड़कर भाग गए थे कई पर अपराधिक प्रकरण बने थे कई आज तक चिरमिरी नहीं लौटे समय बिता लगभग दो दशक के बाद फिर प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर शांत और सौम्य माहौल वाली इसी धरती पर पुनः उन्हीं बैंक दलालों के परिवार के लोग अपने परिवार से तुलनात्मक प्रतिस्पर्धा करते हुए यह जानकर कि उनके अग्रज इसी चिरमिरी में भी बैंक लोन और सूदखोरी करके करोड़ों रुपए जमा किए गए हैं उन्हीं आज प्रतिष्ठित बन बैठे लोगों की अपना आइडल बना कर उसी राह पर यह नए नवेले लड़के भी चल पड़े हैं इनकी भी पैसे के प्रति भूख इन्हें अपराधिक प्रवृत्ति की ओर धकेल रही है और क्षेत्र के सम्मानित राजनीतिज्ञों का संरक्षण लेकर और सीधे साधे लोगों को अपना शिकार बनाया जा रहा है यही कारण है कि धीरे-धीरे पूरा चिरमिरी क्षेत्र इन लालची युवाओं के गिरफ्त में आता जा रहा है और पुलिस अपनी जिम्मेदारी को सिर्फ कंप्रोमाइज और उगाही में खत्म कर रही है।
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