रायपुर। राज्यपाल अनुसुईया उइके ने छाीसगढ़ अनधिकृत विकास का नियमितिकरण अधिनियम 2002 (क्र. 21 सन् 2002) मे सशोधन के लिए प्रस्तुत विधेयक पर हस्ताक्षर किए है। छाीसगढ़ अनधिकृत विकास का नियमितिकरण (सशोधन) विधेयक 2022 के अनुसार छाीसगढ़ अनधिकृत विकास का नियमितिकरण अधिनियम 2002 (क्र. 21 सन् 2002) की धारा 04 की उपधारा (2) के खण्ड (पाच), मूल अधिनियम की धारा 6 की उप-धारा (1) मे, मूल अधिनियम की धारा 7 की उप-धारा (1), मूल अधिनियम की धारा 9 की उप-धारा (2) तथा मूल अधिनियम की धारा 9 की उप-धारा (3) मे सशोधन किया गया है।
विधेयक मे छाीसगढ़ अनधिकृत विकास का नियमितिकरण अधिनियम 2002 के मूल अधिनियम की धारा 04 की उपधारा (2) के खण्ड (पाच) को प्रतिस्थापित करके नगर तथा ग्राम निवेश विभाग का जिले का प्रभारी अधिकारी/सयुक्त सचालक/ उपसचालक/ सहायक सचालक किया गया हैै। अधिनियम के खण्ड(चार)(क) मे निर्धारित प्रयोजन से भिन्न भूमि के उपयोग परिवर्तन करने पर उस क्षेत्र की भूमि के लिए वर्तमान मे प्रचलित कलेक्टर गाईड लाईन दर का 5 प्रतिशत अतिरिक्त शास्ति लगाने का प्रावधान किया गया है। अधिनियम मे प्रावधान किया गया है कि यदि अनधिकृत विकास निर्धारित पार्किग हेतु आरक्षित भूखण्ड / स्थल पर किया गया हो, तो नियमितिकरण की अनुमति तभी दी जायेगी, जब आवेदक द्वारा पार्किग की कमी हेतु निर्धारित अतिरिक्त शारित राशि का भुगतान कर दिया गया हो। अधिनियम मे कहा गया है कि दिनाक 01.01.2011 के पूर्व अस्तित्व मे आये ऐसे अनधिकृत विकास/निर्माण, जिनकी भवन अनुज्ञा/विकास अनुज्ञा स्वीकृति हो, अथवा ऐसे अनधिकृत भवन, जिसके लिए सबधित स्थानीय निकाय मे शासन द्वारा निर्धारित दर से सपçा कर का भुगतान किया जा रहा हो, ऐसे भवनो मे, यदि छाीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 अथवा सबधित नगर के विकास योजना के अनुरूप पार्किग उपलध नही है, तो पार्किग हेतु निम्नानुसार अतिरिक्त शास्ति राशि दिये जाने पर, भवन का नियमितिकरण इस प्रकार किया जा सकेगा कि पार्किग मे 25 प्रतिशत कमी होने पर प्रत्येक कार स्थान हेतु पचास हजार रूपये, 25 प्रतिशत से अधिक एव 50 प्रतिशत तक प्रत्येक कार स्थान हेतु एक लाख रूपये,50 प्रतिशत से अधिक एव 100 प्रतिशत तक प्रत्येक कार स्थान हेतु दो लाख रूपये का प्रावधान किया गया है। नए प्रावधानो के अनुसार दिनाक 01.01.2011 अथवा उसके पश्चात् अस्तित्व मे आये ऐसे अनधिकृत विकास / निर्माण, जिनकी भवन अनुज्ञा/विकास अनुज्ञा स्वीकृति हो, अथवा ऐसे अनधिकृत भवन, जिनके लिए सबधित स्थानीय निकाय मे शासन द्वारा निर्धारित दर से सपçा कर का भुगतान किया जा रहा हो, ऐसे भवनो मे, यदि छाीसगढ़ भूमि विकास नियग, 1984 अथवा सबधित नगर के विकास योजना के अनुरूप पार्किग उपलध नही है, तो पार्किग हेतु अतिरिक्त शास्ति राशि दिये जाने पर, भवन का नियमितिकरण इस प्रकार किया जा सकेगा कि पार्किग मे 25 प्रतिशत तक कमी होने पर प्रत्येक कार स्थान हेतु पचास हजार रूपये, 25 प्रतिशत से अधिक एव 50 प्रतिशत तक प्रत्येक कार स्थान हेतु एक लाख रूपये का प्रावधान किया गया है।
खण्ड (चार) मे कहा गया है कि शमन योग्य पार्किग की गणना इस प्रकार की जायेगी कि 500 वर्ग मीटर तक आवासीय क्षेत्र मे पार्किग हेतु उपलध न्यूनतम क्षेत्रफल प्रति कार स्थान (ईसीएस) के आधार पर निरक होगी जबकि 500 से अधिक क्षेत्र होने पर पार्किग हेतु उपलध न्यूनतम क्षेत्रफल प्रति कार स्थान (ईसीएस) के आधार पर 50 प्रतिशत होगी। गैर आवासीय क्षेत्र मे पार्किग हेतु उपलध न्यूनतम क्षेत्रफल प्रति कार स्थान (ईसीएस) के आधार पर निरक होगी जबकि 500 से अधिक क्षेत्र होने पर पार्किग हेतु उपलध न्यूनतम क्षेत्रफल प्रति कार स्थान (ईसीएस) के आधार पर 50 प्रतिशत होगी।
प्रावधान मे कहा गया है कि (ग) ऐसी गैर लाभ अर्जन करने वाली सामाजिक सस्थाये, जो लाभ अर्जन के उद्देश्य से स्थापित न की गई हो, के अनधिकृत विकास के प्रत्येक प्रकरण मे शास्ति प्राक्कलित राशि के 50 (पचास प्रतिशत की दर से देय होगा । छाीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 के नियम 39 मे निर्धारित प्रावधान के अनुसार, मार्ग की चौड़ाई उपलध नही होने के कारण, स्थल पर विद्यमान गतिविधियो मे किसी प्रकार का लोकहित प्रभावित न होने की स्थिति मे, नियमितीकरण किया जा सकेगा।
इसके अलावा मूल अधिनियम की धारा 7 की उप-धारा (1) के खण्ड (तीन) का लोप किया गया है। मूल अधिनियम की धारा 9 की उप-धारा (2) मे, शद ‘‘अपील के लबित रहने की अवधि मे अपीलकर्ता अनधिकृत विकास के मासिक भाड़े की राशि, जैसा कि प्राधिकारी द्वारा निर्धारित की जावे, नियमित रुप से जमा करेगा.‘‘ के स्थान पर, शद ‘‘अपील के लबित रहने की अवधि मे अपीलकर्ता द्वारा अनधिकृत विकास के मासिक भाड़े की राशि, जो एक वर्ष से अनधिक अवधि का देय होगा, जैसा कि प्राधिकारी द्वारा निर्धारित की जाये, नियमित रूप से जमा करेगा। यह प्रावधान समस्त लम्बित एव नवीन प्रकरणो पर प्रभावशील होगा‘‘ से प्रतिस्थापित किया गया है।
मूल अधिनियम की धारा 9 की उप-धारा (3) के परन्तुक के स्थान पर, निम्नलिखित से प्रतिस्थापित किया जाएगा ‘‘परतु अपील के लबित रहने की अवधि मे, अपीलकर्ता अनधिकृत विकास के मासिक भाड़े की राशि, जैसा कि इस अधिनियम के अतर्गत प्राधिकारी द्वारा निर्धारित किया गया हो, एक वर्ष से अनधिक अवधि के लिए जमा नियमित रूप से करेगा। यह समस्त लम्बित एव नवीन प्रकरणो पर प्रभावशील होगा‘‘
घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur