- एक पत्रकार को पकड़ने नाबालिक को थाना लाकर किया था प्रताडि़त…
- ऐसे प्रभारी का सम्मान क्या जिले को गौरवान्वित करने वाला है?
- बाल अधिकार संरक्षण आयोग के स्थापना दिवस के अवसर पर होगा सम्मान।
- बाल अधिकारों का हनन करने वाले मनेंद्रगढ़ थाना प्रभारी का भी होना है सम्मान।
- आदिवासी युवक पर अत्याचार का आरोप झेल रहे कोरिया जिले के खड़ड़गवां थाना प्रभारी का भी होगा सम्मान।
- क्या जिले में कोई अन्य योग्य एवं ऐसा पुलिस अधिकारी नहीं था जिसके ऊपर नहीं था कोई दाग।
- अधिकारियों को प्रसन्न कर सम्मान के लिए नाम भिजवाने में सफल हुए दो थाना प्रभारी।
- अधिकारियों के करीबी पुलिसकर्मियों सम्मान सूची में नाम आलोचना का विषय बना।
- थाना प्रभारियों का रिकार्ड कितनी भी खराब क्यों ना हो बस अधिकारियों से संबंध मधुर होने चाहिए?
- अधिकारियों व कर्मचारियों के मध्य संबंध कर्मचारियों के लिए वरदान से कम नहीं भले से काम विलन का क्यों ना हो?

-रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर,18 जून 2022(घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा स्थापना दिवस के अवसर पर रायपुर में एक दिवसीय सम्मेलन आयोजित शुक्रवार को हुआ है और इस सम्मेलन में बाल अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 7 पुलिसकर्मियों का सम्मान हुआ है जिसमें कोरिया जिले के भी दो पुलिस उपनिरीक्षकों का नाम सम्मानित किये जाने वाले 7 पुलिसकर्मियों में शामिल रहा। इनमें से एक उप निरीक्षक कोरिया जिले के पुलिस थाना खड़गवां के प्रभारी हैं वहीं दूसरे जिले के ही मनेंद्रगढ़ थाने के प्रभारी हैं। दोनों ही उपनिरीक्षकों का सम्मान रायपुर में किया जाएगा और यह सम्मान उन्हें विभाग की अनुशंसा पर मिल रहा है यह भी तय तथ्य है। अब जिले के दोनों पुलिस उपनिरीक्षकों को बाल संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के नाम पर राज्य स्तर पर सम्मानित होने को लेकर जिले के कुछ पुलिसकर्मियों में ही रोष देखा जा रहा है और ऐसी चर्चा है कि दोनों ही उप निरीक्षिकों का चयन विभागीय अधिकारियों की अनुसंशा पर की गई है और इसके लिए योग्यता और कार्य की गुणवत्ता की जगह उपनिरीक्षकों के अधिकारियों से व्यक्तिगत संबंधों का उन्हें फायदा मिला है। दोनों ही उपनिरीक्षकों पर कई आरोप लगे होने के बाद उन्हें इस सम्मान के लिए चयनित किया गया है इसको लेकर अन्य पुलिसकर्मियों में असंतोष भी देखने को मिल रहा है।
मनेंद्रगढ़ थाना प्रभारी पर नाबालिक को प्रताड़ित करने का लगा है आरोप
प्रदेश स्तर पर छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा स्थापना दिवस के अवसर पर रायपुर में बाल संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए कोरिया जिले के मनेंद्रगढ़ थाने के प्रभारी एवम उपनिरीक्षक सचिन सिंह का भी नाम शामिल किया गया और यह वही सचिन सिंह हैं जिनके ऊपर एक नाबालिक सहित उसकी माता को उसके घर से सुबह सुबह बिना किसी अपराध उठा कर पुलिस थाने सूरजपुर सहित पुलिस थाना पटना ले जाकर प्रताçड़त करने का आरोप लगा हुआ है। जैसा कि पुरुस्कार बाल संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए प्रदान किया जाना है और जबकि उप निरीक्षक सचिन सिंह पर महिला सहित उसके नाबालिक बच्चे की बेवजह प्रताड़ना का आरोप लगा हुआ है ऐसे में ऐसे पुलिस उपनिरीक्षक का नाम सम्मान के लिए चयनित किया जाना न्यायसंगत नहीं लगता है और यह गलत है ऐसा लोगों का कहना है।
खड़गवां थाना प्रभारी पर भी लगे हुए हैं गंभीर आरोप,उच्च न्यायालय में चल रहा है प्रकरण
उक्त सम्मान के लिए ही कोरिया जिले से दूसरा नाम उप निरीक्षक व खड़गवां थाना प्रभारी विजय सिंह का है,विजय सिंह पर जिले के ही एक आदिवासी युवक को बेवजह प्रताçड़त करने का आरोप विगत 12 वर्षों पूर्व लगा हुआ है और जिसका प्रकरण छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में चल रहा है। ऐसे में इनका नाम भी किसी उत्कृष्ट पुरुस्कार के लिए चयनित किया जाना समझ से परे है जैसा कि चर्चा जारी है।
अधिकारियों से नजदीकियां बनी सम्मान पाने की वजह
बताया जा रहा है कि दोनों उप निरिक्षिकों की वरिष्ठ अधिकारियों से खासी जमती है और इसी वजह से इनका नाम सम्मान के लिए भेजा गया है।वैसे चर्चा इसबात की भी है कि खड़गवां थाना प्रभारी की विभाग में इतनी पकड़ है कि आजतक उनका स्थानांतरण जिले से बाहर नहीं हो सका है। आरक्षक से उप निरीक्षक तक कि सेवा अभी तक कि उन्होंने जिले में ही प्रदान की है और करते चले आ रहें हैं वहीं लगातार इन्हें इनके मन अनुसार थाना प्रदान कर प्रभारी भी बना दिया जाता है वहीं मनेंद्रगढ़ थाना प्रभारी भी दो सालों से एक थाने के प्रभार में लगातार हैं और उन्हें भी कहीं अन्य जगह स्थानांतरित नहीं किया जाता जबकि कई स्थानांतरण सूची जारी हो चूंकि हैं और कई निरिक्षिकों को थाना प्रभारी बनने का इंतेजार है।
जिले में अन्य योग्य पुलिसकर्मी भी थे सम्मान पाने के अधिकारी
कोरिया जिले में कई अन्य पुलिसकर्मी और थे जो इस सम्मान के असली हकदार हो सकते थे लेकिन जिनका नाम सम्मान के लिए शामिल नहीं किया गया। अधिकारियों से नजदीकी का दो उपनिरीक्षकों को फायदा मिला अब चर्चा केवल इसी बात की है।
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