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अम्बिकापुर@परसा के ग्रामवासियों ने राहुल गाँधी को खदान शुरू करवाने के लिए लिखा पत्र

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अगर खदान विकसित नहीं हुई तो परसा के ग्रामीण करेंगे अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन,मुख्यमंत्री को भी कराया अवगत

अम्बिकापुर, 15 जून 2022(घटती-घटना)। कुछ सप्ताह से राजस्थान की परसा ईस्ट एवं केते बासेन खदान के समर्थन में चल रहे अभियान के अंतर्गत परसा गाँव क्षेत्र के लोगों ने एक बार फिर से कांग्रेस नेता राहुल गाँधी को पत्र लिखकर जल्द ही योजना के दूसरे चरण को हरी झंडी दिलाने के लिए अनुरोध किया है। सुरगुजा जिले के परसा गाँव के करीब छः सौ से अधिक प्रतिनिधियों ने स्वहस्ताक्षरित कर लिखे गए पत्र में उन्होंने इशारा भी किया है की उनकी मांगो को अगर अनुकूल प्रतिफल नहीं मिला तो उन्हें अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन करना पड़ेंगा । यह पत्र छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गेहलोत के अलावा स्थानीय कांग्रेस नेता और छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंहदेव को भी लिखा गया है। अपने संभावित प्रदर्शन को लेकर परसावासियों ने स्थानीय कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को भी अवगत कराया है। “परसा ईस्ट एवं केते बासेन कोयला खनन परियोजना अब बंद होने की स्थिति में है, जिसके कारण प्रभावित क्षेत्र के लोगों को रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल आदि प्रकार के संकटो से जूझने की स्थिति बन जायेगी। मुख्यतः हमारे आर्थिक स्थिति पर विशेष प्रभाव पड़ेगा। हम सभी को रोजगार प्राप्त है,वहीं इसके बंद होने से हम सभी लोग बेरोजगार हो जाएंगे। श्रीमान जी से निवेदन है की इन सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए हमारी मांगो का उचित निराकरण करें। यदि तत्काल इसका निराकरण नहीं हो पाता तो हम सभी को विवश होकर अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन करने पर मजबूर हो जाएंगे,” परसा के स्थानीय नेता और ग्रामवासियों ने लिखा है। याद दिला दें की इससे पहले भी स्थानीय लोगो ने जून 2 को राहुल गाँधी को पत्र लिखकर ग्राम परसा, फतेहपुर, बासन, घटबर्रा, साल्हि, जनार्दनपुर तथा तारा के निवासियों ने राजस्थान की खदान परियोजनाओं में हो रही देरी के कारण हो रहे रोजाना नुकसान के बारे में विस्तार से बताया था। जल्द ही परियोजनाओं को शुरू करने की बात दोहराते हुए प्रभावित क्षेत्र के स्थानीय लोगों ने ये भी बताया की कुछ बाहरी लोग और फर्जी एनजीओ के साथ मिल कर गांव वालों को इस परियोजना के खिलाफ भड़काने का कार्य कर रहे हैं। गाँव वालो ने अनुरोध किया था की बाहरी लोगों एवं एनजीओ द्वारा क्षेत्र में चलाये जाने वाली गैरकानूनी गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाई जाए। ग्रामवासियों का कहना है की महामारी के समय पर खदान परियोजना के तहत चलने वाले जनलक्षी कार्यक्रमों से वे कोविड से सफलता पूर्वक लड़ पाए थे तब ये बाहरी आंदोलनकारी गायब थे। ग्रामवासियों को फिक्र है कि जब बाहरी तत्व परसा के भविष्य को अंधकार में डालकर चले जाएंगे तब वे रोजगार और विकास के लिए कई साल पीछे चले जाएंगे।
उल्लेखनीय है कि देश के सबसे बड़े कोयला उत्पन्न करने वाले छत्तीसगढ़ में भारत सरकार द्वारा अन्य राज्य जैसे गुजरात, महाराष्ट्र, आँध्रप्रदेश, राजस्थान इत्यादि को कोल् ब्लॉक आवंटित किये गए हैं। जिसमें राजस्थान सरकार के 4400 मेगावॉट के ताप विद्युत उत्पादन संयंत्रों के लिए सरगुजा जिले में तीन कोयला ब्लॉक परसा ईस्ट केते बासेन (पीईकेबी), परसा और केते एक्सटेंशन आवंटित किया गया है। आज राजस्थान की पहेली ब्लॉक परसा ईस्ट एवं केते बासेन खदान अकेले पर करीब 5000 से ज्यादा परिवार निर्भर है और यह संख्या बाकी दो खदानों के शुरू हो जाने से तीन गुनी हो जायेगी। इससे स्थानीय ग्रामवासियों को रोजगार के लिए पलायन करना नहीं पड़ेगा। साथ ही राजस्थान के विद्युत् निगम द्वारा सीएसआर के अनेक कार्यक्रमों का विस्तार होगा, जिसमे 100 बिस्तर वाले अद्यतन अस्पताल का भी प्रावधान है। यह उल्लेखनीय है की विद्युत् निगम को खदान परियोजनाओं के लिए केंद्र और छत्तीसगढ़ सरकार की जरुरी सारी ही अनुमति मिल चुकी है।


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