अम्बिकापुर 07 जून 2022 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ के हरिहरपुर तथा उसके आसपास स्थित कोल माइंस की खदानें लगातार विस्तार पा रही हैं। खुदाई चल रही है और उसी के साथ साथ गांव के गांव उजड़ रहे हैं और जंगल काटे जा रहे हैं। इसके विरोध में वहां के आसपास के क्षेत्र के ग्रामीण आंदोलनरत हैं। पर्यावरण के हालत की गंभीरता और गांवों के उजडऩे की सोच से ही भविष्य की अनिष्टता से आसपास के गांवों के लोग सिहर उठे हैं। ऐसे में इप्टा अंबिकापुर के सदस्य तथा अन्य साथी हरिहरपुर ग्राम में पहुंचकर इस आंदोलन को समर्थन दिए। स.जितेंद्र सिंह सोढी ने कहा कि सरकारें चंद पूंजीपतियों के लाभ के लिए उनका साथ दे रही हैं और आंदोलनकारी सिर्फ अपनी ही लड़ाई नहीं बल्कि हम सब की भी लड़ाई लड़ रहे हैं क्योंकि इसका असर शहरों पर भी पड़ेगा। कामरेड शैलेंद्र कुमार ने ग्रामीणों को किसान आंदोलन की तरह आंदोलित होने को कहा, आदिवासियों और प्रकृति का रिश्ता बहुत पुराना है, और आदिवासी हमेशा ही जल जंगल और जमीन की लड़ाई लड़ते आए हैं। और प्रकृति के साथ मिलकर रहना चाहते हैं। उन्हें ऐसी ही लड़ाई, ऐसा ही संघर्ष करना पड़ेगा जैसा कि किसान आंदोलन में किसानो ने किया था,और विजय प्राप्त की थी।
इस मौके पर इप्टा अंबिकापुर के अंजनी पांडे एवम साथियों ने”गांव छोड़ब नाही, जंगल छोड़ब नाही” गाकर आंदोलन आंदोलनकारियों में नई ऊर्जा का संचार किया। इड़ा संस्था की आशा शर्मा ने बहनों को संघर्ष पूर्वक मुकाबला करने की सलाह दी।
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