जिला न्यायालय के फैसले को चुनौती देने पीडि़त पहुंचा उच्च न्यायालय।
पीडि़त लड़ रहा स्वाभिमान की लड़ाई, जब तक न्याय नहीं तब तक मैं लडूंगा:पीडि़त
सबूत, गवाह व मेडिकल रिपोर्ट पीडि़त के पक्ष में फिर भी जिला न्यायालय ने किया दोषमुक्त:पीड़िड़त।
पीड़ित आदिवासी वर्ग का कालरी कर्मचारी जिसके साथ पुलिस कर्मी ने की थी मारपीट।
निचली अदालत में प्रकरण में निर्णय पक्ष में नहीं आने पर पीड़ित पहुंचा उच्च न्यायालय।
लाखों के प्रलोभन ठुकरा कर पीडि़त न्याय के लिए पहुंचा उच्च न्यायालय।
जिस पुलिसकर्मी पर अपराध पंजीबद्ध होना था वह वर्तमान में उपनिरीक्षक।
मामला पुलिस थाना पटना के कटकोना कालरी का 12 वर्ष पुराना।
घटना के समय पुलिसकर्मी था प्रधान आरक्षक अब पदोन्नति के बाद उपनिरीक्षक।
दोषी पुलिसकर्मी को पदोन्नति मिलती रही जबकि आदिवासी युवक न्याय के लिए भटकता रहा।
पुलिसकर्मी ने अपने प्रमोशन के लिए कई दस्तावेजों को भी किया गायब:सूत्र
-रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर 29 मई 2022 (घटती-घटना)। कोरिया जिले के पटना थाना के अंतर्गत एक 12 साल पुराना ऐसा मामला है जिसमें पीडि़त अपने स्वाभिमान के लिए न्याय के इंतजार में न्यायालय की शरण में बैठा है, पीड़ित को न्यायालय पर भरोसा है, भरोसा भी इसलिए क्योंकि पीडि़त अपने जगह सही है जो भी इस मामले को जानता है उसे यह पता है कि पीड़ित के साथ जो हुआ था वह गलत था, खुद गलत करने वाला पुलिसकर्मी भी जानता है कि उसने पीड़ित के साथ गलत किया था, यही वजह है कि 12 साल से पीडि़त न्याय की लड़ाई लड़ रहा है और पुलिसकर्मी इस 12 साल में प्रधान आरक्षक से उप निरीक्षक तक बन गया पर पीड़ित को अभी भी न्याय का इंतजार है, न्याय के लिए पीड़ित न्यायालय की शरण में है, निचली अदालत ने आरोपी पुलिसकर्मी को दोषमुक्त कर दिया है, जिस पर पीडि़त ने उच्च न्यायालय की शरण ली है।
पीडि़त का कहना है कि निचली अदालत के द्वारा पुलिसकर्मी को दोषी ठहराया गया था और अपराध पंजीबद्ध करने का निर्णय भी दिया गया था, फिर जिला न्यायालय दोषी पुलिसकर्मी को दोषमुक्त कर दिया गया जबकि मेरे पास सारे गवाह और सबूत मौजूद हैं मुझे न्यायालय पर भरोसा है और मुझे उच्च न्यायालय से न्याय मिलेगा यह तय है यही वजह है कि उच्च न्यायालय की शरण में गया हूं वहीं पीड़ित का कहना है कि इस बार आरोपी पुलिसकर्मी पर कार्यवाही होगी यह भी तय है।
क्या है मामला
मामला 12 साल पुराना है यह मामला पटना थाना के पुलिस सहायता केंद्र के तत्कालीन प्रभारी विजय सिंह से जुड़ा हुआ है हम बात कर रहे हैं आदिवासी समुदाय के पीडि़त सुंदर सिंह पोया की जो एसईसीएल में कार्यरत हैं और 12 साल पहले उनके साथ जो घटना हुई थी वह मारपीट की थी और मारपीट भी किसी और ने नहीं वहां पर पदस्थ पुलिस सहायता केंद्र प्रभारी ने की थी और वह भी एक ट्रांसपोर्टर के गाड़ी में धक्का ना देने की वजह से सुंदर सिंह पोया के साथ मारपीट की गई थी, जानकारी के अनुसार पीड़ित का कहना था कि वह कांटा घर के पास खड़ा था और उसे एक ट्रांसपोर्टर द्वारा गाड़ी में धक्का देने को बोला गया पर उसका बोलने का तरीका अच्छा नहीं था, जिस वजह से मैं उसके पास नहीं गया और उसने मुझ्ेा से जातिगत गाली गलौज कर दी और फिर मुझे पुलिस सहायता केंद्र प्रभारी से कहवालाकर बुलाकर मुझको पिटवा था, पीड़ित का कहना है उसके शरीर मारपीट के कितने निशान थे साथ ही उसके आत्मसम्मान को भी ठेस पहुंची थी जिस पर उसने शिकायत की शिकायत पर विभागीय जांच से लेकर सब कुछ हुआ पर किसी ने कार्यवाही नहीं की तब जाकर सुंदर सिंह पोया ने न्यायालय की शरण ली और न्यायालय में परिवाद दायर किया परिवाद के शुरुआती दौर में सब कुछ अच्छा अच्छा चल रहा था निचली अदालत से पुलिसकर्मी पर मामला पंजीबद्ध करने का आदेश भी हो गया फिर ऊपर के अदालत पर पुलिसकर्मी पहुंच गए जहां से वह दोषमुक्त हो गए।
उच्च न्यायालय से मिलेगा मुझे न्याय पीड़ित
पीड़ित सुंदर सिंह पोया ने अब उच्च न्यायालय की शरण ली है और पीड़ित का कहना है कि उसको न्याय मिलेगा उसको भरोसा है। पीड़ित ने आगे कहा है कि उसके पास सबूत गवाह और उस समय का मेडिकल रिपोर्ट भी है और वह सभी दस्तावेज लेकर उच्च न्यायालय में न्याय की गुहार लगाने पहुंचा है। उच्च न्यायालय में पीड़ित की फरियाद दर्ज हो गई है ऐसा पीड़ित ने बताया है और उसका कहना है कि उसे उच्च न्यायालय से न्याय मिलेगा यह उसे पूर्ण विश्वास है।
आरक्षक से उपनिरीक्षक व थाना प्रभारी भी बने लेकिन नहीं हुआ तबादला
मामले में जिस उप निरीक्षक पर आरोप लगा है वह जिले में आरक्षक पद से लेकर उपनिरीक्षक के पद तक पदोन्नति प्राप्त करते रहे और उनका तबादला कहीं नहीं हुआ और वह लगातार जिले में ही सेवा दे रहें हैं,जबकि उपनिरीक्षक बनने पर तबादला किया जा सकता था नियमानुसार इनका लेकिन इनकी सेटिंग विभाग में ऐसी है कि इनका तबादला कभी नहीं हुआ और यह लगातार पुलिस चौकियों और थानों के भी प्रभारी बनते रहे।
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