शिक्षा विभाग की कार्यशैली व नीतियों पर उठे सवाल
-राजा मुखर्जी-
कोरबा, 16 मई 2022(घटती-घटना)। देश के सबसे पिछड़े 110 आकांक्षी जिलों में शामिल कोरबा में शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने भले सरकार द्वारा छात्रहित में कई योजना चलाई गई, पर शिक्षा विभाग की लचर व्यवस्था की वजह से कोरोनाकाल में सरकार द्वारा चलाई गई योजनाओं का लाभ कोरबा जिले के विद्यार्थियों को नहीं मिला, यही कारण है कि बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम में कोरबा जिला टॉप 10 पहली बार जगह नहीं बना पढ्ढई । गौरतलब हो कि कोरोना महामारी की वजह से सीजी बोर्ड की परीक्षाएं 2 वर्ष बाद ऑफलाइन हुई । बोर्ड ने अध्ययनरत विद्यार्थियों के स्कूल को परीक्षा केंद्र बनाया। बावजूद इसके कोरबा जिले के हायर सेकेंडरी की परीक्षा में 18.35 फीसदी और हाई स्कूल में 33.67 फीसदी विद्यार्थी फेल हो गए । परीक्षा परिणाम में संभाग स्तर पर कोरबा दूसरे स्थान और प्रदेश में 13वें स्थान पर रहा ढ्ढ जिलढ्ढ शिक्षा विभाग, सरकार के मंशा एवं आशानुरूप परिणाम देने में असफल रहा, परिणामों ने जिला शिक्षा विभाग की ऑनलाइन कक्षाओं सहित शिक्षा तुंहर द्वार कार्यक्रम की पोल खोल कर रख दी ।
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