कोरबा, 12 मई 2022 (घटती-घटना)। आपराधिक मामलों में जेल की सजा काट रहे महिलाओं के पांच बच्चे भी बंदी की जीवन व्यतीत कर रहे हैं। जिला जेल के भीतर बिखरते बचपन को संवारने के लिए जिला प्रशासन ने अनुशंसा की है। अब उन्हे खिलौने व शैक्षणिक पुस्तकें भी उपलब्ध कराई जाएगी। महिला बंदियों के साथ बिना गलती किए जेल की सजा भुगत रहे बच्चों के लिए जिला प्रशासन ने चिंता जताई है। जिला कलेक्टर रानू साहू ने दो माह पहले जिला जेल का औचक निरीक्षण किया था। इस दौरान उन्होने महिला बंदी और उनके बच्चों से भी मुलाकात की। बताना होगा कि बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा में लाने के लिए प्रशासन की ओर से कार्ययोजना तैयार की गई थी,जिसके तहत बंदी महिला के बच्चों को चाइल्डलाइन अथवा बाल संरक्षण गृह के माध्यम से बेहतर शिक्षा के लिए संरक्षण देना था। इस दिशा में बच्चों की माताओं से चर्चा भी की गई लेकिन उन्होंने बच्चों को अपने साथ रखने का निर्णय लेते हुए बाल संरक्षण गृह भेजने से इनकार कर दिया। जिला प्रशासन से जारी गाइडलाइन के अनुसार अब जेल प्रबंधन ने बच्चों के बचपन को सहेजने का बीड़ा उठाया है। बच्चों के लिए न केवल खिलौनों की खरीदी की जाएगी बल्कि उन्हें उम्र के अनुसार पुस्तकें प्रदान कर पढ़ाई कराई जाएगी। बहरहाल देर से सही पर अब शिक्षा और बच्चों की बेहतरी की दिशा में काम होगा, इसकी आस जगी है। विजयानंद सिंह (जेलर जिला जेल) ने .कहढ्ढ के, जिला प्रशासन की ओर से जेल में बंद बच्चों की शिक्षा व उनके बचपन संवारने की दिशा में पहल की गई है। बच्चों को खिलौने व पुस्तकें प्रदान की जाएगी। खेल-खेल में पढ़ाई के लिए उनकी माताओं के माध्यम से बच्चों को प्रेरित किया जाएगा।
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