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कोरबा@तालाब को पाटने /पटवाने के मामले में जांच पर कार्यवाही लंबित

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-राजा मुखर्जी-
कोरबा ,04 मई 2022 (घटती घटना )। अनुविभाग के अंतर्गत ग्राम बरीडीह के धनवार पारा स्थित मनरेगा के तालाब को पाटने / पटवाने के मामले में जांच पर कार्यवाही लंबित है। मामला कोरबा जनपद एवं विकासखंड के अंतर्गत ग्राम बरीडीह के धनवार पारा में मनरेगा से निर्मित लगभग पौने 13 लाख रुपए के तालाब को राख से पटवा देने का हैढ्ढ मौके पर निरीक्षण के लिए संयुक्त टीम भेजी गई। परियोजना अधिकारी बीपी भारद्वाज के साथ ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग(आरईएस) कोरबा के एसडीओ श्री साहू व अन्य ने मौका मुआयना किया तो यहां तालाब की शिला पट्टिका जरूर मिली लेकिन तालाब का नामोनिशान मिट चुका था। तालाब को ग्राम पंचायत ने राख से पटवा डाला। कोरबा जनपद के सीईओ जीके मिश्रा के निर्देश पर जांच उपरांत अपनी रिपोर्ट कार्यवाही की अनुशंसा के साथ प्रतिवेदन जिला सीईओ को सौंप दिया है। जिला सीईओ नूतन कंवर द्वारा संबंधितों को नोटिस जारी किया गया , लेकिन जवाब अप्राप्त है। मामले के प्रतिवेदन में ग्राम सरपंच और रोजगार सहायक को बर्खास्त करने एवं पंचायत सचिव पर निलंबन की कार्यवाही के अनुशंसा की गई है। जांच रिपोर्ट में सारा कुछ स्पष्ट होने के बाद भी कारण बताओ नोटिस के जवाब का इंतजार किया जा रहा है। दूसरी ओर इस मामले को मामूली कार्रवाई कर रफा-दफा करने / कराने की फिराक में कुछ नेता नुमा दलाल जोर-शोर से जुटे हुए हैं। इनके द्वारा संबंधित ठेकेदार जिसने राख फिंकवाया है, उसे बचाने की पुरजोर कवायद की जा रही है। हालांकि इस मामले में ग्रामवासियों का कहना है कि ,एफआईआर भी दर्ज होनी चाहिए। सरकारी मनरेगा निर्मित तालाब को पाटना कोई छोटी-मोटी घटना नहीं है बल्कि इसे गंभीरता से लेकर यदि कार्यवाही सरपंच,सचिव, रोजगार सहायक पर कठोरता से की जाए तो ठेकेदार भी मामले में उतना ही बराबर का दोषी बनता है। लैंको संयंत्र से निकलने वाली राख के निस्तारण का ठेका लेने वाले ठेकेदार के द्वारा एवं उसके कर्मचारियों की मदद से राखड़ को जहां-तहां अब भी डलवाया जा रहा है जो कि गंभीर मामला है। हालांकि प्रकरण को जिस गंभीरता से प्रशासन को लेना चाहिए,उतनी गंभीरता नहीं दिखाई जा रही वरना लगभग एक महीना होने को है ,किंतु अब तक नोटिस और जवाब पर ही बात अटकी हुई है। इस तरह की सुस्त चाल नि:संदेह नियमों का उल्लंघन करने वालों का मनोबल बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त करने वाला ही है। संबंधित ठेकेदार अपने आप को बचाने के लिए नेता नुमा दलालों का सहारा ले रहा है ताकि मामला अधिकारियों से मिल कर सेट हो जाए ढ्ढ देखना है कि मनरेगा का तालाब पाटने के इस मामले में प्रशासन की गाज किस-किस पर और किस हद तक गुजरती है ?


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