नियम से ओएसटी सेंटर पटना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में खुलेगा पर कब ?
जब ओएसटी सेंटर में ना मरीजों को पंजीयन होगा और ना ही दवाई मिलेगी तो फिर पैसे खर्च कर क्यों बनाया गया?
क्या ओएसटी सेंटर बैकुंठपुर में खोल कर पैसे कमाना था।
छत्तीसगढ़ का सातवां ओएसटी सेंटर खोलने का मामला।
नाको से बिना एप्रुअल ओएसटी सेंटर खुला, ड्रग्स की तल वाले मरीजों का पंजीयन नहीं होगा और दवाइयां भी नहीं मिलेगी?
नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (नाको) टीम के सर्वे के बाद सेंटर खोलने अनुमति मिलती है।

-रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर 03 मई 2022 (घटती-घटना)। ओएसटी सेंटर खोलने के लिए पहले अनुमति ली जाती है पहले से ही कोरिया जिले में ओएसटी सेंटर मौजूद था फिर भी स्वास्थ विभाग ने बिना अनुमति खोल लिया और अब वहां दवाइयां तक उपलब्ध नहीं हो रही। जबकि नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (नाको) से बिना अनुमति कोरिया में छत्तीसगढ़ का सातवां ओएसटी ((ओपिऑयड सब्स्टीट्यूशन थैरेपी)) सेंटर खोलने के बाद ताला जडऩे की स्थिति निर्मित होने लगी है। क्योंकि नाको से अनुमति मिलने, सेटअप स्वीकृति के बाद ओएसटी सेंटर खोलने का प्रावधान है। इसलिए छह महीने में ओएसटी सेंटर में एक मरीज का पंजीयन नहीं है और दवाई के नाम पर न ही एक टैबलेट तक उपलब्ध हुआ है।
जानकारी के अनुसार जिला प्रशासन, स्वास्थ्य व पुलिस विभाग के संयुक्त तत्वावधान में 26 अक्टूबर 2021 को जिला अस्पताल बैकुंठपुर के ट्रांजिट हॉस्टल में ओएसटी सेंटर का उद्घाटन किया गया है। मुख्यअतिथि के रूप में सरगुजा आईजी अजय यादव मौजूद थे। वहीं तत्कालीन एसपी सहित जिला पंचायत सीइओ, सीएमएचओ ने नशे के गिरफ्त में फंसे लोगों की काउंसलिंग और नशे से छुटकारा दिलाने दवाइयां उपलब्ध कराने और मुख्यधारा में लाने का पूरा प्रयास करने बात कही थी। फिलहाल ओएसटी बैकुंठपुर को खुले छह महीने हो गए हैं, लेकिन एक मरीज का पंजीयन नहीं और दवाइयां तक नहीं है। क्योंकि रायपुर से ओएसटी सेंटर में डायरेक्ट दवाइयां भेजी जाती है। ओएसटी सेंटर खोलने से पहले नाको की टीम ड्रग्स प्रभावित एरिया का सर्वे करती है और एप्रुअल के बाद सेंटर खोलने का नियम है। साथ ही नाको से ओएसटी सेंटर खोलने सेटअप की मंजूरी मिलती है।

कोरिया के स्वास्थ्य अधिकारी नियम विरुद्ध काम करने में क्यों माहिर?
तत्कालीन पुलिस अधीक्षक संतोष सिंह के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग में जिला मुख्यालय के परिसर में ओएसटी सेंटर लाखों रुपए खर्च कर खोल दिया था, जबकि ओएसटी सेंटर खोलने के लिए अनुमति की जरूरत पड़ती है और यह अनुमति ऐसे ही नहीं मिलती, यदि नियम से माना जाए तो यह ओएसटी सेंटर अवैध खुला हुआ है यही वजह है कि यहां पर ना मरीजों का पंजीयन होता है और ना ही यहां से दवाई आते हैं पर सवाल यही है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी क्या नियम विरुद्ध पैसे खर्च करने व काम करने के लिए यहां पर बैठे हुए हैं?
ये हैं नाको से एप्रुव्ड ओएसटी सेंटर
सिम्स व जिला अस्पताल बिलासपुर, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सुपेला भिलाई, जिला अस्पताल कोरबा, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मनेंद्रगढ़ कोरिया, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिश्रामपुर सूरजपुर।
ओएसटी मनेंद्रगढ़ से 18 युवक नशा छोड़े,12 छोडऩे के कगार में
ओएसटी मनेंद्रगढ़ से 18 युवक नशा छोड़े, 12 छोडऩे के कगार में पहुंचे, जानकारी के अनुसार नाको एप्रुव्ड मनेंद्रगढ़ ओएसटी सेंटर वर्ष 2016 में खोला गया है। जिसमें करीब 300 मरीज पंजीकृत हो चुके हैं। हालाकि नियमित रूप से दवाइयां लेने वाले 178 मरीजों की काउंसलिंग व इलाज चल रहा है। ओएसटी सेंटर की दवाई से नशे में डूब चुके 18 युवक बिल्कुल ठीक हो चुके हैं और समाज में मुख्यधारा से जुडक़र खुशहाल जीवन व्यतीत कर रहे हैं। वहीं करीब 12 युवक नशे छोडऩे के अंतिम स्टेज में पहुंचे चुके हैं, जो बहुत जल्द ठीक हो जाएंगे। ओएसटी सेंटर को रायपुर हेडक्वार्टर से डायरेक्ट दवाइयां भेजी जाती है।
ओएसटी सेंटर को पटना सीएचसी में खोलने नाको टीम ने किया था चिह्नित
जानकारी के अनुसार नाको टीम छत्तीसगढ़ का सातवां ओएसटी सेंटर खोलने कुछ साल पहले कोरिया पहुंची थी। इस दौरान पटना सहित 84 गांव का सर्वे कर रिपोर्ट बनाई थी। मामले में स्वास्थ्य विभाग ने ओएसटी सेंटर खोलने सारी प्रक्रियाएं पूरी कर चुका है। ओएसटी सेंटर से खासकर एचआईवी संक्रमण रोकने बेहतर काम होता है। इंजेक्शन से नशे करने वाले युवा वर्ग एक सिरिंज को आपस में दोस्तों के साथ शेयर करते हैं। जिससे एचआईवी संक्रमण होने की संभावना बढ़ जाती है।
ये सेटअप जरूरी है
ओएसटी सेंटर के लिए नाको से एप्रुअल लेना पड़ता है। वहीं नाको से स्वीकृत सेटअप में डॉक्टर व प्रभारी, काउंसलर, डेटा मैनेजर, स्टाफ नर्स आदि की जरूरत पड़ती है। ओएसटी सेंटर में मरीज पहुंचने के बाद डॉक्टर व काउंसलर हर पहलू पर परीक्षण करते हैं। फिर पंजीयन के बाद दवाई खिलाना स्टार्ट करते हैं। परिजन की मौजूदगी में मेडिकल स्टाफ मरीज को दवाई खिलाते हैं। वहीं दूर दराज वाले मरीज को परिवार को जिम्मेदारी के साथ दवाइयां देते हैं।
प्यारेलाल काउंसलर ओएसटी सेंटर मनेंद्रगढ़
ओएसटी सेंटर में करीब 300 मरीज पंजीकृत हो चुके हैं। वर्तमान में 178 नियमित दवाई लेने वाले हैं। वहीं 18 मरीज ठीक हो चुके हैं और 12 मरीज नशा छोडऩे के अंतिम स्टेज पर पहुंचे गए हैं। जो बहुत जल्द ठीक हो जाएंगे। ओएसटी सेंटर के लिए रायपुर हेडक्वार्टर से दवाइयां भेजी जाती है।
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