अम्बिकापुर, 04 अप्रैल 2022(घटती-घटना)। नहाय-खाय के साथ आस्था का महापर्व चैती छठ मंगलवार से प्रारंभ हो गया है। चैती छठ में सूर्य देव की उपासना की जाती है। छठ पर्व साल भर में 2 बार मनाया जाता है। चैत्र माह में छठ को चैती छठ कहते हैं और एक छठ कार्तिक माह में भी पड़ता है जिसकी मान्यता अधिक है। मंगलवार को छठ व्रतियों द्वारा पूरे शुद्धता के साथ नहान-खाय का रस्म आदा करेंगे। इस दिन व्रति नदी, तालाबों में स्नान कर अरवा चावल, चना दाल व लौकी की सब्जी भोजन के रूप में ग्रहण करेंगी। वहीं बुधवार को खरना का रस्म पूरी की जाएगी। इस दिन व्रतियों को 36 घंटे कठिन उपवास शुरू हो जाता है। इस दिन पूरे दिन उपवास के बाद और शाम को घाट बंधान कर खरना तैयार करेंगी। इसके बाद प्रसाद के रूप में खीर, पुड़ी ग्रहण करेंगे। गुरूवार को उगते सूर्य को अघ्र्य दिया जाएगा। जबकि शुक्रवार की सुबह उगते सूर्य को अघ्र्य के साथ 36 घंटे का कठिन छठ व्रत संपन्न हो जाएगा।
36 घंटे का रहता है व्रत
शहर के शंकर घाट छठ के लिए प्रमुख घाट मना गया है। यहां काफी संख्या में छठ व्रति व्रत करते हैं। हालांकि चैती छठ को कुछ कम लोग करते हैं। जबकि कार्तिक मास का छठ काफी संख्या में लोग करते हैं। चैत में कड़ी धूम व गर्मी के लिए 36 घंटे का कठिन व्रत काफी महत्व रखता है। छठ व्रत को लेकर शहर के शंकरघाट सहित अन्य छठ घाटों की साफ-सफाई की गई।
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