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बैकुण्ठपुर@छत्तीसगढ़ में बिक रही ऐसी शराब जिसका चढ़ता नही

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छत्तीसगढ़ में शराब प्लेसमेंट कर्मचारियों के भरोसे खुद बेचती है सरकार

-रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर 31 मार्च 2022 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ में जहां शराबबंदी को लेकर विपक्ष समय-समय पर मुद्दा उठाते रहता है उसी बीच शराब प्रेमियों की भी एक समस्या सामने आ रही है शराब प्रेमियों का कहना है कि सरकारी शराब दुकानों में शराब में मिलावट हो रही है जिस वजह से शराब का नशा उन्हें नहीं चढ़ रहा है, चाहे कितना भी महंगा शराब ले ले पर ना जाने क्यों उसका नशा नहीं चढ़ता? यह हम नहीं यह शराब के सोखीनियों व शराबप्रेमी का कहना है पर सवाल यह उठता है कि जहां सरकार को इस शराब से सबसे ज्यादा कमाई हो रही वही शराब प्रेमियों को नुकसान हो रहा, जबकि शराब के प्रेमियों के पैसे से ही सरकार को सबसे ज्यादा टैक्स मिल रहा है इसके बावजूद सरकारी शराब दुकानों में मिलावटी शराब को लेकर बात आ रही है सामने।
ज्ञात होकी छत्तीसगढ़ में बिक रही शराब में नशा नहीं होता यह आये दिन शराब दुकान के प्लेसमेन्ट कर्मचारियों व शराब के शौकीन लोगों के बीच हो रहे वाद विवाद से पता चल रहा है। बताया जा रहा है कि शराब तो शराब दुकानों में सभी ब्रांडों की मिल रही है और शराब जो बनकर आती है वह भी ठीक और उसके दुकान तक पहुंचने तक उसमें कोई मिलावट नहीं रहती लेकिन जैसे ही शराब सरकारी शराब दुकानों में आती है मिलावट का खेल जारी हो जाता है और पानी मिलाकर शराब बेची जाती है। शराब में पानी मिलाकर बेचने के पीछे की वजह ज्यादा पैसा कमाना एक है जो प्लेसमेंट कर्मचारियों द्वारा किया जाता है दूसरा यह भी बताया जा रहा है कि शराब में पानी मिलाने के लिए आबकारी विभाग का भी निर्देश है जिससे उन्हें भी महीने का चढ़ावा मिल सके। एक बोतल शराब चाहे कितनी भी महंगी कोई क्यों न खरीदे उसमें या तो उसे पानी मिलेगा आधा या फिर महंगी शराब की बोतल में सस्ती शराब मिलेगी खरीदने पर। पूरा खेल आपसी मिलीभगत जिसमें आबकारी विभाग और प्लेसमेंट कंपनी के कर्मचारी दोनों शामिल हैं दोनों की ही तरफ से खेला जा रहा है और यह भी बताया जा रहा है कि प्लेसमेंट कंपनी के कमर्चारियों को इसके लिए आबकारी विभाग से दबाव भी है क्योंकि आबकारी विभाग के कुछ कर्मचारियों को मासिक रूप से कुछ वसूली मिल जाती है जिससे उनका वेतन के अलावा आय हो जाता है।
शराब से सरकार को
हो रही ज्यादा आय

देखा जाए तो सरकार को शराब बिक्री से बड़े स्तर पर राजस्व की प्राप्ति हो रही है लेकिन फिर भी सरकार यह मदिरा प्रेमियों को लेकर गंभीर नहीं है क्योंकि उन्हें पैसा खर्च करके भी या तो पानी पीना पड़ रहा है या फिर उन्हें महंगी बोतलों में सस्ती शराब मिल रही है।
कभी खड़ी हो सकती
है गंभीर स्थिति

शराब में पानी मिलाया जा रहा है या कुछ और यह स्प्ष्ट तो नहीं लेकिन हुज्जत रोज सरकारी शराब दुकानों में हो रही है जिससे लगता है कि शराब में कुछ तो गड़बड़ी जरूर की जा रही है,वैसे मिलावटी शराब की वजह से किसी दिन कोई गंभीर स्थिति मदिरा प्रेमियों के स्वास्थ्य को लेकर उतपन्न न हो जाये यह भी सोचने वाली बात है।
मिलावट करते कई
बार पकड़े जा चुके हैं प्लेसमेंट कर्मचारी

सरकारी शराब दुकानों में शराब में मिलावट करते कई बार कई कर्मचारी पकड़े भी जा चुके हैं लेकिन जो पकड़े जाते हैं उनपर कार्यवाही करके उन्हें काम से बाहर भी कर दिया गया है लेकिन मिलावट का कारोबार आज भी जारी है जो कैसे बंद होगा यह अब सरकार को ही तय करना होगा।


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