
- बिना ब्लर की चैट वायरल करने वालों पर क्यों नहीं हुआ मामला पंजीबद्ध ?,क्यों चैट जांच मामले में पुलिस के उच्च अधिकारी घबरा रहे हैं?
- कमियों व अच्छाइयों को सबके सामने रखने वाले चौथे स्तंभ की सुरक्षा की जिम्मेदारी किस की ?,खबर प्रकाशन को लेकर ब्लर का मुद्दा,सोशल मीडिया में बिना ब्लर के कैसे वायरल हुआ चैट?
- पुलिस विभाग के कर्मचारी ही बता रहे ग्रुप में वायरल हुआ था चैट फिर पत्रकार पर मामला पंजीबद्ध क्यों ?,कर्मचारी ही बता रहे कहां से मिला चैट पर अधिकारी को क्यों जानना है पत्रकार को कहां से मिला चैट?
-रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर 21 मार्च 2022 (घटती-घटना)। मामला कोरिया जिले के पुलिस विभाग के उस कार्यवाही से जुड़ा हुआ है जिसमें पुलिस ने पत्रकार पर केवल गंभीर धाराओं के तहत एफआईआर केवल इसलिए दर्ज कर ली क्योंकि पत्रकार ने एक समुदाय विशेष पर की गई टिप्पणी पर खबर बनाई और वह भी पत्रकार ने समुदाय विशेष को जागरूक करने साथ ही जिसने समुदाय विशेष पर टिप्पणी की उस पर कार्यवाही की मांग को लेकर खबर बनाई लेकिन पुलिस ने खुन्नस निकालने पत्रकार पर ही एफआईआर दर्ज कर दी और वह भी इसलिए मात्र क्योंकि पत्रकार ने वाट्सएप चैट को ब्लर किये बिना खबर चला दिया। वैसे जिस वाट्सएप चैट को लेकर पत्रकार पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है उसी चैट को सोशल मीडिया पर कईयों ने साझा किया,यहां तक की पुलिस विभाग के कर्मचारी ने लगातार साझा कर जांच की मांग कर रहा है,लेकिन पुलिस ने उस पर कोई कार्यवाही नहीं कि और पत्रकार को केवल खबर के लिए दोषी ठहरा दिया,पुलिस की यही कार्यवाही उसके गले की फांस भी बन चुकी है क्योंकि पुलिस भी जान चुकी है कि पत्रकार पर जो एफआईआर की गई है वह गलत है और यदि पत्रकार पर एफआईआर सही है तो समुदाय ने अन्य जिसने भी चैट को सार्वजनिक किया उस पर भी समाज ने कार्यवाही की मांग की है उन पर पुलिस ने कार्यवाही उन्ही धाराओं के तहत क्यों नहीं किया?
चौथा स्तंभ क्यों है असुरक्षित?
पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा आधार स्तंभ माना गया पर इस लोकतंत्र की परेशानी भी सबसे अधिक है क्योंकि इसे अंतिम स्तंभ के तौर पर भी देखा जाता है जबकि सही मायने में पत्रकारिता ही एक ऐसा स्तंभ है जो पहले, दूसरे, तीसरे सभी पर नजर रखता है और उनकी कमियों व अच्छाइयों को सबके सामने रखता है ताकि चारों स्तंभ के नीचे रह रही जनता सभी गतिविधियों से अवगत हो सके माना जाए तो चौथा स्तंभ आईने की तरह कम करता है, पर चौथा स्तंभ तब सुरक्षित रहता है जब वह कमियों व समाज को आईना नहीं दिखाता है तब तक सब ठीक है जैसे ही कमियों व आईना को दिखाना शुरू करता है तो उसकी सुरक्षा पर सेंध लग जाता है जो एक बड़ा सवाल? पत्रकारिता करते समय यदि पुलिस विभाग की कमियों को दिखाएं तो पुलिस पत्रकार को परेशान करेगी, प्रशासन की कमियों को दिखाएं तो प्रशासन परेशान करेगी, शासन के कमियों को दिखाएं तो शासन परेशान करेंगे, यदि सत्ता की कमियों को दिखाए तो सत्ता परेशान करेगी पर कोई अपनी कमियों को दूर नहीं करेगा पत्रकार को ही दुशमन समझेगा, अब ऐसे में सवाल यह है की पत्रकार क्या कमियों को दिखाना छोड़ दे? सिर्फ लोगों को अच्छाई की दिखाएं और अच्छाई न हो तो भी अच्छाई के तौर पर झुठ छूट लोगो के सामने परोसा जाए? क्या तभी पत्रकार सुरक्षित होगा? अब तो लगता है कमियों को दिखाना है गुनाह!
क्या छत्तीसगढ़ में पत्रकारों पर दर्ज होते रहेंगे झूठे मामले
छत्तीसगढ़ में पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर विपक्ष में रही कांग्रेस सरकार ने खूब हो-हल्ला किया था और अपनी सरकार में पत्रकारों को सुरक्षा देने की बात कही थी पर तीन साल बीतने के बाद भी क्या पत्रकार सुरक्षित हैं यह सवाल उठना लाजमी है क्योंकि पिछले कुछ महीनों में एक नहीं छत्तीसगढ़ के कई पत्रकारों पर फर्जी एफआईआर दर्ज हुए हैं जो प्रदेश के मुखिया को भी पता है पर क्या इस वह संज्ञान लेंगे या फिर पत्रकारों की लेखनी से क्षुब्ध होकर झूठे एफआईआर दर्ज होते रहेंगे? जिसे लेकर अब आंदोलन भी होने शुरू हो गए हैं और सरकार की आलोचनाएं भी होने लगी पर क्या सरकार आलोचनाओं से सीखेगी या फिर पत्रकारों को अपने जीत का कांटा बनाएगी। सारे एफआईआर क्या समाचारों सिर्फ क्षुब्ध होकर ही राजनीतिक दबाव में किए जा रहे हैं यह एक बहुत बड़ा प्रश्न है क्या पत्रकारों की स्वतंत्रता को रोक कर अपनी कमियों को बाहर लाने से बचना चाहती है सरकार? वायरल वाट्सएप मामले में पत्रकार को द्वेशवश फंसाया गया जो पुरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया जिस वाट्सएप चैट मामले में पत्रकार पर गंभीर धाराओं के तहत मामला पंजीबद्ध किया गया वह मामला पंजीबद्ध करना ही साबित करता है कि पुलिस ने पत्रकार से द्वेष के कारण ऐसा किया और अपनी कार्यप्रणाली जो कि जिले में कानून व्यवस्था सहित गलत कार्यों को लेकर थीं और जिसपर पत्रकार लगातार खबर प्रकाशित कर रहा था कि वजह से पत्रकार के विरुद्ध समाचार को लेकर एफआईआर दर्ज कर लिया गया जबकि पुलिस को एफआईआर उसके विरुद्ध दर्ज करना था जो वाट्सएप समूह का एडमिन था या जिसने वह चैट वायरल की थी, लेकिन पुलिस ने अपनी खीज पत्रकार से निकालने के लिए न्याय का भी रास्ता छोड़ दिया और अन्याय के रास्ते पर चलकर पत्रकार को फंसाने कूटरचना करते हुए प्राथमिकी दर्ज कर दी।
किस पत्रकार से पुलिस
ने लिया था सलाह?
सूत्रों की माने तो जिला मुख्यालय के एक बहुत ही अनुभवी पत्रकार के सलाह पर पुलिस चलकर अपराध पंजीबद्ध की थी, वह पत्रकार कितने अनुभवी हैं पूरा जिला जानता है पर उन्ही की सलाह पर पुलिस चलकर पुलिस ने अपनी फजीहत बटोर ली है। शायद अनुभवी पत्रकार पुलिस को यह बताना भूल गए कि कभी-कभी पत्रकार दस्तावेज के तौर पर भी किसी चीज को प्रकाशित कर सकते हैं। इस फोटो को ब्लर करना है यह जानकारी लगभग सभी को है किसका नाम नहीं छापना है यह भी जानकारी पत्रकारों रहती है। शायद यह भूल गए कि फोटो का प्रकाशन दस्तावेज के तौर पर प्रकाशन करने का अधिकार है। इससे पत्रकार जगत के आदर्श संहिता का उल्लंघन नहीं होता।
एडीटर्स गिल्ड आफ इंडिया ने एक पत्रकार व्यवहार संहिता जारी की गई थी
कुछ साल पहले पुर्व राष्ट्रपति एपीजे अव्दुल कलाम के हस्ताक्षर से एडीटर्स गिल्ड आफ इंडिया ने एक पत्रकार व्यवहार संहिता जारी की गई थी। इसमें भी काफी मनन के बाद कई बिंदुओं को शामिल किया गया था। जिसमे पर्याप्त समय सीमा के तहत पीड़ित पक्ष को अपना जवाब देने या खंडन करने का मौका दें। निजी दुख वाले दृश्यों से संबंधित खबरों को मानवीय हित के नाम पर आंख मूंद कर न परोसा जाये। मानवाधिकार और निजी भावनाओं की गोपनीयता का भी उतना ही महत्व है। धार्मिक विवादों पर लिखते समय सभी संप्रदायों और समुदायों को समान आदर दिया जाना चाहिए। अपराध मामलो में विशेषकर सेक्स और बच्चों से संबंधित मामले में यह देखना जरूरी है कि कहीं रिपोर्ट ही अपने आप में सजा न बन जाये और किसी जीवन को अनावश्यक बर्बाद न कर दे। चोरी छिपे सुनकर (और फोटो लेकर) किसी यंत्र का सहारा लेकर, किसी के निजी टेलीफोन पर बातचीत को पकड़ कर, अपनी पहचान छिपा कर या चालबाजी से सूचनाएं प्राप्त नहीं की जायें। सिर्फ जनहित के मामले में ही जब ऐसा करना उचित है और सूचना प्राप्त करने का कोई और विकल्प न बचा हो तो ऐसा किया जाये।
पत्रकार को काम करते वक्त हमेशा दो-चार होना पड़ता है
कुछ ऐसी बातें हैं जिससे पत्रकार को फिल्ड में या डेस्क पर काम करते वक्त हमेशा दो-चार होना पड़ता है, इसलिए एक पत्रकार को कुछ विशेष बातों का ध्यान रहता है जैसे की खबर, विजुअल या ग्राफिक्स में रेप पीड़िता का नाम, फोटो या किसी तरह का कोई पहचान ना हो। अगर कोई नाबालिग अपराध करता है तो उस आरोपी का विजुअल ब्लर करके ही चलाना चाहिए। फोटो को ब्लर करवाकर इस्तेमाल किया जा सकता है। न्यायालय को इस देश में सर्वश्रेष्ठ माना गया है इसलिए न्यायालय की अवहेलना नहीं होनी चाहिए। देश हित एक पत्रकार की प्राथमिकता होती है पत्रकार को देश के रक्षा और विदेश नीति के मामले में कवरेज करते वक्त देश की मर्यादा का हमेशा ध्यान रखना चाहिए। न्यायालय जब तक किसी का अपराध ना सिद्ध कर दे उसे अपराधी नहीं कहना चाहिए इसलिए खबर में उसके लिए आरोपी शब्द का इस्तेमाल किया जाता है।
हमेशा ही न्यायपालिका की सक्रिय भूमिका रहती है न्यायपालिका को अपनी पर्यवेक्षी शक्तियों का उपयोग मजिस्ट्रेट और पुलिस को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करने वाले संवैधानिक प्रावधानों के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए करना चाहिए ना की अपने स्वार्थ सिद्धि। पुलिस स्वार्थ में हमेशा भुल जाती है अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करना। जबकि उनका यह मुख्य काम है हर कोई को पुलिस से उमीद रहती है पर पुलिस न्याय की उमीदो पर पानी फेर देती है कुछ पुलिस वालो के वजह से पूरा पुलिस प्रशासन बदनाम होता है साथ ही मौजूदा सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सावला उठता है।
अनिल जयसवाल
जिला उपाध्यक्ष किसान मोर्चा भाजपा
मिडिया की जिम्मेदारी के संबंध में यह महत्वपूर्ण है कि मिडिया सच्चाई और सटीकता, पारदर्शिता, स्वतंत्रता, निष्पक्षता के जिम्मेदारी और निष्पक्षता जैसे मूल सिद्धांतों पर टिके रहे। मिडिया जो कुछ दिखाती है उससे सीख लेनी चाहिए बहुत कुछ मिडिया से भी सीख मिलता है सीख लेने की बजाय मीडिया की स्वतंत्रता को रोकना लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को क्षति पहुंचाने जैसा है। कोरिया जिले का यह मामला भी मिडिया के लिए द्वेष पूर्ण देखा जा रहा है।
भईया लाल राजवाड़े
पूर्व कैबिनेट मंत्री भाजपा
व्यक्तिगत अधिकारों की स्वतंत्र अभिव्यक्ति और समाज और राज्य की सामूहिक सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता है, यह जिम्मेदारी अकेले सरकार को नहीं, बल्कि उन सभी को लेनी चाहिए जो इन अधिकारों का आनंद लेते हैं। स्वतंत्रता के अधिकार के अंतर्गत प्रत्येक व्यक्ति का यह कर्तव्य बनता है कि वह अपने दिए गए अधिकारों का गलत इस्तेमाल न करते हुए राष्ट्र की स्वाधीनता को बनाए रखने मे सहायता प्रदान करें एवं एक बेहतर राष्ट्र के निर्माण में संविधान के नियमों का पालन करते हुए नव भारत का निर्माण करें।
वेदांती तिवारी
उपाध्यक्ष जिला पंचायत कोरिया
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