अम्बिकापुर, 14 फरवरी 2022 (घटती-घटना)। नगर के 32 वर्षीय एक व्यक्ति के निधन पर परिजन पर जहां दूखों का पहाड़ टूट पड़े वहीं सदमे के बीच मृतक का नेत्र दान का निर्णय लेकर मिसाल करते हुए किसी और की जिंदगी में उजियारा लाने का काम किया है। मेडिकल कॉलेज अस्पताल के नेत्र चिकित्सकों ने उनके निवास पर पहुंचकर दोनों आंखों का कार्निया निकाल सिम्स मेडिकल कॉलेज बिलासपुर भेज दिया।
32 वर्षीय कुशल केडिय़ा पिता स्व. मुरलीधर केडिय़ा झासुगुड़ा के निवासी थे। वह कुछ दिनों से अपने चचेरे भाई कमल अग्रवाल के साथ अंबिकापुर मिशन चौक के पास रहते थे। इनकी तबियत पिछले 10-12 वर्ष से खराब चल रही थी। सोमवार की सुबह इनकी निधन हो गई। कमल अग्रवाल ने निधन की जानकारी कुशल के दीदी किरन शर्मा जीजा शिव शर्मा को दी। भाई की मौत की खबर सूनते ही बहन सदमे में आ गई। फिर भी इस दुख की घड़ी में दीदी व जीजी ने अपने मृत भाई का नेत्र दान करने का निणर्य लिया। परिजन की सहमती से मेडिकल कॉलेज अस्पताल के नेत्र विभाग के नोडल अधिकारी डॉ. रजत टोप्पो व नेत्र सहायक अधिकारी रमेश धृतकर ने उनके निवास पर जाकर कुशल केडिय़ा के पार्थिव शरीर से पूर्ण सम्मान के साथ दोनों आंखों का कॉर्निया निकाल कर सिम्स मेडिकल कॉलेज बिलासपुर भेजा। डॉ. रजत टोप्पो ने बताया कि मृतक के परिजन की सहमति से नेत्रदान किया जा सकता है। यह बेहतर कार्य है। सगुजा में अब तक चार लोगों का नेत्र दान किया जा चुका है। आइ कंटेनर के माध्यम से कार्निया को बिलासपुर सिम्स के लिए भेज दिया गया है। वहां आइ बैंक में रिसीव भी कर लिया गया है। 72 घंटे के अंदर किसी जरूरतमंद को लगाया जाएगा और वह पूरी दुनिया देख सकेगा।
मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आई बैंक की सुविधा नहीं है। आई बैंक खोलने की तैयारी की जा रही है। अगर जिले में किसी का नेत्रदान किया जाता है तो उसे आई कंटेनर के माध्यम से सिम्स आई बैंक के लिए भेज दिया जाता है। किसी भी व्यक्ति की मौत के छह घंटे बाद परिजन की सहमति से नेत्रदान किया जा सकता है और उसे 72 घंटे तक आई बैंक में रखकर किसी जरूरतमंद को लगाया जा सकता है।
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