राजा मुखर्जी-
कोरबा 23 जनवरी 2022 (घटती-घटना)। प्रशासनिक हिदायतों के बाद भी धान खरीदी केंद्र पठियापाली में धान बेचने के लिए टोकन काटने के एवज में ऑपरेटर द्वारा रुपए की मांग की गई । धान बेचने के बाद रसीद भी नहीं दी गई, और किसान के खाते में पैसा भी नहीं पहुंचा । यह भर्राशाही आदिवासी सेवा सहकारी समिति बरपाली उपार्जन केंद्र पठियापाली में सामने आई है। यहां धान बिक्री के लिए कम्प्यूटर ऑपरेटर द्वारा रसीद बनाने के नाम पर किसानों से अवैध वसूली की जा रही है। किसान मधुसूदन कंवर ने बताया कि, पहले तो टोकन के नाम पर कई दिनों तक घुमाया गया और पैसे देने वाले लोगों का पहले काटा गया टोकन । धान बिक्री के बाद रसीद जारी करने के लिए कम्प्यूटर ऑपरेटर किसानों से पैसे की मांग करता है। किसान मधुसूदन ने बताया कि 7 जनवरी को उन्होंने 28.80 मि्ंटल धान विक्रय किया था जिसका 15 दिनों तक रसीद नहीं दिया गया और न ही किसान के खाते में अब तक राशि आई। मधुसूदन ने बताया कि रसीद देने के नाम से ऑपरेटर ने 500 रुपये मांगे जिसे नहीं देने पर ऑपरेटर ने रसीद प्रदान नहीं की। 07 जनवरी के बाद बेचे गए कई किसानों की राशि खाते में डाल दी गई है, जबकि मधुसूदन कंवर की राशि अब तक खाते में नहीं पहुंच पाई। अन्य किसान ने बताया बिक्री हुए धान का कम्प्यूटर रसीद निकालने ऑपरेटर उनसे पैसे की मांग करते हैं और न देने पर केंद्र के चक्कर लगवाते है , जिससे किसान परेशान हैं। ग्राम दमखांचा निवासी मोहित राम ने बताया कि, ऑपरेटर द्वारा प्रत्येक किसानों से खर्चा-पानी के नाम पर 100 रुपये से लेकर 500 रुपये तक की मांग की जा रही है। राशि नहीं देने के कारण किसानों को रसीद देने के लिए चक्कर लगवाया जा रहा है । कम्प्यूटर रसीद नहीं कटने से किसानों को धान बिक्री की राशि खाते में प्राप्त नहीं हो रही है। ग्राम दमखांचा निवासी शंकर सिंह कंवर ने बताया कि यहां ऑपरेटर खरीदी केंद्र में समय पर नहीं आता जिसकी वजह से किसानों को टोकन कटवाने से लेकर बिक्री रसीद प्राप्त करने के लिए भटकना पड़ता है। मनमानी पूर्वक समय पर केंद्र नहीं पहुंचने से किसानों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।किसानों की शिकायत पर तहसीलदार सुश्री आराधना प्रधान के निर्देश पर राजस्व निरीक्षक करुणा मैत्री एवं पटवारी पुष्पेंद्र कुमार पठियापाली धान उपार्जन केंद्र पहुंचे और किसानों के बयान लेकर पंचनामा तैयार किया । पंचनामा में यह स्पष्ट लिखा गया कि ऑपरेटर द्वारा किसानों से पैसे की मांग की जाती है। राजस्व निरीक्षक द्वारा धान बोरे की तौल करने पर कुछ बोरों में मानक से बहुत ज्यादा और कुछ बोरों में बहुत ही कम तौल करना पाया गया ,जो 38 किलो निकला। पंचनामा में किसानों ने सहमति जताते हुए हस्ताक्षर भी किया है। अब देखना होगा कि, किसानों से जुड़े इस गंभीर मामले में प्रशासन क्या कार्यवाही करता है? ऑपरेटर शशिकांत शांडिल्य ने आरोपों के संबंध में अपने पक्ष में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।
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