बघेल सरकार की नीयत राजनीतिक लाभ उठाना है
रायपुर, 20 दिसंबर 2021 (ए)। बघेल सरकार ने राज्य में ओबीसी आरक्षण 14प्रतिशत से बढ़ाकर 27त्न करने और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 10त्न आरक्षण देने का निर्णय लिया था जिसे छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगा दिया था कि ऐसा करने के लिये सरकार के पास कोई आधार नहीं है, इसके बाद सरकार ने ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग की संख्या का पता लगाने के लिये छत्तीसगढ़ मंटिफायबल डाटा आयोग का गठन किया था सी एल पटेल को आयोग का अध्यक्ष बनाया गया था, आयोग ने 1 सितंबर 2021 से सर्वेक्षण का काम शुरू किया था जिसे पूरा करने के लिये पहले 12 अक्टूबर की तिथि निर्धारित की गई थी जिसे बढ़ाकर 31 अक्टूबर, 30 नवंबर और अब 15 जनवरी 2022 तक निर्धारित किया गया है। सर्वे पर सवाल उठाते हुए छत्तीसगढ़ स्वाभिमान मंच के अध्यक्ष एड. राजकुमार गुप्त ने बघेल सरकार पर आरोप लगाया है कि वह सर्वे के नाम पर कोर्ट की आंखों में धूल झोंकने और ओबीसी तथा ईडब्ल्यूएस को धोखा देने का काम कर रही है, सर्वे के नाम पर सिर्फ ओबीसी राशन कार्ड को मोबाईल से लिंक करने का काम किया जा रहा है, ईडबल्यूएस के लिये यह भी नहीं किया जा रहा है इसके लिये मानदंड भी तय नहीं किया गया है कि किसे ईडबल्यूएस माना जायेगा जबकि सही संख्या का पता लगाने के लिये घर घर जाकर उसी प्रकार सर्वे किया जाना चाहिये जिस प्रकार जनगणना में किया जाता है, बघेल सरकार का सर्वे रिपोर्ट हाईकोर्ट में टिक नहीं पायेगी। मंच के अध्यक्ष ने बघेल सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा है कि उनकी मंशा ओबीसी और ईडबल्यूएस को वास्तविक लाभ प्रदान पहुंचाने के बजाय सिर्फ सिर्फ राजनीतिक लाभ उठाना है। मंच के अध्यक्ष राजकुमार गुप्त ने ओबीसी और ईडबल्यूएस वर्ग की वास्तविक संख्या का पता लगाने के लिये घर घर जाकर सर्वे कराने की मांग की है ताकि उन्हें आरक्षण का लाभ मिल सके।
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