अम्बिकापुर @सीएम तो छत्तीसगढ़ का ही रहेगा,सरगुजिहा की गुंजाइश नहीं

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-डॉ राजकुमार मिश्र-
अम्बिकापुर, 12 अक्टूबर 2021 (घटती-घटना )। किसी अखबार में और किसी चैनल पर भी टीएस सिंहदेव का ऐसा कोई स्पष्ट कथन शायद ही पढा/सुना गया होगा कि वह भूपेश बघेल की कुर्सी पर(विधान सभा के शेष बचे कार्यकाल तक)आसीन होकर सरकार का नेतृत्व करने के लिए लालायित रहा करते हैं। इसकी बजाय उनका एक मात्र एक यही कथन कई बार समाचार माध्यमों में आ चुका है कि उनकी कांग्रेस पार्टी में किसको कब क्या बनना और क्या करना है इसका फैसला उनका हाई कमान ही करता है।लिहाजा पार्टी में किसी की भी निजी इच्छा/अनिच्छा कोई महत्व नहीं रखती। फिर भी बहुत सारे नेता मुख्यमंत्री बघेल की गुड़ बुक में कुछ और लाडले बन जाने के लिए निरर्थक और अवांछनीय बयानबाजी करते रहते हैं। ऐसे नेता जाने-अनजाने प्रकारांतर से यह साबित करते हैं कि जबतक वे मौजूद है प्रदेश सरकार में और संगठन में भी अंतर्कलह होने की बात से कोई इनकार नही कर सकता।
सीएम के आदरणीय पिता श्री नन्द कुमार बघेल सरकार और संगठन में किसी पद पर नहीं होने के बावजूद टीएस सिंहदेव के सम्बंध में जब तब जबान दराजी करते पाए जा रहे है।इस बार उन्होंने टीएस को बिन मांगी सलाह यह दी है कि अगर महाराज राजनीति में रहना चाहते है तो उन्हें संसद का सदस्य बन जाना चाहिए।क्योंकि उन्हें एसटी,एससी और ओबीसी का वोट तो मिलने से रहा । पिताजी के साथ राज्य के जिम्मेदार गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू भी सार्वजनिक रूप से मीडिया में टीएस के खिलाफ अपनी ईर्ष्या को जाहिर करते रहने में संकोच नर्हीं करते।वह कहते है कि टीएस कभी सीएम नहीं बन सकते,बघेल ही सीएम बने रहेंगे।ऐसे कांग्रेसी नेता और भी कई है जिन्हें पता नही ंक्यों,सिंहदेव फूटी आंखों नहीं सुहा रहे हैं।
दरअसल प्रदेश में टीएस को लगातार उकसाने चिढ़ाने की हास्यप्रद और असफल कोशिशों में लगे नेतागण शायद यह मानकर चल रहे हैं कि बघेल के राज में पूरी तरह कार्यपालिका के अफसरों ने अपनी स्वेच्छाचारिता की समानांतर सत्ता कायम कर रखी है।पंद्रह सालों तक राज कर चुकी भाजपा को प्रदेश में ग्रामपंचायत स्तर तक से मिलती रहनेवाली भीतर की खबरें आश्वस्त कर चुकी हैं कि नौकरशाही ने शोषण लूट अन्याय के स्तम्भ इस कदर गाड़ दिए हैं कि रोज कमाकर खानेवाले सामान्य गरीब लोगों से लेकर लगभग हर वर्ग के नागरिक सरकार के आधे कार्यकाल में ही पूरी तरह त्रस्त और निराश हो चुके हैं । लिहाजा अगर बघेल और टीएस के बहाने से सरकार अस्थिर होती है तो कार्यकाल पूरा होने से पहले भी लुढ़क कर उसकी गिरफ्त में आ सकती है।यही कारण है कि जब भी किसी कांग्रेसी नेता कलह को बढ़ानेवाले बयान देता दिखता है,भाजपा के अनुभवी और वरिष्ठ लीडर्स किसी न किसी प्रकार से उसकी पीठ थपथपाते हुए हमदर्दी जताने और उत्साह बढ़ाने में लग जाते हैं।उनसे कोई कलहप्रेमी बयानबाज कांग्रेसी कभी यह कहता नहीं दिखा कि हमारी आपस की बातों में आप क्यो टांग अड़ाते हो ।
टीएस अंतर्मुखी प्रकृति के है।वह आधिकारिक रूप से सौंपी गई हर जिम्मेदारी निभा सकते हैं मगर किसी जिम्मेदारी को पाने के लिए कतई उत्सुक नहीं हो सकते। 30–40 सालों से सरगुजा का कोई एक भी उल्लेखनीय व्यक्तित्व उनके आसपास बनी रहनेवाली मंडली में शामिल नहीं हो सका है।दरबारी मंडली भी उन्ही पर आश्रित रहकर फलती फूलती रही है।महाराज के प्रताप से कुछ सीनियर दरबारियों को राज्यस्तर के प्रभार संभालने के लिए मनोनीत बेशक किया गया है पर उन्ही पदों के लिए अगर चुनाव की प्रक्रिया जरूरी होती तो कोई संभावना नहीं होती।
वैसे भी आपके इसी अखबार में एकाधिक बार यह अप्रिय सत्य रेखांकित किया जा चुका है कि सरगुजिहा को छत्तीसगढ़ की किसी भी सरकार में मंत्री तो बनाया जा सकता है पर मुख्यमंत्री के तौर पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।बाबा महाराज भी इस सच्चाई को जरूर समझते होंगे।


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