क्यों जिलाध्यक्ष को पड़ी पार्टी कार्यकर्ताओं को नसीहत देने की जरूरत?

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34 महीने बाद संगठन में अनुशासन का पालन…संगठन की गरिमा का आया जिलाध्यक्ष को ध्यान,सोशल मीडिया पर भी बरतें सावधानी,हर शिकायत सार्वजनिक करने से बचें

रवि सिंह –

बैकु΄ठपुर 30 सितम्बर 2021 (घटती-घटना)। कांग्रेस कमेटी कोरिया के जिलाध्यक्ष नजीर अजहर ने जिले भर के पार्टी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं को पहली बार कोई सीख देने की कोशिश करते हुए अपनी तरफ से एक अनोखा पत्र जारी किया है जिस पत्र से यह सपष्ट जाहिर होता है कि कोरिया जिले में कांग्रेस पार्टी में सभी कुछ कम से कम अच्छा नहीं चल रहा है वहीं पार्टी के अधिकांश पदाधिकारी व कार्यकर्ता नाराज चले आ रहें हैं और उनकी कई सार्वजनिक बयानबाजियों से भी साबित होता है कि वह कहीं न कहीं उपेक्षित हैं और अपनी पीड़ा पार्टी में नहीं रख पाने और पार्टी में ही पूछ परख नहीं होने की वजह से सार्वजनिक रूप से रखना उनकी मजबूरी बन गई है। पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं की नाराजगी जो पार्टी के भीतर ही उनकी उपेक्षा की वजह से उत्तपन्न हुई है को लेकर अभी हाल ही में जिलेभर के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं को अपनी बात और शिकायत रखने का एक मौका तब मिला जब छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी के प्रदेशाध्यक्ष मोहन मरकाम कोरिया जिले के दौरे पर जिला मुख्यालय बैकुंठपुर के राजीव भवन पहुंचे। पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने प्रदेशाध्यक्ष के समक्ष जमकर अपनी भड़ास निकाली और लगातार उपेक्षा की अपनी स्थिति से पार्टी के भीतर ही प्रदेशाध्यक्ष को अवगत कराया। प्रदेशाध्यक्ष के राजीव भवन कोरिया में जारी कार्यक्रम के दौरान एक समय स्थिति ऐसी हो गई कि पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं को बोलने का मौका देने से भी जिला कांग्रेस कमेटी बचता हुआ नजर आया क्योंकि शिकायत की फेहरिस्त इतनी लंबी होती जा रही थी कि वह खत्म भी हो सकेगी इसका भय सता गया जिला कांग्रेस कमेटी के लोगों को। कांग्रेस कमेटी कोरिया के जिलाध्यक्ष ने प्रदेशाध्यक्ष के ही कार्यक्रम में पार्टी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं के शिकायती मामलों को सज्ञान में लेते हुए यह पत्र पूरे जिलेभर के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं के प्रति लिखा और प्रेषित किया है जिसमें भविष्य में इस तरह की किसी गलती पर अनुशासनात्मक कार्यवाही की चेतवानी देकर समझाइस देने का प्रयास किया गया है।

संगठन में शिकायत नहीं करें तो कहां करें पार्टी सदस्य

जिलाध्यक्ष के पत्र के सार्वजनिक होते ही कुछ पार्टी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं का कहना है कि पार्टी के लोगों ने प्रदेशाध्यक्ष को अपने बीच पाया तो उनके सब्र का लगभग 3 वर्ष पुराना बांध टूट गया और वह जिला कमेटी में भी सुनवाई नहीं होने व सत्ता का भी सहयोग नहीं मिलने की अपनी शिकायत प्रदेशाध्यक्ष से कर बैठे,अब अपने ही पार्टी फोरम में बंद कमरे के अंदर की शिकायत भी पार्टी के जिला कमेटी को नागवार लग रही है तो ऐसे में अब अपनी बात रखने पार्टी के लोग कहाँ जाएं,सभी का अब यही कहना है।


जिलाध्यक्ष का संगठनात्मक एकजुटता को लेकर कोई प्रयास कभी नहीं रहा


कांग्रेस पार्टी के ही कुछ पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं का यह कहना है कि जब जिलेभर के पार्टी पदाधिकारी व कार्यकर्ता प्रदेशाध्यक्ष से अपनी लगातार हो रही उपेक्षा की शिकायत कर रहे थे तब जिलाध्यक्ष को पार्टी के लोगों पर गुस्सा आ रहा था यह उनके इस पत्र से जाहिर होता है,जबकि संगठन के जिला के मुखिया होने के नाते उन्हें पार्टी के आम लोगों के साथ खड़ा होना था।लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया क्योंकि वह चूंकि एक व्यव्सायी हैं और सत्ता के साथ उनका तालमेल ही ताक़त,इसलिए वह आम पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से नाराज हुए क्योंकि उन्होंने अपनी व्यथा जाहिर की जबकि पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं का आक्रोश सत्ता के प्रति था और सत्ता के ही लोगों से जिलाध्यक्ष का लगाव है इसलिए उन्हें आम कार्यकर्ताओं की बातें बुरी लगीं, इससे साफ जाहिर होता है कि जिलाध्यक्ष का संगठन मामले में एकजुटता कायम कर पार्टी को मजबूत करने की बजाय सत्ता के साथ ही जुड़कर चलने में विश्वास रखते हैं।

अनुशासन का डंडा केवल आम कार्यकर्ताओं के लिए ही क्यों

कुछ पार्टी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं का कहना है अपनी बात पार्टी फोरम में रखना गैर अनुशासित व्यवहार साबित कर दिया गया अब आगे से सभी को यह भय रहेगा कि अपनी बात अपनी शिकायत रखना ही सबसे बड़ा गुनाह माना जायेगा,जबकि पार्टी के ही कई वरिष्ठ पदाधिकारियों की कई गलतियां केवल इसलिए माफ हैं क्योंकि वह सत्ता के साथ हैं।


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