महिला आयोग की सुनवाई के दौरान पूर्व तहसीलदार पहुँची विधायक के साथ

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महिला आयोग की सुनवाई के दौरान विधायक का हस्तक्षेप,फिर हुई आलोचना…तहसीलदार के शिकायत पर समाचार-पत्र के संवाददाता के खिलाफ होनी थी सुनवाई

न्यायालयीन कार्यवाही के दौरान तहसीलदार की वकालत करते दिखी विधायक,विधायक की तहसीलदार के पक्ष में पैरवी पर उठ रहा है सवाल

रवि सिंह-
बैकु΄ठपुर 18 सितम्बर 2021 (घटती-घटना)। कोरिया जिले में कलेक्टर सभाकक्ष में राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष व सदस्यों द्वारा महिला अपराधों से जुड़े मामलों,व महिलाओं द्वारा आयोग को की गई विभिन्न शिकायतों का दिनांक 17/09/2021 को सुनवाई जारी थी। सुनवाई के दौरान विभिन्न मामलों में एक मामला दैनिक समाचार पत्र के स्थानीय संवाददाता व समाचार पत्र के सम्पादक पर बैकुंठपुर की पूर्व तहसीलदार के द्वारा महिला आयोग के समक्ष की गई मानसिक प्रताड़ना जो समाचारों के प्रकाशन को लेकर था कि भी सुनवाई जारी थी। सुनवाई में दैनिक समाचार पत्र के स्थानीय संवाददाता अनावेदक बतौर उपस्थित थे वहीं संपादक नोटिस नहीं मिलाने के कारण उपस्थित नहीं हो सके थे। सुनवाई के ही दौरान मामले में शिकायतकर्ता आवेदिका बैकुंठपुर की पूर्व तहसीलदार बैकुंठपुर की विधायक के साथ सुनवाई कक्ष में पहुंची वहीं विधायक ने मामले में खुद पैरवी करते हुए संवाददाता को गलत साबित करने अपने स्तर पर पूरी पैरवी करने का कोई मौका नहीं छोड़ा। व्यक्तिगत आरोप लगाकर संवाददाता को मामले में दोषी साबित करने के लिए विधायक ने आयोग की अध्यक्ष को भी कई बार कार्यवाही के लिए दबाव डाला।


क्या है मामला

बैकुंठपुर में पूर्व में पदस्थ रह चुकी महिला तहसीलदार जो अभी सूरजपुर में पदस्थ हैं उनके बैकुंठपुर में पदस्थ रहने के दौरान उनके विरुद्ध दैनिक समाचार पत्र ने लगातार कुछ समाचार प्रकाशित किये थे। समाचारों को लेकर तहसीलदार ने महिला आयोग में शिकायत की थी कि वह महिला लोक सेवक हैं और उनके विरुद्ध लगातार समाचार प्रकाशित कर समाचार पत्र के संवाददाता व संपादक लगातार उन्हें मानसिक रूप से प्रताçड़त कर रहें हैं वहीं उनने मान सम्मान को आहत कर रहें हैं, आयोग ने मामले में संवाददाता सहित संपादक को सुनवाई में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का अवसर देते हुए आयोग की बैकुंठपुर में आयोजित सुनवाई के दौरान उपस्थित रहने निर्देश जारी किया था।


संवाददाता का बयान

संवाददाता ने आयोग की सुनवाई में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उनके द्वारा कोई भी समाचार दुर्भावनावश या किसी की छवि धूमिल करने के उद्देश्य से प्रकाशित किये जाने हेतु नहीं भेजा गया, बल्कि प्राप्त शिकायतों व तथ्य के आधार पर व जुटाई गई जानकारी के सत्यता को जानकर ही उन्होंने समाचार छपने हेतु भेजा था जो उनके पेशे का मुख्य काम भी है। लोकतंत्र में चौथे स्तम्भ का काम ही है लोक सेवकों सहित किसी भी ऐसे मामलों को जनता के समक्ष रखना शासन प्रशासन के समक्ष रखना जिसमें दोषपूर्ण तथ्य पाए जाते हों। संवाददाता ने यह भी कहा अपना पक्ष रखते हुए की मेरे किसी समाचार से किसी महिला लोक सेवक के सम्मान को कभी आहत करने का प्रयास नहीं किया गया है वहीं यदि किसी महिला लोक सेवक को ऐसा किसी मामले में लगता है तो उसका उन्हें खेद है, जबकि उनकी लेखनी महिला सम्मान के विरुद्ध नहीं लोक सेवक के कार्यों की प्राप्त शिकायतों पर आधारित थीं व जिनका पूरा दस्तावेज उनके पास उपलब्ध भी है और वह उसे प्रस्तुत भी कर रहें हैं।


विधायक की सुनवाई के दौरान उपस्थिति व एक पक्षीय पैरवी पर उठा सवाल

महिला आयोग की सुनवाई न्यायालय की सुनवाई की तरह निष्पक्ष न्याय के उद्देश्य से आयोजित की जाती है और आयोग की सुनवाई साथ ही आयोग की तय कार्यवाही न्यायालय की कार्यवाही की तरह मान्य होती है, ऐसे में न्यायालयीन कार्यवाही के दौरान किसी एक पक्ष जिसका मामला उक्त न्यायालय में विचाराधीन हो को लेकर अपने साथ पहुंचना साथ ही उसके लिए लगातार पैरवी करना क्या न्यायालयीन अवमानना की श्रेणी में नहीं आता, इस बात को लेकर अब विधायक की उपस्थिति को लेकर सवाल उठ रहें हैं। कुछ लोगों का कहना है, पूरी सुनवाई के दौरान विधायक केवल तहसीलदार के मामले को लेकर ही कार्यवाही पर अड़ी रहीं संवाददाता के विरुद्ध जो कि गलत है क्योंकिं तत्कालीन तहसीलदार की कार्यप्रणाली जिस तरह की रही है उसी के दण्ड स्वरूप उनकी शिकायत व विभागीय जांच के आदेश भी उच्च आधिकारियो के द्वरा जारी किया गया है। किसी लोक सेवक के प्रति मोह में विधायक ने अपने पद व प्रतिष्ठा का ध्यान रखे बिना न्यायालयीन कार्य के दौरान एक पक्षीय निर्णय हेतु दबाव बनाने का प्रयास किया जो कि गलत है।


संवाददाता ने कहा माफी समाचारों को लेकर नहीं मांगी

वहीं लगातार माफी मांगने की बात से क्षुब्ध संवाददाता ने साफ कहा कि उन्हें सुनवाई के दौरान यह निर्देश प्राप्त हुआ कि उनके समाचारों से महिला लोक, सेवक को मानसिक परेशानियां हुई है और वह समाचारों के प्रकाशन के लिए आपस मे समझौता कर लें उस परिपेक्ष में उनके द्वारा केवल इसबात का खेद प्रकट किया गया है कि उनके समाचारों का उद्देश्य किसी को मानसिक रूप से प्रताçड़त करने का नहीं रहा है, वहीं यदि किसी को भी यदि लगता है कि समाचारों से किसी को मानसिक प्रताड़ना का शिकार होना पड़ा है वह उसके लिए खेद व्यक्त कर सकते हैं, लेकिन वह समाचारों के प्रकाशन को लेकर साफ कह रहें है कि वह तथ्य व शिकायत व प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर प्रकाशित किसी समाचार के लिए कभी माफी नहीं मांगेंगे।


समाचारों के प्रकाशन में रखें कुछ ध्यान

पूरे मामले में सुनवाई के दौरान राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष ने बयान जारी कर कहा है कि समाचार पत्र के संवाददाता ध्यान रखें कि समाचारों से किसी को व्यक्तिगत ठेंस न पहुंचे वहीं किसी महिला मान पर आघात का भी प्रयास समाचारों के प्रकाशन से नहीं किया जाए वहीं समाचारों की सत्यता जांचकर यदि समाचार लिखे जाते हैं तो यह समाचार पत्रों को मिली हुई स्वतंत्रता है और वह किसी लोक सेवक के विरुद्ध भी सत्य पर आधारित खबर छापने स्वतंत्र हैं।


पत्रकार सुरक्षित नहीं

पूरे मामले में महिला आयोग की सुनवाई के दौरान बैकुंठपुर विधायक ने जिस तरह लोक सेवक के पक्ष में सुनवाई कक्ष में जाकर लोक सेवक की पैरवी की उसको लेकर अब यह कहना गलत नहीं होगा कि शासन पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर गम्भीर नहीं है, सत्यता की जांच पूरे मामले में अभी हुई नहीं है वहीं अभी दोनों पक्षों के बीच मामले की पहली ही सुनवाई थी जिसमें आयोग की अध्यक्ष ने अपनी सूझबूझ से मामले को एक आपसी सामंजस्य के हिसाब से समाप्त करने का प्रयास किया, वहीं बिना दस्तावेजों के परीक्षण के ही विधायक ने जिस तरह एकतरफा संवाददाता को दोषी करार दिए जाने हेतु स्वयं उपस्थित होकर पैरवी की उससे साफ जाहिर हो जाता है कि सरकार की मंशा पत्रकारों की स्वतंत्रता को लेकर सही नहीं है वरना सरकार में शामिल विधायक कम से कम इस बात का ध्यान जरूर रखती की मामलें में दोषी तभी कोई साबित किया जा सकता है जब दस्तावेजों की जांच पूरी हो जाएगी।


आयोग के सुनवाई में विधायक का हस्तक्षेप कितना सही ?

प्रत्येक्षदर्शी के अनुसार जिस तरह महिला आयोग और उनके सदस्यों के साथ बैकुंठपुर विधायक बैठी और लोकसेवक और पत्रकार मामले में विधायक लोक सेवक के पक्षकार बनकर सुनवाई के बीच में मामले में हस्तक्षेप करती हुई नजर आई उनके इस कृत्य से निश्चित तौर से महिला आयोग के सदस्य से लेकर अध्यक्ष भी प्रभावित हुए जनमानस में उनके इस कृत्य को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं आम हो रही है। खैर इस पूरे मामले में विधायक का हस्तेक्षप से प्रतीत होता है कि वह एक लोकसेवक के प्रति कितने समर्पित है। पूरे मामले की सुनवाई के दौरान उनका हस्तेक्षप करना आयोग के कार्यप्रणाली में दखल देना कितना सही होता है यह महिला आयोग को भलीभांति ज्ञात है।


पूरे मामले में कांग्रेस नेताओं का उत्साह समझ से परे

तहसीलदार की महिला आयोग के समक्ष शिकायत पर हुई सुनवाई के बाद बैकुंठपुर विधानसभा के कांग्रेस नेताओं का उत्साह समझ से परे रहा। मामला लोक सेवक के विरुद्ध समाचार प्रकाशन को लेकर सही व गलत को लेकर था वहीं मामले की सुनवाई के बाद कांग्रेस नेता उत्साहित होकर सोशल मीडिया में अपना बयान खुशी के साथ जारी करते रहे। कभी अधिकारी के तबादले पर पटाखा फोड़ते हैं, कभी किसी अधिकारी के आने पर खुश हो जाते हैं कभी पत्रकारों के मामले में भी ध्यान लगाकर जश्न मनाते हैं ऐसा लगता है पूरी व्यवस्था अपने अधीन करने की इनको जिद है।


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