संपादकीय@विधायक का विरोध सरेआम न होकर क्या केवल मन में है?

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बैकुंठपुर विधानसभा के कांग्रेसी वर्तमान विधायक के विरोध में हैं,लेकिन जब भी विरोध जताने का मौका मिला तो असफल क्यों रहे?
वर्तमान विधायक से उपेक्षित  हैं अधिकांश कांग्रेसी नेता फिर भी अपनी उपेक्षा उच्च स्तरीय नेताओं को बता पाने में असमर्थ क्यों?

लेख BY रवि सिंह। बैकुंठपुर विधायक को लेकर विधानसभा क्षेत्र की जनता में जितना असंतोष है उससे कहीं ज्यादा असंतोष कांग्रेस पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं में देखा जा रहा है जो खुलकर सामने भी आ रहा है, लेकिन यह सबकुछ केवल स्थानीय स्तर तक ही सीमित है और किसी बड़े नेता व किसी प्रभारी के आने पर क्षेत्र के नेता विधायक का विरोध नहीं कर पाते और यदि कर भी पाते हैं तो बड़े नेताओं के द्वारा विरोध का कारण पूछ देने पर ही चुप हो जाते हैं, जिसके बाद आए हुए बड़े नेता या प्रभारी भी यही समझ पाते हैं की स्पष्ट विरोध नहीं है और इसलिए वह भी विरोध को नजरंदाज कर जाते हैं। बैकुंठपुर विधानसभा में विधायक का विरोध करने वाले नेताओं की यदि बात की जाए तो उनमें भी आपसी गुटबाजी आपसी वर्चस्व की बात एक विषय जरूर है जो भी एक वजह है की वर्तमान विधायक का विरोध कांग्रेसी उस दमदारी से नहीं कर पा रहे हैं, जिस दमदारी से उन्हे करना चाहिए, कुल मिलाकर बैकुंठपुर विधानसभा के कांग्रेसी विधायक से नाराज हैं उनकी कार्यप्रणाली को लेकर भले ही उनके विरोधी हैं, लेकिन वह आपस में भी एक नहीं हैं और जिसकी वजह से वह किसी भी बड़े स्तर के नेता या प्रभारी के आने पर भी वह विरोध दर्ज नहीं कर पाते जैसा की नाराजगी देखकर सुनकर कांग्रेसी नेताओं का लगता है की उन्हे करना चाहिए।
कोई कांग्रेसी यदि विरोध के नाम पर विधानसभा में आए हुए किसी प्रभारी या बड़े नेता के पास जाता भी है तो वह केवल अपना विरोध अपना स्वार्थ और अपना बखान लेकर जाता है जो सामने वाले के सामने यह साबित करने के लिए काफी हो जाता है की विरोध करने पहुंचा कांग्रेसी विरोधी कम खुद के लिए पद की दौड़ में ज्यादा है और विरोध की वजह भी एक है। बैकुंठपुर विधानसभा में कांग्रेस कई धड़ों में बंटी हुई है, विधायक गुट के बाद इतने गुट हैं की नाम लेना या ले पाना संभव नहीं है और अधिकांश गुट विधायक का विरोध भी करते हैं, लेकिन उचित मंच पर वह विरोध नहीं किया जाता, वह विरोध केवल विधानसभा क्षेत्र में अपने से जुड़े लोगों के बीच ही नेता कर पाते हैं, जिसका कोई असर विधायक पर वह नहीं डाल पाते। जैसा की अभी हाल ही में दो बार विधानसभावार कांग्रेस नेताओं से पसंदीदा विधायक प्रत्याशी को लेकर प्रश्न करने उनकी मंशा जानने पार्टी ने आयोजन किया था प्रयास किया था जिसमे एक बैठक कोरबा में हुई थी, जिसमे स्वयं प्रदेश प्रभारी मौजूद थीं और वहां बैकुंठपुर विधानसभा से अधिकांश कांग्रेस पार्टी से टिकट की आस में दावेदारी किए नेता पहुंचे थे, सभी उपस्थित हुए और जब उनसे प्रभारी ने यह पूछा की क्या सरकार की योजना से आप संतुष्ट हैं? क्या सरकार की योजना सरकार को पुनः सत्ता तक पहुंचा रही है? तब सभी ने एक स्वर में हां कह दिया और वहीं उन्होंने एक बार भी विधायक को लेकर कोई विषय नहीं रखा और जिसके बाद प्रदेश प्रभारी भी जान गई की विरोध थोड़ा बहुत है भी तो उतना हर दल में खासकर चुनाव में समय सत्ताधारी दल में ज्यादा ही होता है और उतना मैनेज किया जा सकता है, प्रभारी को यह भी समझ में आया की विरोध करने पहुंचे अधिकांश खुद प्रत्याशी बनने की लालसा में आए हुए हैं, और वह खुद विधायक प्रत्याशी के दावेदारी की दौड़ में शामिल है, विरोध करने वाले लोग विधायक की कमियों को नहीं रख पाए और विधायक से हो रही कांग्रेस पदाधिकारी की उपेक्षा को भी समझ नहीं पाए। सभी लोग विरोध करने के बजाय वह उचित समस्या बताने के बजाय अपने स्वार्थ सिद्धि में जुटे रहे, आखिर इसका अंत भी वैसा ही हुआ जैसा वह सोच भी नहीं थे। जैसा सोच कर कांग्रेसी मिलने पहुंचे थे उसके उलट ही वहां परिणाम मिला, उसकी सिर्फ एक वजह थी, उपेक्षित कांग्रेसियों का संगठित ना होना और संगठित होकर विधायक की कमियों को सही तरीके से उच्च स्तरीय नेताओं के सामने ना रख पाना, विधायक की कमियों को उच्च स्तरीय नेताओं तक रखने का कई मौका मिला पर स्वार्थी कांग्रेसी उसे रख नहीं पाए स्वार्थ में ही बह गए। एक अच्छा व जन सेवा वाला नेता अपनी कुशलता से उच्च स्तरीय नेताओं को समझता है और क्षेत्र में कांग्रेस कैसे मजबूत हो सकती है उसके लिए निस्वार्थ भाव से सलाह देता पर सलाह तो दूर उनके विधायक से क्षेत्र की नाराजगी को भी सही तरीके से रख नहीं पाए।


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