खड़गवां @सड़क निर्माता कंपनी कर रही है अवैध उत्खनन जिम्मेदार अधिकारी मौन क्यों?

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क्या अवैध उत्खनन में सड़क निर्माण कंपनी को विभाग ने दी है मौन स्वीकृति?

राजेंद्र शर्मा –
खड़गवां 22 नवम्बर 2021(घटती-घटना)। खड़गवां क्षेत्र के ग्राम पंचायत सलका में इन दिनों सड़क निर्माण करने वाली कंपनी के द्वारा अवैध खदान संचालित करके शासन को चूना लगाने की बात सामने आ रही है। वही मिली जानकारी के अनुसार सड़क निर्माण कंपनी द्वारा लीज क्षेत्र को छोड़कर वहां लगे जमीन को खोदने का काम किया जा रहा है। वहीं सूत्रों की माने तो यह जमीन किसी और का होना बतया जा रहा है जो विभाग के लिए जाँच का विषय है।

कई सवालों के घेरे में है सडक निर्माण कंपनी

माइनिंग विभाग तो कार्यवाही के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति कर रही है। कार्यवाही के नाम पर सिर्फ पेनाल्टी ही पटाकर क्रेशर को खोल दिया जा रहा है।क्या खनिज विभाग इस क्रेशर को क्षमता से अधिक मात्रा की खुली छूट दे रखी है? क्योंकि इनके क्रेशर में देखें तो हजारों टन पत्थर का उत्खनन किया जा रहा है।


जिस खदान की लीज है क्या उसकी भंडारण क्षमता उतनी है ?


सडक निर्माण कंपनी में बहुत सारा अवैध तरीके से गिट्टी का भंडारण किया गया है। क्या इस लीज पर उतनी उत्खनन और भंडारण कि क्षमता है क्या? जबकि इसकी जानकारी माइनिंग विभाग को नहीं है क्या, अगर नहीं है तो माइनिंग विभाग जानकारी कर लें, क्योंकि यहां पर हजारों टन हल्का से गिट्टी उत्खनन हों रही है। क्या इसकी रॉयल्टी पर्ची सडक निर्माण करने वाली कंपनी के पास है? अगर है तो माइनिंग विभाग को चेक करना चाहिए। अगर नहीं है तो उस पर कार्यवाही करना चाहिए। सडक निर्माण कंपनी के द्वारा लगे स्टोन क्रेशर में कितना भंडारण करने की क्षमता है इसकी जांच और कितने क्षेत्र में उत्खनन कर रहा है इसकी जांच करने की जरूरत खनिज विभाग ने नहीं समझी।

अवैध तरीके से खदान खोलकर मालामाल हो रही है सडक निर्माण कंपनी

जांच के नाम पर माइनिंग विभाग सुर्खियों में बहुत आया हुआ था क्योंकि कोरिया कलेक्टर श्याम धावड़े जब से रेत माफियाओं पर ताबड़तोड़ कार्यवाही हुई हैं। खनिज विभाग सिर्फ और सिर्फ रेत उत्खनन पर कार्यवाही कर रहा है। खनिज विभाग के द्वारा एक भी क्रेशर पर किसी प्रकार की कोई में कार्यवाही नहीं हुई है और खनिज विभाग कार्यवाही करनी भी नहीं चाहता है क्योंकि यहां संचालित क्रेशरो से खनिज विभाग को लक्ष्मी नारायण जी का प्रसाद प्राप्त होता रहता है। जहां से प्रसाद प्राप्त होता हो वहां पर कार्यवाही का ना होना तो लाजमी है?

सड़क निर्माण कंपनी प्रदूषण विभाग को दिखा रहा है ठेंगा

यहां कोरिया जिला खनिज संपदा से भरा पूरा है। प्रदूषण विभाग को इसकी जांच करनी चाहिए, लेकिन प्रदूषण विभाग को तो यहां देखने क्या झांकने तक का फुर्सत नहीं है। यूं कहा जाए कि अगर प्रदूषण विभाग इस सडक निर्माण कंपनी के क्रेशर और डामर प्लांट में जाकर चेक करे तो बहुत सारी अनियमितताएं मिलेगा। प्रदूषण विभाग में तो सिर्फ और सिर्फ मोटा लिफाफा पहुंच जाने से घोड़े बेचकर कर सो रहे हैं। इनको बोलने वाला भी कोई नहीं है ऐसा प्रतीत हो रहा है। प्रदूषण विभाग की सुनने और देखने की शक्ति चली गई है, तभी तो यहां के आसपास के ग्रामीण प्रदूषण से मर रहे हैं, लेकिन पर्यावरण विभाग को कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है।

सड़क निर्माण कंपनी के स्टोन क्रेशर में हादसों को न्योता दे सकता है

सडक निर्माण कंपनी श्रम विभाग को भी ठेंगा दिखाकर क्रेशर संचालित कर रहा है। अगर आपको क्रेशर में काम करना हो तो अपनी सुरक्षा के लिए हेलमेट और जूता उच्च कोटि का मास्क पहनना जरूरी होता है। यहां के एक भी कर्मचारी हेलमेट और जूता नहीं पहना हुआ है। कर्मचारियों को सुरक्षा के लिए हेलमेट और जूता मास्क नहीं दिया है, तभी तो वह नहीं पहन रहे है और अपनी जान को जोखिम में डालकर वहां पर अपनी पापी पेट के लिए काम कर रहे हैं। यहां ना तो खनिज विभाग का डर है, ना प्रदूषण विभाग का और ना ही श्रम विभाग का। उसके बाद भी धड़क्के के साथ क्रेशर संचालित हो रहा है। क्या इस पर कार्यवाही करने वाला कोई नहीं है? यूँ तो खनिज विभाग इस साल रेत उत्खनन पर ताबड़तोड़ कार्रवाई की है, लेकिन जिस प्रकार से कार्यवाही करनी चाहिए और जिन पर कार्यवाही होनी चाहिए उन कार्यवाही नहीं हो रही है। अब आगे देखना लाजमी होगा कि खनिज विभाग, श्रम विभाग या प्रदूषण विभाग इस पर क्या कार्यवाही करती है।

जिमेदार अधिकारी का ना फोन उठा न मैसेज का जवाब मिला

जब हमने इस संबंध में सहायक खनिज अधिकारी से दूरभाष के माध्यम से उनके नंबर 9892437635 से संपर्क साधा तो उन्होंने मोबाइल को व्यस्त मूड में डालकर रखा है उसके बाद भी उनके व्हाट्सएप पर मैसेज भी किया मगर उन्होंने ने किसी प्रकार का कोई जवाब नहीं दिया।


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