बैकु΄ठपुर@बहन ने भाइयों की रक्षा के लिए मनाया भैया दूज पर्व

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भाईयों को यमराज के भय से दूर करने की कई वर्षो से निभा रही अनोखी परंपरा

रवि सिंह-
बैकु΄ठपुर 06 नवम्बर 2021 (घटती-घटना)। भैया दूज के दिन गोधन कूटने की अनोखी परंपरा को निभाते हुए भैया दूज का पर्व हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि को मनाए जाने वाले भैया दूज को आमतौर पर गोधन के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन उत्तर भारत के कई राज्यों में बहनें अपने भाइयों को शाप देकर उन्हें जीवित करने की अनोखी परम्परा निभाती हैं। मान्यता है कि इस शाप से भाइयों को मृत्यु का डर नहीं होता। बिहार और झारखण्ड में मनाया जाने वाले पर्व को पटना में भी श्रद्धालुओं के द्वारा पिछले कई वर्षो से मनाया जाता है इस वर्ष भी गोधन कूटने की परंपरा को महिलाओं ने निभाया। गोधन के मौके पर बहनें भाइयों को खूब कोसती हैं, और उन्हें गालियां भी देती हैं। यहां तक कि भाइयों को मर जाने का शाप भी देती हैं। इस दौरान विशेष पौधे रेंगनी के कांटें को भी ये बहनें अपनी जीभ में चुभाती हैं इसे शापना कहा जाता है। यह परंपरा व्रती सोकर उठने के तुरंत बाद करती हैं ऐसा अनुसरण कर सभी महिलाओं ने सोमवार को पूजा अर्चना किए।
हर साल गोधन पूजा करने वाली उर्मीला सोनी ने बताया कि गोधन पूजा करने वाली महिलाएं सभी उम्र की होती हैं। इसमें शादीशुदा से लेकर कुवांरी लड़की भी इस पर्व को मनाती है। इस दिनएक घर के बाहर सभी महिलाए सामूहिक रूप से गोबर से चैकोर आकृति बनाती हैं, जिसमें यम और यमी की गोबर से ही प्रतिमा बनाई जाती है। इसके अतिरिक्त सांप, बिच्छु आदि की आकृति भी बनाई जाती है। महिलाएं पहले इसकी पूजा करती हैं और फिर इन्हें डंडे से कूटा जाता है। वहीं आकृति के भीतर चना, ईंट, नारियल, सुपारी और वह कांटा भी रख दिया जाता है, जिसे बहनें अपनी जीभ में चुभाकर भाइयों को कोसती हैं। इस दौरान महिलाएं गीत और भजन भी गाती हैं। इनहें कूट लेने के बाद उसमें डाले गए चने को निकाल लिया जाता है और फिर सभी बहनें अपने-अपने भाइयों को तिलक लगाकर इसे खिलाती हैं, इस दौरान भाई अपनी बहनों को उपहार भी देते हैं। व्रती महिलाओं ने बताया कि यह परम्परा काफी प्राचीन है, जिसे वे भी पूरी आस्था से मनाती हैं। इस परम्परा के पीछे मान्यता है कि द्वितीया के दिन भाइयों को गालियां और शाप देने से उन्हें यम (यमराज) का भी भय नहीं होता। गोधन को यम द्वितीया भी कहा जाता है। महिलाओं ने यह भी बताया कि इस पूजा अर्चना की एक कथा है जिसमें प्राचीन काल में एक राजा के बेटे की शादी थी। राजा ने अपनी विवाहित पुत्री को भी बुलाया था। दोनों भाई-बहनों में अपार स्नेह था। बहन जब भाई की बारात में शामिल होने जा रही थी तो उसने लोगों को यह कहते हुए सुना कि चूंकि राजा की बेटी ने अपने बेटे को कभी गाली नहीं दी, इसलिए वह बारात के दौरान ही मर जाएगा। इसके बाद बारात निकलने के रास्ते में बहन ने अपने भाई को खूब गालियां दीं और रास्ते में जो भी सांप-बिच्छू दिखाई दिए, उन्हें मारती और आंचल में डालती चली गई। जब वह घर लौटी तो उसके भाई के प्राण लेने के लिए यमराज उनके घर आए हुए थे, लेकिन यमराज ने जब भाई-बहन का प्रेम देखा तो वे राजा के बेटे का प्राण लिए बगर ही यमपुरी लौट गए।


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