बैकु΄ठपुर @छत्तीसगढ़ में 17 राष्ट्रीय उद्यान,एलीफेंट रिजर्व व वनमण्डल में 316 हाथी कर रहे हैं विचरण

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40 हाथियों के दल की पहचान बनेगी कोरिया से निकली हसदेव नदी

रवि सिंह-

बैकु΄ठपुर 13 अक्टूबर 2021 (घटती-घटना)। कोरिया जç¸ले की कैमूर पहाडç¸यों से निकलकर कोरबा, बिलासपुर जिलों में बहती हुई महानदी में मिलने वाली हसदेव नदी का अधिकांश प्रवाह क्षेत्र ऊबड़-खाबड़ है। इसकी कुल लंबाई 333 किलोमीटर और प्रवाह क्षेत्र 7210 वर्ग किमी है। हसदेव नदी कोरिया की प्रसिद्ध नदी है अब इस नदी के नाम से छत्तीसगढ़ में विचरण करने वाले 40 हाथियों के दल की पहचान होगी। राज्य सरकार से अनुमति मिलने के बाद हाथी दल का नामकरण किया जाएगा। मनेंद्रगढ़ वनमण्डल ने हसदेव दल के नाम से नामकरण करने प्रस्ताव भेजा है।
जानकारी के अनुसार कटघोरा, कोरिया-बैकुंठपुर, मनेंद्रगढ़, मरवाही वनमण्डल सहित मध्यप्रदेश-अनूपपुर वनमण्डल में विचरण करने वाले 40 हाथियों के दल का नामकरण होगा। हाथी दल में दो शावक सहित 40 नर-मादा हाथी शामिल हैं। राज्य सरकार से अनुमति मिलने के बाद 40 हाथियों के दल का बकायदा नामकरण किया जाएगा और हसदेव के नाम से दल की पहचान होगी। फिलहाल हाथी दल मध्यप्रदेश के अनूपपुर वनमण्डल में विचरण कर रहा है। वहीं छत्तीसगढ़ के 17 राष्ट्रीय उद्यान, एलीफेंट रिजर्व व वनमण्डल में 316 हाथी (अनुमानित) विचरण कर रहे हैं।

सात दल का नामकरण में 91 हाथी सामिल

जानकारी के अनुसार वर्तमान में अलग-अलग सात दल में रहने वाले हाथियों का नामकरण किया गया है। जिसमें अपना दल, लोनर्स, बहरादेव, सहज दल, बादलखोल दल, सुंदरगढ़ दल व गौतमी दल शामिल हैं। इन सात दल में हाथियों की संख्या 91 है। वन विभाग से अनुमति मिलने के बाद हसदेव दल का नामकरण होने से आठवां दल बन जाएगा।

वनमण्डलवार हाथी की संख्या

गुरुघासीदास राष्ट्रीय उद्यान 09, एलीफेंट रिजर्व सरगुजा 37, मनेंद्रगढ़ वनमण्डल 07, सूरजपुर वनमण्डल 28, बलरामपुर वनमण्डल 11, जशपुर वनमण्डल 62, धर्मजयगढ़ वनमण्डल 42, रायगढ़ वनमण्डल 24, बालोद 22, गरियाबंद 30, बलौदाबाजार 04 कुल 316 हाथियों की जानकारीमिल रही है। चार वनवृत्त में हाथी संख्या बिलासपुर वनवृत्त 106, सरगुजा वनवृत्त 154, रायपुर वनवृत्त 34, दुर्ग वनवृत्त 22 मामले के संबध में डीएफओ विवेकानंद झा ने बताया कि 40 हाथियों का हसदेव दल के नाम से नामकरण करने का प्रस्ताव भेजा गया है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से अनुमति मिलने के बाद नामकरण किया जाएगा।


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