बैकु΄ठपुर@न्याय करने वाले ही अन्याय के बने भागीदारःहर्षवर्धन राठौर

120
Share


कार्यवाही के आदेश में 10 साल लग गए….पुलिस को आदेश मिले 6 महीना बीत गया…कब होगी कार्यवाही?


4 कमरा बनने पर लगा स्थगन फिर भी अनावेदक ने 10 कमरे बना लिया…आखिर कार्यवाही कब होगी ?

रवि सिंह-


बैकु΄ठपुर 10 अक्टूबर 2021 (घटती-घटना)। नायब तहसीलदार ने बैकुंठपुर थाना प्रभारी को न्यायालय अवहेलना के विरुद्ध आरोपी पर कार्यवाही करने का आदेश दिया पर पुलिस ने 6 महीने बाद भी आरोपी के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध नहीं किया, पीडç¸त लगातार तहसील व थाना का चक्कर लगा रहा है पर नायब तहसीलदार पुलिस के पास जाने को बोल रहे हैं और पुलिस नायब तहसीलदार को लेकर आने को पीडç¸त को बोलकर चक्कर लगाने मजबूर कर रही है, पीडç¸त पिछले 10 साल से खाता बटवारा के प्रकरण के लिए तहसील का चक्कर लगा रहा है इन10 सालों में कई तहसीलदार आए और गए पर किसी ने भी पीडç¸त को न्याय दिलाने के लिए आगे आने का प्रयास नहीं किया, पीडç¸त तहसील न्यायालय के चक्कर लगाते लगाते थक चुका है पर पीçड़त की परेशानी समझने वाला कोई नहीं है, पीडç¸त अब तक पदस्थ सभी तहसीलदारों पर गंभीर आरोप लगा चुका है पीडç¸त का कहना है कि जब उसने खाते बंटवारे का प्रकरण लगाया था उस समय अनावेदक रमेश चंद्र साहू उसकी जमीन पर कब्जा कर घर बना रहा था, जिस समय उसने शिकायत की थी उस समय चार कमरे ही बने थे पर इस 10 साल में उसके निर्माण को रोकने के लिए पीçड़त ने तहसील कार्यालय में चक्कर लगा लगाकर लगातार मिन्नते भी की बावजूद इसके इस बीच स्थगन भी होता गया पर अनावेदक निर्माण करता गया निर्माण जारी रखता गया, 4 से 10 कमरे बन चुके हैं वह भी स्थगन के बावजूद, पर जब एफआईआर का न्यायालय ने आदेश दिया तो अब पुलिस का एफआईआर करने पशीने छुट रहे है।
पीçड़त हर्षवर्धन राठौर ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए जो आरोप लगाए और जो दस्तावेज दिखाए उससे तो ऐसा ही लगता है कि पिछले 10 साल में जो भी तहसीलदार, एसडीएम आये सभी ने इनके प्रकरण में अपना हाथ साफ किया और चलते बने। पीçड़त ने कहा कि मैं राजस्व विभाग के चक्कर लगाते-लगाते थक चुका हूं यहां तक कि परिवार के चार सदस्यों की इस बीच मृत्यु भी हो गयी है पर मामले का निराकरण नहीं हो सका है। पीçड़त का कहना है वह व उसके वारिसदार बेसहारा व बेघर हो चुके है और भगवान ना करें कि और किसी को राजस्व विभाग के चक्कर इसी तरह लगाना पड़े,पीçड़त का यह भी कहना है कि यह एक ऐसा विभाग है जहां पर सिर्फ आप चक्कर ही लगा सकते हैं पर न्याय की उम्मीद नहीं कर सकते, यहां न्याय के लिए प्रभाव व पैसों की जरूरत पड़ती है, पीçड़त ने कहा कि मेरा एक परिवारिक बंटवारे का मामला है जो पिछले 10 साल से मैं लड़ रहा हूं मैंने पूर्व के तहसीलदार से लेकर कई लोगों को न्यायालय में आरोपी भी बनाया। सभी पर मामला पंजीबद्ध है इसके बावजूद आज भी मैं तहसील कार्यालय का चक्कर लगा रहा हूं। जबकि मेरे प्रकरण में कमिश्नर ने पूर्व फर्जी बंटवारे को फांरसिक आधार पर निरस्त कर और खाते को पूर्व की स्थिति में करने का आदेश तहसीलदार बैकुण्ठपुर को वर्ष 2018 में कर दिया गया है, पर अभी भी खाता सही नहीं हुआ है और तत्कालीन तहसीलदार ऋचा सिंह ने लिखित आदेश दिया कि आपका खाता सही कर दिया गया है, पर यह खाता अब तक सही नहीं हुआ जिसके लिये पिçड़त ने कोरिया कलेक्टर को शिकायत देकर कहा कि इस प्रकरण में अब तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है। पिछले ढेड साल से वर्तमान तहसीलदार ऋचा सिंह के पीछे चक्कर काट रहा हूं यह भी पीçड़त ने कहा है। जबकि पिçड़त अपने पिता की फौती नामान्तरण चढ़ाने के लिये भी काफी परेशान हुआ और तहसीलदार ने काफी लम्बे समय घुमाने के बाद फावती नामान्तरण का कार्य किया।

नकल लेने के लिये भी घुमाया

प्रार्थी हर्षवर्धन राठौर ने बताया कि तहसील कार्यालय बैकुण्ठपुर में जितने भी प्रकरण चलते है उसमें नकल लेने का प्रावधान है पर नकल देने में भी तहसीलदार को तकलीफ होती है। प्रकरण जो भी चल रहे उसमें क्या कार्यवाही हुयी इसे जानने के लिये नकल के लिये आवेदन दिया जाता है तो आवेदन अस्वीकार कर दिया जाता है। जिस वजह से आवेदन को रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से भेजना पड़ता है। यदि इसके लिये हम आरटीआई लगाते है तो उसमें भी जानकारी देने के लिए सालों तक घुमाया जाता है।

स्थगन होने के बावजुद होता रहा निर्माण

प्रार्थी हर्षवर्धन राठौर ने बताया कि मेरे खाते की निजी भूमि पर मैंने पूर्व से ही स्थगन आदेश ले रखा था इसके बावजुद रमेश चन्द्र साहू द्वारा जबरन निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया गया जिस पर मैंने वर्तमान तहसीलदार ऋचा सिंह से दण्डात्मक कार्यवाही करने के लिये बार-बार प्रार्थना की इसके बाद भी पिछले साल भर से रमेश साहू न्यायालय के स्थगन आदेश की अवहेलना करते हुये निर्माण कार्य जारी रखा। प्रार्थी द्वारा कई बार तहसीलदार को न्यायालय के अवमानना का हवाला देते हुये दण्डात्मक कार्यवाही करने की गुहार लगायी। जिस पर तत्काल आदेश करने के बजाये फरवरी 2020 से इस प्रकरण को पेंडिग रखा गया। और इस बीच स्थगन होने के बावजुद निर्माण कार्य होते रहा। प्रार्थी हर्षवर्धन राठौर ने कहा कि मैंने जितना लिखा-पढ़ी की है जिसमें अनुविभागीय अधिकारी से लेकर कलेक्टर, कमीशनर तक शिकायत की है, फिर भी न्याय के लिये भटक रहा हूं। यह मैं कोई एक व्यक्ति नहीं तहसील में रोज की ऐसी कहानी सुनने और देखने को मिल जाती है यह भी पीçड़त का कहना है। दर्जनों अधिकारी, कर्मचारी के भ्रष्टाचार के सबूत लेकर घूम रहा हूं और जिम्मेदार अधिकारीयों को इसकी शिकायत भी की है इसके बावजुद इनके ऊपर कार्यवाही होने के बजाये उन्हें पदोन्नती से नवाजा जा रहा है।


Share