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बैकु΄ठपुर@न्यायालय भी देता है समाचार प्रकाशन पर स्वतंत्रता का अधिकार

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अधिवक्ता द्वारा समाचारों के प्रकाशन पर नोटिश जारी करना लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को बांधने का प्रयास…


प्राप्त शिकायतों…तथ्यों के आधार पर समाचार प्रकाशित करना अपराध नहीं…समाचारों के प्रकाशन पर किसी अधिवक्ता का अपने मुवक्किल की तरफ से नोटिस जारी करना गलत

रवि सिंह-


बैकु΄ठपुर 05 अक्टूबर 2021 (घटती-घटना)। आरटीआई एक्टिविस्ट व एसईसीएल के श्रमिक नेताओं द्वारा नौकरी में रहकर नेतागिरी व राजनीतिक दलों में पदाधिकारी बनकर काम करने के मामलें को लेकर शिकायतकर्ता चिरिमिरी कोरिया कालरी निवासी सत्यपूजन मिश्रा द्वारा एसईसीएल के चेयरमैन व क्षेत्रीय महाप्रबंधक को पत्र लिखकर ऐसे कर्मचारियों पर कार्यवाही की मांग की गई थी वहीं शिकायत में इस बात का उल्लेख था कि किस तरह एसईसीएल में बतौर कर्मचारी नियुक्त कुछ लोग चिरिमिरी क्षेत्र में राजनीतिक दल से जुड़कर श्रमिक नेता बनकर खुलेआम नेतागिरी कर रहें हैं और बिना काम किये ही वेतन उठा रहें हैं वहीं शिकायतकर्ता ने यह भी शिकायत की थी कि किस तरह ऐसे श्रमिक नेता श्रमिको के अधिकारों की बात कर खुद तो बिना काम वेतन उठा रहें हैं वहीं काम के समय नेतागिरी कर रहें हैं और कोयला की तस्करी में भी संलिप्त हैं।
शिकायतकर्ता व आरटीआई एक्टिविस्ट की शिकायत की प्रति जब अखबार समूह के पास पहुंचती है तो अखबार निष्पक्षता से शिकायत पत्र के आधार पर खबर प्रकाशित करता है जिसका आधार भी शिकायतकर्ता का शिकायत पत्र होता है वहीं खबर प्रकाशन से नाराज होकर श्रमिक नेता का तमगा लगाकर अपना मूल कर्तव्य नहीं निभाने वाले लोग समाचार से आक्रोशित होकर वकीलों की शरण मे जातें हैं और समाचार के विरुद्ध संपादक व संवाददाता को अधिवक्ता के माध्यम से वैधानिक नोटिश जारी करवाते हैं। इन सभी विषयों के बीच दो बातें महत्वपूर्ण हो जाती हैं जिसमें एक तरफ खबर से आक्रोशित श्रमिक नेता का आक्रोश है और वह जायज भी है क्योंकि सच सुनने की क्षमता शायद उनमे न रही हो वहीं विडंबना यह कि उनके अधिवक्ता अपने मुवक्किल के लिए लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के संपादक व संवाददाता को ही वैधानिक नोटिश जारी कर एक तरह से बांधने का प्रयास करते नजर आते हैं जबकि शायद उन्हें भी नहीं मालूम उनका वैधानिक नोटिश स्वमेव निरस्त भी हो सकता है। तथ्यों व शिकायत पत्र के आधार पर समाचार प्रकाशित करने का अधिकार समाचार प्रकाशित करने का दायित्व निभाने वाले लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के किसी भी प्रहरी के पास सदैव उपलब्ध रहने वाला अधिकार है वहीं वह इससे खुद को वंचित भी नहीं रखना चाहेगा। चंद शुल्क प्राप्ति की लालसा में किसी के अधिकारों से ही उसको वंचित करने का यह नोटिश स्वरूप का हथियार कहीं इसे चलाने वाले पर ही उल्टा प्रहार करने वाला न साबित हो जाये यह ऐसा करने से पहले सोचना ऐसे लोगों के लिए जरूरी। लोकतंत्र में चौथे स्तंभ का अधिकार मिला हुआ है स्वतंत्र होकर निष्पक्ष होकर समाचार प्रकाशन का वह समाचार प्रकाशित करने का दायित्व निभा रहा संपादक व संवाददाता निभाता रहेगा वहीं ऐसे किसी नोटिश का जवाब भी दिया जाता रहेगा जो सच को जुठ के बल पर दबाने के प्रयासों वाला होगा।

बार एसोसिएशन में शिकायत की जानी चाहिए

मामले में कुछ संपादकों व संवाददाताओं का कहना है कि ऐसे अधिवक्ताओं का जो समाचारों के प्रकाशन पर नोटिश जारी कर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को बाधित करने का प्रयास कर रहें हैं कि शिकायत बार एसोसिएशन में की जानी चाहिए, वहीं इसके लिए तैयारी किये जाने की बात भी रखी।

केरल उच्च न्यायालय ने समाचारों के प्रकाशन की स्वतंत्रता पर 2020 में दिया था फैसला

संपादक व संवाददता के विरुद्ध दर्ज एक मामले में 2020 में केरल उच्च न्यायालय का स्पष्ट आदेश जारी करते हुए प्रकरण को ही निरस्त कर दिया गया था जिसमें समाचार के प्रकाशन पर कार्यवाही की मांग की गई थी,माननीय केरल के उच्च न्यायालय ने फैसला दिया था कि संपादक संवाददाता किसी तथ्य या शिकायत पर समाचार प्रकाशन के लिए स्वतंत्र हैं और उनका यह अधिकार किसी आरोप को जो समाचारों से सम्बंधित हो से जोड़कर बांधा नहीं जा सकता।
शिकायत हुई है जांच चल रही है जांच में क्या आया है इसकी जानकारी नहीं है और कब तक जांच पूरी होगी यह अभी कह नहीं सकते जांच में जो आएगा उसके अनुसार कार्यवाही होगी।
नंद कुमार राय
सह क्षेत्र प्रबंधक ओसीपी

मेरी जानकारी में नहीं है यदि जांच के लिए आया है तो जिसे मार्क किया गया होगा वह जांच कर रहा होगा मैं पता करवाता हूं, उनका लड़का कोयले के काम में है पर वह भी इसमें सम्मिलित है इसकी जानकारी मुझे नहीं है।
घनश्याम सिंह
महाप्रबंधक एसईसीएल चिरमिरी


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