पल्स ऑक्सीमीटर के नाम पर जमकर लूट

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सांठगांठ से एक ही सप्लायर ने की सप्लाई

राजा मुखर्जी-

कोरबा 27 सितम्बर 2021 (घटती-घटना)। कोरोना काल मे मरीजो की जान बचाने एक ओर समाज सेवी आगे बढ़कर लोगो को हरसंभव मदद करने मे तत्पर रहे तो वहीं दूसरी ओर स्वास्थय विभाग कोरबढ्ढ के द्वारा मरीजो की सुविधाओं में विस्तार के नाम पर जमकर लूट की गई । कोरोना काल का वो भयावह दृश्य , जब लोगों की जान बचाने हर कोई एक दूसरे की मदद करते हुए मानवता का परिचय दे रहा था,लेकिन स्वास्थय विभाग जो मरीजो की सेवा कम बल्कि कमाई करने में ज्यादा जुटा था। कोरोना काल में स्वास्थ्य विभाग ने अति आवश्यक समान पल्स ऑक्सीमीटर तीन हजार नग की खरीदी की । महामारी की आड़ लेकर सोची समझी रणनीति के तहत खनिज न्यास मद से शहर में प्रतिष्टित मेडिकल फर्म्स की कई दुकानें होने के बढ्ढद भी एक ही सप्लायर को, जिस के पास कभी स्वास्थ्य विभाग में सप्लाई करने का अनुभव ही नहीं था, उसे ही 38 लाख 70 हजार रूपये का वर्क ऑर्डर दे कर वारा न्यारा कर डाला। आर. टी.आई .से मिली जानकारी के मुताबिक मेडिकल दुकानों पर 3 सौ रुपये में मिलने वाली ऑक्सिमिटर को स्वास्थ्य विभाग ने 12 सौ 90 में खरीदी कर आम आदमियों को आहत किया है। सुविधा बढ़ाने के नाम पर जिस प्रकार का भ्रष्टाचार कोरबा के स्वास्थ्य विभाग में हुआ , वो शायद ही किसी और जिले में हुआ होगा।कोरोना काल में मरीजों के लगातार घट रहे ऑक्सीजन लेवल को मापने के लिए बाजार में पल्स ऑक्सीमीटर उपलब्ध था। हॉस्पिटल में भर्ती मरीजों और होम आइसोलेट हुए मरीजों के ऑक्सीजन लेबल को मापने के स्वास्थ्य विभाग ने 38 लाख 70 हजार रूपये का ऑक्सीमीटर खरीद डाला वो भी बाजार भाव से लगभग कई गुना दाम पर, जबकि हकीकत यह है कि होम आईसोलेट में रह रहे मरीजों ने ने स्वयं के संसाधन से कोरोना के लिए उपयोग होने वाली कीट की खरीदी की थी। सवाल यह उठता है कि जब मरीज अपने पैसे से ऑक्सीमीटर खरीद कर पल्स नाप रहे थे तो स्वास्थ्य विभाग के तीन हजार नग ऑक्सीमीटर कंहा गए ?।
मनीष राठौर (आर. टी.आई. कार्यकर्ता) नें कहा कि स्वास्थ्य विभाग ने सामग्री की खरीदी की तो इसे वितरण कंहा किया , क्योंकि आइसोलेशन में रहने वाले मरीजो को अपने स्वयं के खर्च पर सारा सामान खरीदना पड़ रहा था। कुल मिलाकर कर बीमारी का फायदा उठाकर स्वास्थ्य विभाग ने कागजो पर खरीदी कर अपने चहेते ठेकेदार को रकम दान में दे दी।”कोरोना काल को अवसर में तब्दील करते हुए स्वास्थ्य विभाग सप्लायर के साथ साठगांठ कर खुले बाजार में मिलने वाली 3 सौ रुपये के ऑक्सिमिटर को 1290 रुपये में सप्लायर को ऑर्डर देना एव खरीदना कई सवालों की ओर इंगित करता है.


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