विधायक समर्थकों ने लाया अविश्वास प्रस्ताव तो भाजपाइयों ने दिलाया स्थगन

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मामला ग्राम पंचायत चिरगुड़ा का…अविश्वास प्रस्ताव के तहत हटाए गए सरपंच को कोरिया कलेक्टर से मिला स्थगन

रवि सिंह-


बैकु΄ठपुर 24 सितम्बर 2021 (घटती-घटना)। ग्राम पंचायत चिरगुड़ा के अविश्वास प्रस्ताव के तहत हटाए गए सरपंच को न्यायालय माननीय कलेक्टर जिला कोरिया से अविश्वास प्रस्ताव के विरुद्ध मिला स्थगन, विदित हो कि उक्त ग्राम पंचायत की महिला सरपंच संगीता सिंह को विगत 13 सितंबर 2021 को ग्राम पंचायत के निर्वाचित पंचों ने अविश्वास प्रस्ताव पारित कर सरपंच पद से हटा दिया था। जिसके विरुद्ध सरपंच संगीता सिंह ने अविश्वास प्रस्ताव के क्रियान्वयन को चुनौती देते हुए माननीय कलेक्टर महोदय जिला कोरिया के समक्ष अपनी याचिका प्रस्तुत की थी। जिस पर सुनवाई करते हुए कलेक्टर महोदय ने सुविधा का संतुलन अपीलार्थी के पक्ष में पाते हुए पंचायत द्वारा पारित अविश्वास प्रस्ताव के क्रियान्वयन पर प्रकरण के निराकरण तक रोक लगा दी है। यह मामला काफी सुर्खियों में चला आ रहा था क्योंकि सरपंच को अविश्वास प्रस्ताव द्वारा हटाने के लिए पंचों को बहुतायत रुपए पैसे देने की एवं अविश्वास प्रस्ताव के आवेदन देने के साथ ही सभी पंचों के एक साथ लगभग 1 सप्ताह तक गायब रहने की बात सामने आई थी। बाद में सूत्रों से ज्ञात हुआ कि गायब रहने वाले पंचों को 1 सप्ताह तक विभिन्न स्थलों (अमृतधारा, अमरकंटक) वगैरह की सैर कराई गई, उनके महंगे होटलों में रुकने का इंतजाम, आवभगत और सेवा सुश्रुषा की गई।
जिस प्रकार अविश्वास प्रस्ताव पारित होते ही सोशल मीडिया पर जनपद पंचायत बैकुंठपुर के उपाध्यक्ष एवं उनके समर्थकों के पोस्टरों की बौछार हुई आतिशबाजी की गई एवं मिठाइयां बांटी गई, उससे आम जनमानस द्वारा यह सहज ही अंदाजा लगाया गया कि सरपंच को हटाने के लिए एड़ी चोटी का जोर जनपद उपाध्यक्ष के द्वारा ही लगाया गया था। सरपंच संगीता सिंह के द्वारा यह भी बताया गया कि अविश्वास प्रस्ताव के पूर्व दिवस उन्होंने अपने पति के साथ जनपद उपाध्यक्ष पति से मुलाकात कर अपना पक्ष रखकर सहयोग की अपील भी की थी, परंतु उन्होंने स्पष्ट कह दिया कि तुमने बहुत देर कर दी। अगर मेरे हिसाब से चलते तो यह नौबत नहीं आती। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मुझे पद से निष्कासित करने के लिए जनपद उपाध्यक्ष के पति का ही पूरा हाथ है। जिस प्रकार अविश्वास प्रस्ताव के दिन उनके नुमाइंदों ने अपनी गाडç¸यों से पंचों को मतदान स्थल तक लाना ले जाना किया,मतदान के पूर्व उपाध्यक्ष के घर पर पंचों की मीटिंग रखी गई, अविश्वास प्रस्ताव के पारित होते ही उनके घर के सामने आतिशबाजी की गई, मिठाइयां बांटी गई, सभी पंचों को पार्टियां दी गई, यह बताने की जरूरत नहीं कि यह सब किसके इशारे पर हुआ।

ठेकेदारी और कमीशन खोरी के लिए मना किया इसलिए यह स्थिति आई

अविश्वास प्रस्ताव द्वारा हटाई गई सरपंच श्रीमती संगीता सिंह ने स्पष्ट कहा पंचायत में रसूखदार लोगों को ठेकेदारी एवं मैटेरियल सप्लाई के लिए स्पष्ट रूप से मना करना तथा किसी भी कार्य में कमीशन देने से इनकार किए जाने के कारण ही पंचों की खरीद-फरोख्त कर,भय उत्पन्न कर एवं दबाव डालकर उन्हें सरपंच पद से हटाया गया था। यदि मैं भी भ्रष्टाचार में लिप्त रहती तो यह नौबत नहीं आती। उन्होंने यह भी कहा कि पंचायत के निवासियों एवं कुछ पंचों से जानकारी प्राप्त हुई है कि अविश्वास प्रस्ताव में भाग लेने वाले पंचों को 30000 की राशि दी गई है। परंतु वे भयवश सामने आकर कुछ बोलने की स्थिति में नहीं है।

जनपद उपाध्यक्ष केवल नाम की,हर कार्य में हस्तक्षेप है शिक्षक पति का

नारी सशक्तिकरण के दौर में जहां निर्वाचन आयोग भी महिलाओं की भागीदारी के लिए आरक्षण की सीमा तय कर रहा है, वहीं निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों का हाल किसी से छुपा नहीं है। अधिकांश महिला जनप्रतिनिधि केवल रबर स्टांप बन कर रह जाती हैं। कुछ यही हाल बैकुंठपुर जनपद पंचायत की महिला उपाध्यक्ष का है। जहां उनके क्षेत्राधिकार के प्रत्येक कार्य में उनके सरकारी शिक्षक पति का पूरा हस्तक्षेप है। खुलेआम नेतागिरी, ठेकेदारी एवं अन्य ऐसे राजनीतिक कार्य, राजनीतिक कार्यक्रम जो किसी सरकारी कर्मचारी को नियमानुसार नहीं करने चाहिए, वहां पूरा पूरा उपाध्यक्ष पति का दखल रहता है। प्रशासन मौन साधे हुए है, विपक्ष आंख मूंदे पड़ा है। जबकि यह सब की जानकारी में है कि शासकीय कर्मचारी किसी भी परिस्थिति में राजनीतिक दल के कार्यक्रमों में शिरकत नहीं कर सकता।

ग्राम पंचायत छिंदिया एवं रामपुर के जनप्रतिनिधियों ने भी जताई आशंका

ग्राम पंचायत चिरगुडा¸ में अविश्वास प्रस्ताव पारित कर सरपंच को हटाने के बाद ग्राम पंचायत रामपुर एवं छिंदिया के जनप्रतिनिधियों ने भी ऐसी आशंका व्यक्त की है कि उनके खिलाफ भी पद से हटाने की साजिश की जा सकती है,क्योंकि उन्होंने भी अपने-अपने पंचायतों में भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी को पूरी तरह से रोक कर रखा है और उपाध्यक्ष पति को किसी भी कार्य में हस्तक्षेप करने नहीं दे रहे हैं।

जनपद उपाध्यक्ष व उनके पति हैं विधायक के सबसे करीबी

बैकुंठपुर जनपद पंचायत उपाध्यक्ष व उनके पति बैकुंठपुर विधायक के सबसे खास माने जाते हैं वहीं इनका हर स्थिति में साथ देना विधायक की मजबूरी है। चिरगुड़ा पंचायत अविश्वास मामले में भी जब अब सरपंच को स्थगन मिल गया है कहीं न कहीं छवि विधायक की धूमिल हुई और जिसका कारण ग्राम पंचायत में ठेकेदारी बनी।

ग्रामवासी उत्साहित

चिरगुड़ा ग्राम पंचायत के लोग सरपंच को अविश्वास के खिलाफ स्थगन मिलने से उत्साहित व खुश हैं क्योंकिं उनका मानना है सरपंच का कार्यकाल सही चल रहा था और जिसे ठेकेदारी करने की छूट पाने के लिए हटाया जा रहा था, जबकि सरपंच को सीधे जनता ने चुना है।


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