बैकुण्ठपुर@कोरिया निकाय चुनावों में मिली हार के बाद विधायक व जिलाध्यक्ष पर कार्यवाही का इंतजार

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विधायक का संसदीय सचिव पद व जिलाध्यक्ष की जिलाध्यक्षी जाएगी या बचा ली जाएगी?,राजीव भवन में होगी बैठक आज

रवि सिंह –
बैकुण्ठपुर 5 जनवरी 2022 (घटती-घटना)। कोरिया जिले की दो नगरपालिकाओं में संपन्न हुए नगरपालिका चुनावों में सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी ने बहुमत के बावजूद जिला मुख्यालय की नगरपालिका में अध्यक्ष पद की कुर्सी गवां दी वहीं शिवपुर चरचा नगरपालिका में उपाध्यक्ष पद की कुर्सी से सत्ताधारी दल को हांथ धोना पड़ा और भाजपा बिना बहुमत दोनों ही पालिकाओं में एक जगह अपना अध्यक्ष और एक जगह अपना उपाध्यक्ष बना ले गई। सत्ताधारी दल को जिस तरह पराजय का मुंह देखना पड़ा वह केवल नगरपालिका चुनावों के दौरान ही घटित आपसी तालमेल या असामंजस्य की वजह से घटित घटना रही ऐसा अब खुद कांग्रेसी ही मानने को तैयार नहीं हैं कांग्रेसियों का कहना है कि जो कुछ हुआ उसकी पटकथा विधानसभा चुनावों के बाद से ही लिखी जानी शुरू कर दी गई थी। बैकुंठपुर में सत्ता व संगठन की जुगलबंदी कुछ ऐसी चलती आई कि विधायक व जिलाध्यक्ष के अलावा कांग्रेस पार्टी के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी या कार्यकर्ता सत्ता व संगठन से दूर होते चले गए और केवल दो ही लोगों ने विधानसभा में कांग्रेस की कमान सम्हाल ली और सभी निर्णय भी स्वयं ही लेने लगे। कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ पुराने पदाधिकारियों को न तो किसी विषय पर कभी राय मशविरा के लिए बुलाया जाने लगा और न ही उन्हें जिम्मेदारियों से ही जोड़ने का प्रयास किया गया। इन कारणों से सत्ता और संगठन की विधायक व जिलाध्यक्ष की जुगलबंदी तो बेहतर जारी रही वरिष्ठ कांग्रेसी सहित कांग्रेस के वरिष्ठ कार्यकर्ता पार्टी से दूर होते गये और अंततः पार्टी को आज नगरपालिका चुनावों में अप्रत्याशित परिणाम भुगतना पड़ा। बैकुंठपुर विधायक ने भी पदाधिकारियों सहित कार्यकर्ताओं को तवज्जो देने से परहेज रखा कइयों को तो उन्होंने कुछ ऐसा भी कहा कि लोगों ने जाना ही छोड़ दिया और पार्टी असंगठित होती चली गई, उधर विधायक का जरूरत से ज्यादा समय तक मुख्यालय से बाहर रहना भी कार्यकर्ताओं को सालता रहा और कार्यकर्ता भी भूल गए कि विधायक सत्ताधारी दल की हैं और उनके लिए हैं वहीं जिलाध्यक्ष अपने व्यवसाय और अपनी काबिज सरकारी भूमि को किसी तरह शासकीय अनुदानों से बेहतर करने में लगे रहे और पार्टी को नुकसान हो रहा है उन्होंने इस ओर कभी ध्यान देना उचित नहीं समझा।

आज पहुंचेंगे प्रदेश कांग्रेस कमेटी से नियुक्त जांच समिति के सदस्य

बैकुंठपुर व शिवपुर चरचा नगरपालिका चुनावों में बैकुंठपुर नगरपालिका में अध्यक्ष पद पर कांग्रेस को बहुमत से भी ज्यादा पार्षदों के मत होने के बावजूद व नगरपालिका शिवपुर चरचा में भी बहुमत से भी ज्यादा पार्षदों के कांग्रेस के साथ होने के बावजूद मिली हार को लेकर छतीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस प्रभारी पी एल पुनिया व मुख्यमंत्री के साथ साथ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मोहन मरकाम ने अपनी अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर कर दी थी और उनकी नाराजगी से जाहिर हो गया था कि वह किसी भी स्थिति में दोनों ही नगरीय निकायों की हार को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जो भी इस हार के कारण हैं वह चाहे कोई भी उनपर कार्यवाही तय जरूर होगी। प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा पूरे मामले को लेकर जांच कमेटी का गठन भी तत्काल कर दिया गया और कमेटी जल्द जांच कर अपनी रिपोर्ट भी प्रस्तुत करेगी। जांच दल में शामिल सदस्य व समिति का नेतृत्व कर रहे बोधराम जी कंवर आज इसी संबंध में जिला मुख्यालय स्थित राजीव भवन पहुंच रहें हैं और वह साथ ही समिति में शामिल लोगों द्वारा दोनों ही नगरपालिकाओं के समस्त कांग्रेसी पार्षदों का बयान लिया जाएगा और साथ ही कांग्रेस के जिम्मेदार लोगों से भी बात करेंगे और पूरी रिपोर्ट प्रदेश कार्यालय को सौपेंगे।

सत्ता और संगठन से कार्यकर्ताओं को रहती है उम्मीद

किसी भी राजनीतिक दल यदि सत्ता में है तो उसके पदाधिकारियों सहित कार्यकर्ताओं को उम्मीद रहती है कि उनकी परेशानियां हल होगीं और उनको भी बेहतर कुछ लाभ मिलेगा और वह भी अपनी सरकार में कुछ कर सकेंगे। बैकुंठपुर के कार्यकर्ताओं की भी यही सोच थी जो अब उनकी सोच में भी नहीं है।

कार्यवाही का है इन्तेजार

कोरिया जिले कि दोनों नगरपालिकाओं में हार वह बहु बहुमत के बावजूद की वैसे तो विधायक सहित जिलाध्यक्ष को स्वयं से नैतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए लेकिन विधायक हार के बाद से ही पलायन कर चुकी हैं विधानसभा से बाहर हैं वहीं जिलाध्यक्ष भी मौन हैं शांत हैं ,लेकिन कांग्रेस के ही अंदरखाने यह चर्चा जारी है कि विधायक सहित जिलाध्यक्ष पर कार्यवाही होनी चाहिए।

विधायक का संसदीय सचिव और जिलाध्यक्ष की जिलाध्यक्षी को लेकर कार्यवाही की उम्मीद

जिले की दोनों नगरपालिकाओं में हार की नैतिक जिम्मेदारी भले ही विधायक और जिलाध्यक्ष न लें लेकिन माना जा रहा है कि विधायक का संसदीय सचिव पद और जिलाध्यक्ष की जिलाध्यक्षी खतरे में है और कार्यवाही हो सकती है।


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