कोरबा@शासकीय भूमि में फिर फैलने लगा लाल ईंट का अवैध कारोबार

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कवरेज करने पर मीडिया कर्मियों को दी फंसाने की धमकी

  • राजा मुखर्जी-
    कोरबा 20 नवम्बर 2021 (घटती-घटना)। जिम्मेदार विभागों, अधिकारियों के संरक्षण की वजह से शहर से महज 5 किलोमीटर की दूरी पर एसईसीएल की मानिकपुर खदान से लगे ग्राम ढेलवाडीह के जंगलों में गौण खनिज का दोहन कर बेख़ौफ अवैधानिक लाल ईंट का कारोबार एक बार फिर फलने लगढ्ढ है । इस धंधे में लगे लोगों के अधिकारियों के संरक्षण की वजह से इस कदर हौसले बुलंद हैं कि बड़े पैमाने पर मानिकपुर खदान से चोरी का कोयला ईंट भट्टे में खपाया जा रहा है।यहाँ बताना होगा कि जिला मुख्यालय से महज 5 किलोमीटर की दूरी पर लगे ग्राम पंचायत ढेलवाडीह की नजूल एवं वन भूमि में जंगलों में बड़े पैमाने पर प्रतिबन्धित लाल ईंट का कारोबार पिछले कुछ वर्षों से चल रहा है । कुम्हार जाति की आड़ में केवल अपनी आवश्यकताओं के लिए नहीं वरन व्यवसायिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए लाखों नग ईंट तैयार किया जा रहा है। बकायदा इस कार्य के लिए बाहर से मजदूर भी बुलाए गए है । गत वर्ष हल्का पटवारी ने कोरोनाकाल में कोविड पॉजिटिव होते हुए भी राजस्व विभाग के अधिकारियों को इसकी सूचना दी थी । जिसके आधार पर तत्कालीन नायब तहसीलदार एम एस राठिया ने टीम के साथ बेंदरकोना सहित ढेलवाडीह में छापामारी की थी । इस दौरान 27 लोगों से 45 लाख नग लाल ईंट छतीसगढ़ खनिज नियमावली 1996 के तहत प्रकरण दर्ज कर कोटवार के सुपुर्द किया गया था, जिसमें ढेलवाडीह से सर्वाधिक 15 लाख नग लाल ईंट जब्त किया गया था। बरसात का सीजन जाने के बाद भवन निर्माण कार्यों में तेजी आते ही एक बार फिर यहां लाल ईंट का कारोबार शुरू हो गया है। वहीं लाखों नग के ईंट भट्ठे रचाए जा रहे। धड़ाधड़ ईंट बनाने का कार्य जारी है,साथ ही बेख़ौफ ईंट का परिवहन का कार्य भी जारी है।शासकीय भूमि में लाल ईंट का कारोबार करने वाले लोगों को न किसी जांच का भय है,न मीडिया की परवाह,अब देखना यह होगा, कि जिम्मेदार विभाग इस पर क्या कार्यवाही करती है ?

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