अम्बिकापुर@रिंग रोड में 94 करोड का घोटाला,न्यायालय में परिवाद पेश

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अम्बिकापुर 07 अक्टूबर 2021 (घटती-घटना)। डीके सोनी अधिवक्ता एवं आरटीआई कार्यकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज तिवारी ने अंबिकापुर में बने रिंग रोड के मामले में ठेकेदार एवं अधिकारियों के विरुद्ध प्रथम सूचना पत्र करने हेतु धारा 156/3 के तहत मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी अंबिकापुर के न्यायालय में 5000 पेजो के दस्तावेज के साथ परिवाद प्रस्तुत किया गया था। जिसमें घोटाला, गड़बड़ी, फर्जीवाड़ा करने काफी घटिया एवं गुणवत्ता विहीन स्टीमेट एवं ड्राइंग डिजाइन के विपरीत तथा वर्क आर्डर आदेश से ज्यादा राशि का भुगतान करने तथा शासकीय राशि का गबन करने का का मामला प्रस्तुत किया गया है। लोक निर्माण विभाग मंत्रालय रायपुर द्वारा सड़क विकास निगम लिमिटेड रायपुर को अंबिकापुर रिंग रोड के सुदृढ़ीकरण एवं उन्नयन कार्य के लिए 9757.49 लाख रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई थी। जिसके उपरांत छत्तीसगढ़ रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड रायपुर द्वारा किशन एवं कंपनी श्री टावर, फर्स्ट फ्लोर शांति नगर रायपुर को अंबिकापुर रिंग रोड के निर्माण हेतु वर्क आर्डर जारी किया गया था। रिंग रोड को 0 किलोमीटर से 10.808 किलोमीटर तक का रोड निर्माण करना था, जिसके लिए श्री किशन एंड कंपनी को 1 वर्ष की समय अवधि प्रधान की गई थी। तथा वर्क आर्डर 70,60,06,250 रुपए स्वीकृत की गई थी। अंबिकापुर के रिंग रोड निर्माण प्रारंभ हुए लगभग 3 वर्ष से काफी समय हो गया और ठेकेदार की समयावधि के अंदर कार्य पूर्ण नहीं कराया गया था। उक्त कार्य श्री किशन एंड कंपनी को दिया गया था लेकिन श्री किशन एंड कंपनी के द्वारा स्वयं कार्य न करके उक्त रिंग रोड को पेटी कॉन्ट्रैक्ट पर सूरजपुर के ठेकेदार शंकर अग्रवाल प्रो0 जगदंबा कंस्ट्रक्शन को दे दिया गया था। जिसके कारण भी उक्त कार्य काफी घटिया स्तर का कराया गया है एवं जो ड्राइंग्स डिजाइन स्वीकृत हुई थी उसके अनुसार कार्य नहीं किया गया है।
अंबिकापुर रिंग रोड के लिए जो प्रशासकीय स्वीकृति की गई है तथा किस-किस कार्य को करना है उसकी जानकारी सूचना के अधिकार के तहत आवेदक को दिनांक 3/10/2019 को प्राप्त हुई है जिसमें सभी कार्यों का उल्लेख तथा उक्त कार्य के लिए कितनी राशि लगाना है का भी उल्लेख किया गया है उक्त कार्य जो स्वीकृत हुए हैं उनमें से बहुत से कार्य ठेकेदार द्वारा अधिकारियों से मिलकर रिंग रोड में नहीं कराया जिसका मौके पर भौतिक सत्यापन करने से स्पष्ट हो जाएगा इसमें भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता नहीं होने का लेख किया गया है। उक्त रिंग रोड बनने से दुर्घटना की कमी होगी का भी उल्लेख किया गया है इसके अलावा रोड को 4 वर्ष तक देख-रेख करना है पूर्ण होने के बाद से लेकिन अभी कार्य पूरा हुआ नहीं है और रिंग रोड की हालत खराब हो गई है। उसके संबंध में जांच कर दोषी के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध किया जाना आवश्यक है। क्योंकि शासकीय राशि का गबन करना अपराधिक कृत्य की श्रेणी में आता है।

शासकीय राशि का खुले रुप से गबन,मामला रिंगरोड निर्माण का

अंबिकापुर के रिंग रोड निर्माण के लिए विभाग द्वारा ठेकेदारों को दिनांक 4/10/2019 तक कुल 94,08,56,752/- करोड रुपए का भुगतान किया जा चुका है जबकि वर्क आर्डर 70,60,06,250/-रुपए स्वीकृत किया गया था और भुगतान 94,08,56,752/- करोड़ रुपए का कर दिया गया जोकि 23,48,50,502/-रुपए का अधिक भुगतान अधिकारियों से मिलीभगत कर किया गया है तथा शासकीय राशि का खुले रूप से गबन है जो कि एक अपराधिक कृत्य है इसलिए संबंधित के विरुद्ध प्रथम सूचना दर्ज किए जाने का आवेदन दिया गया है।

नाली के ऊपर दिखा दिया गया फुटपाथ

ठेकेदार द्वारा रिंग रोड में जो कार्य नहीं कराया गया है और उसकी राशि निकाल ली गई है जैसे रिंग रोड के दोनों तरफ 3.5-3.5 फीट का फुटपाथ बनाना था मौके पर नहीं बनाया गया है उसके लिए 5 करोड़ 27 लाख का प्रावधान था उसे भी ठेकेदार निकाल लिया है तथा नाली के ऊपर फुटपाथ दिखाया गया है जबकि ड्राइंग डिजाइन में नाली अलग है, फुटपाथ अलग है उसकी राशि निकाल ली गई है। स्टीमेट के अनुसार सड़क नहीं बनाया गया है जिसके कारण गाड़ी चलने पर लहरा रही है तथा बराबर लेबल नहीं किया गया है। और घटिया काम करा कर पूरा पैसा निकाल लिया गया है। जितनी मोटाई की ढलाई सड़क की करनी थी वह नहीं किया गया है स्टीमेट के अनुसार जितनी ढलाई करनी थी वह नहीं किया गया है। स्टीमेट के अनुसार 8 कलवर्ट बॉक्स का निर्माण होना था, 9 बड़े जंक्शन का प्रावधान था, 20 छोटे जंक्शन भी बनने का प्रावधान था जो कि मौके पर नहीं बनाया गया है उसकी राशि भी निकाल ली गई है। जो नाली बनाया गया है वह काफी घटिया बनाया गया है क्योंकि बहुत जगह नाली की जो ढलाई की गई है वह दब गया है तथा कभी भी दुर्घटना हो सकता है। रिंग रोड से पानी की निकासी की व्यवस्था सही तरीके से प्रावधान के अनुसार नहीं किया गया है जिसके कारण रिंग रोड बरसात में स्विमिंग पूल बन जाता है तथा रिंग रोड के आसपास के घरों में पानी भर जाता है। उक्त कार्य में भी ठेकेदार द्वारा काफी राशि की चोरी की गई है।
स्टील रेलिंग बनाने का
था प्रावधान
रिंग रोड में स्टील रेलिंग बनाने का प्रावधान किया गया है जिसके लिए 52,36,000 आवंटित था तथा उक्त राशि भी बिना कार्य कराएं निकाल लिया गया। रिंग रोड के साइड के दीवारों में पेंटिंग करने का भी प्रावधान था जो नहीं कराया गया है। रिंग रोड के डिवाइडर को 80280 रनिंग मीटर बनाना था हर 25 मीटर पर 366 जगह सपोर्ट बिम डालना था जिसका साइज 70 सेंटीमीटर 20*15 देना था उसके लिए 13980191 का प्रावधान था उक्त राशि भी बिना कार्य कराए निकाल लिया गया है।

डिवाइडर में 65 लाख का करना था पौधारोपण

रिंग रोड डिवाइडर में 65 लाख का पौधारोपण करना था जो नहीं किया गया है। रिंग रोड के पार्थवे के दोनों साइड फुल,झडç¸यां, पौधारोपण करना था इसके अलावा 14624 मीटर हेज लगाना था जिसके लिए 24,56,832/-रुपए का प्रावधान था उक्त कार्य भी नहीं किया गया है। पूरे रिंग रोड में नीम, शीशम, बरगद, पाम, हास्टोनिया जैसे पौधे ऑर्गेनिक करके लगाना था इसके अलावा डेकोरेटिव पौधे भी लगाने का प्रावधान था उपरोक्त सभी पौधों के लिए लगभग 3-4 करोड रुपए की राशि ठेकेदार द्वारा निकाली गई लेकिन मौके पर पौधारोपण नहीं किया गया। रिंग रोड में 5 मूर्ति, 5-7 फीट की, तथा 120 मूर्ति 2-5 फीट की लगाने का प्रावधान था लेकिन एक भी मूर्ति कहीं भी ठेकेदार द्वारा नहीं लगाया गया इसके अलावा 1.5 किलोमीटर में सीमेंट आर्ट का भी काम करना था लेकिन मौके पर नहीं कराया गया उपरोक्त कार्य की राशि भी निकाल ली गई। रिंग रोड में लगे लाइट हेतु करोड़ों रुपए का प्रावधान दिया गया है और 2 वर्ष की गारंटी का भी प्रावधान है लेकिन मौके पर घटिया लाइट लगाया गया है जो बहुत से लाइट अभी भी नहीं जलते हैं उपरोक्त लाइट की भी पूरी राशि निकाल ली गई है। रिंग रोड के चौक चौराहे में सात जगह ट्रैफिक सिग्नल लगाना था जिसके लिए 93 लाख 80 हजार रुपए का प्रावधान दिया गया है तथा उसका 10 साल तक उसका मेंटेनेंस भी करने का प्रावधान दिया गया है लेकिन मौके पर सिग्नल लाइट बहुत जगह नहीं लगाया है तथा जहां लगाया गया है वह भी खराब पड़े हैं।

सुनवाई हेतु पैसे की तिथि 12 अक्टूबर को

उपरोक्त तथ्यों के अलावा अन्य तथ्यों का उल्लेख शिकायत आवेदन थाना अम्बिकापुर में तथा पुलिस अधीक्षक सरगुजा को किया गया था लेकिन थाना अम्बिकापुर और पुलिस अधीक्षक द्वारा कोई कार्यवाही नहीं करने के कारण वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज तिवारी के माध्यम से डीके सोनी अधिवक्ता ने ठेकेदार तथा रिंग रोड निर्माण में संलग्न सभी अधिकारियों के विरुद्ध शासकीय राशि का षडयंत्र पूर्वक योजनाबद्ध तरीके से गबन करने के संबंध में पहली बार 5000 पेजों के साथ धारा 156/3 के तहत मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के न्यायालय में अपराध पंजीबद्ध किए जाने हेतु दिनाक 7/10/21 को आवेदन प्रस्तुत किया गया है जिसमे दिनाक 12/10/21 को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी महोदय अंबिकापुर के न्यायालय में सुनवाई हेतु पेशी तिथि निर्धारित की गई है।


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