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कोरिया/सूरजपुर@किसके पैरवी पर तहसीलदार संजय राठौर को बिना विभागीय जांच पूर्ण किए बैकुंठपुर में पदस्थ किया गया?

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-ओंकार पाण्डेय-
कोरिया/सूरजपुर 13 सितम्बर 2025 (घटती-घटना)। राजस्व विभाग में दोषपूर्ण कार्यवाही करने वाले अधिकारी को संरक्षण मिलना ही इस बात का तरफ इशारा करता है कि राजस्व विभाग से ईमानदारी की उम्मीद नहीं की जा सकती, ईमानदारी से राजस्व विभाग में काम हो जाए यह अब सपना सा लगने लगा है, यह इसलिए होने लगा है क्योंकि राजस्व विभाग भू माफिया व नेताओं के भरोसे व भ्रष्ट अधिकारियों के भरोसे चलने लगा है, उन्हीं के ऊपर पूरा दारोमदार है वहीं अब सत्ता में आसीन सरकारें भी उन्हीं पर आश्रित हो गई हैं, अब ईमानदार अधिकारी कार्यालय में दिखते नहीं और बेईमान की तो फौज खड़ी हो चुकी है ,इसका जीता जागता उदाहरण कुछ महीने पहले सूरजपुर के भैयाथान  तहसीलदार संजय राठौर का लिया जा सकता है, यह अधिकारी इतना भ्रष्ट था कि पैसे कमाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार था ,दस्तावेज छेड़छाड़ करने तक को तैयार था ,इस इस बात का भी डर नहीं था कि पकड़े जाने पर इसके ऊपर कोई बड़ी कार्रवाई हो सकती है, फर्जी तरीके से जमीन नामांतरण मामले में शिकायत हुई अपनी पत्नी के नाम पर जमीन खरीदा और सूरजपुर से दोषी पाए जाने पर कलेक्टर ने संभाग आयुक्त को कार्यवाही के लिए प्रेषित किया पर कार्यवाही तो हुई नहीं उल्टा ढाई महीने में ही बलरामपुर में संलग्न किए गए संजय राठौर को कोरिया जिले मतलब कि सूरजपुर जिले के पड़ोसी जिले कोरिया में पदस्थ कर दिया गया ताकि वहां से भैयाथान जाकर वह अपने कनिष्ठ तहसीलदार की मिली भगत से अपने प्रकरण में सुधार कर सके ऐसा सूत्रों का दावा है और जांच प्रभावित हो सके, पर सवाल यह उठता है कि आखिर इनकी पहुंच व पकड़ कितनी थी कि अधिकारी कार्यवाही करना तो दूर उनकी विभागीय जांच भी कछुए की चाल में कर रहे हैं ऐसा लग रहा है कि किसी बड़े नेता के दबाव में अधिकारी ने संभाग आयुक्त को मना कर रखा हो कि संजय राठौर पर कार्यवाही ना की जाए? यदि वर्तमान सत्ता में भी भ्रष्ट अधिकारियों को संरक्षण मिल रहा है तो फिर यह कहना गलत नहीं होगा कि भ्रष्ट अधिकारियों का ही छत्तीसगढ़ में बोलबाला है। वहीं सरकार सुशासन की बात लगातार कर भी रही है जिसे ऐसे तहसीलदार झूठ साबित कर रहे हैं।
क्या विभागीय जांच जल्द पूरी होगी, क्या दोषी पाए जाने पर सरगुजा कमिश्नर कार्रवाई कर पाएंगे?
भैयाथान तहसीलदार रहते हुए संजय राठौर ने काफी कुछ ऐसा किया जो एक बड़ा भ्रष्टाचार था,तहसीलदार संजय राठौर ने भैयाथान में एक जमीन मामले में पक्ष में फैसला सुनाने जमीन में से ही हिस्से का समझौता किया और प्रकरण पक्ष में निराकृत कर अपनी पत्नी के नाम से जमीन पंजीकृत भी करा लिया,मामले में दूसरे या हारे हुए पक्षकार ने शिकायत की और प्रथम दृष्टया आरोप सही साबित हुए और कलेक्टर सुरजपुर ने मामले में अग्रिम कार्यवाही के लिए संभाग आयुक्त को मामला प्रेषित किया,संभाग आयुक्त ने भी दोषी मानते हुए निलंबित किया और बलरामपुर में संलग्न कर निलंबित कर दिया।इस बीच इन्होंने काफी कुछ हांथ पैर मारने का प्रयास किया और अपनी ऊंची पकड़ साबित करते हुए धीरे से अपनी पदस्थापना अपनी बहाली के साथ कोरिया जिले के लिए करा ली,कोरिया जिला इसलिए क्योंकि भैयाथान से यह जिला लगा हुआ है वहीं कोरिया जिले के भी बैकुंठपुर तहसील में इन्होंने कनिष्ठ के साथ इसलिए अधीन उसके रहकर कार्य करना स्वीकार किया क्योंकि बिल्कुल समीप के तहसील भैयाथान यह आसानी से जा सकें और वहां से संबंधित जांच जिस मामले में निलंबित हुए थे उसे प्रभावित कर सकें और खुद को बचा सकें। वैसे संजय राठौर दोषी पाए जा चुके हैं प्रथम दृष्टया और अब जांच कमिश्नर कार्यालय द्वारा कराया जाकर कार्यवाही की जानी है,वैसे अब देखना है कि क्या कमिश्नर सरगुजा मामले में दोषी पाए जाने पर ऑफ और जांच जल्द पूर्ण कर कार्यवाही भी जल्द करते हैं या तहसीलदार संजय राठौर को उनकी ऊंची पहुंच पकड़ के आधार पर या तो अभयदान देते हैं या जांच को ही आगे टालते रहते हैं और बचे रहने का उसे मौका देते हैं।
ढाई महीने में बिल्कुल बगल के तहसील जिले में वापसी कितनी पकड़ है तहसीलदार संजय राठौर की?
संजय राठौर बड़ी अनियमितता साबित होने पर निलंबित किए गए थे,यह अनियमितता जमीन विवाद में एकपक्षीय फैसला देने और लाभ उद्देश्य से फैसला देने की वजह से की गई थी,निलंबन अवधि में संभाग आयुक्त ने इन्हें बलरामपुर संलग्न कर रखा था,संजय राठौर बलरामपुर से कोरिया जिला दो महीने में ही पहुंच गए और जिला मुख्यालय में वह पदस्थापना भी पा गए,वैसे संजय राठौर की पकड़ का अंदाजा इसी बात से लग जाता है की वह भैयाथान से सटी तहसील में बतौर अतिरिक्त तहसीदार पदस्थ हो गए और उन्होंने कनिष्ठ के अधीन काम करना स्वीकार भी कर लिया, ऐसा करने के पीछे की मंशा यह बताई जाती है कि अपने निलंबन जो भैयाथान तहसील के एक मामले से हुआ है और जिसमे बड़ी कार्यवाही हो सकती है से बचने यह जुगाड उहोंने लगाया है और कोरिया जिले के बैकुंठपुर तहसील पहुंचे हैं जहां से भैयाथान जाना आना आसान होगा और वह मामले में अपने प्रभाव कायम कर सकेंगे।भैयाथान तहसील कार्यालय से बैकुंठपुर तहसील कार्यालय आना-जाना संजय राठौर के
लिए आसान होगा, दस्तावेज छेड़छाड़ करना आसान होगा?
सुरजपुर जिले का भैयाथान तहसील और कोरिया जिले का बैकुंठपुर तहसील,इन दोनों तहसीलों के बीच दूरी 35 किमी की है और संजय राठौर बैकुंठपुर के अतिरिक्त तहसीलदार बनाए गए हैं जो उनकी ही पसंद और मांग बताई जाती है के हिसाब से भी उन्हें भैयाथान आने जाने में समय आभाव जैसे विषय कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ेगा। बड़ी आसानी से जब मन तब वह भैयाथान जा आ सकेंगे और वहां जाकर अपने मामले की जांच में जो तथ्य उन्हें दोषी साबित कर सकते हैं उन्हें मिटा सकते हैं या प्रभावित कर सकते हैं। संजय राठौर का निलंबन और उनका बलरामपुर संलग्निकरण भैयाथान तहसील की ही एक गड़बड़ी का कारण है और जिसमे वह दोषी प्रथम दृष्टया पाए गए हैं और वह पूर्ण रूप से ही दोषी जांच में न साबित हो जाएं इसलिए वह बिल्कुल बगल की तहसील में जुगाड से आए हैं। संजय राठौर भैयाथान केवल 35 किलोमीटर का सफर तय करके पहुंच जायेंगे और अतिरिक्त तहसीलदार बतौर कम जिम्मेदारी उन्होंने इसलिए ही स्वीकार की है कि वह ज्यादा समय अपने विरुद्ध होने वाली जांच को प्रभावित करने में लगा सकें।
जिस अधिकारी पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश देना चाहिए उसे विभागीय जांच में लटका कर बचाने का प्रयास जैसा प्रयास तो नहीं?
तहसीलदार संजय राठौर पर भैयाथान तहसील में पदस्थ रहने के दौरान कई भ्रष्टाचार के आरोप लगे एक आरोप तो ऐसा भी सामने आया जिसमें वह आरोपी प्रथम दृष्टया ही साबित हुए निलंबित भी किए गए लेकिन उन्हें पुनः बहाल कर कोरिया जिले के जिला मुख्यालय उनकी मंशा अनुसार भेज दिया गया। अब इस मामले में यह सवाल है कि क्या ऐसा उसे बचाने के लिए किया जा रहा है, निलंबन जब तत्काल किया गया तब उसे पुलिस प्राथमिकी से क्यों बचाया गया, क्यों नहीं प्राथमिकी दर्ज कराकर उसे कानून से दंडित कराने का प्रयास किया गया,जब आरोप प्रथम दृष्टि में ही साबित हुए और निलंबन हुआ क्यों फिर दोबारा जांच की आवश्यकता आन पड़ी क्यों नहीं प्रथम जांच के आधार पर कार्यवाही जो कि गई थी उसे स्थाई रखा गया,वैसे क्या संजय राठौर को बचाने के लिए ही जांच संस्थित की गई है जिससे मामला धीरे धीरे समाप्त किया जा सके और लोग मामले को भूला बैठें, वैसे संजय राठौर के मामले में उसे कोरिया जिले के बैकुंठपुर तहसील भेजकर भी जांच से बचने में सहयोग ही प्रदान करने का प्रयास किया गया यह भी अब सवाल उठ रहे हैं।
भैयाथान के वर्तमान तहसीलदार क्या संजय राठौर की मदद कर रहे हैं?
भैयाथान तहसील के वर्तमान तहसीलदार क्या संजय राठौर की मदद कर रहे हैं,संजय राठौर का कोरिया जिले ही आना और बैकुंठपुर तहसील में अतिरिक्त तहसीलदार की जिम्मेदारी स्वीकार करना जबकि बैकुंठपुर तहसीलदार से वह वरिष्ठ हैं यह एक उनकी मंशा साबित करता है कि वह अतिरिक्त जैसे पद के साथ अधिक समय खाली रहेंगे समय होगा उनके पास और वह इस समय को भैयाथान तहसील पहुंचकर व्यतीत कर पाएंगे और अपने मामले की जांच प्रभावित कर सकेंगे। वैसे भैयाथान के वर्तमान तहसीलदार क्या उनकी मदद करने वाले हैं यह बड़ा सवाल है,वैसे दोषी पाए जाने कार्यवाही होने पर संजय राठौर ने अपने संघ को सामने किया था और मामले में कार्यवाही को ही गलत साबित करने दबाव बनाया था,क्या सबकुछ संघ संगठन के निर्देश पर तय हो रहा है जिसमें एक दूसरे की मदद की अपील जैसा विषय है। वैसे सूत्रों की माने तो भैयाथान तहसीलदार और संजय राठौर के बीच लगातार संपर्क हो रहा है,दोनों संपर्क कर कुछ न कुछ खिचड़ी पका रहे हैं सूत्रों का दावा है,अब इन बातों की सच्चाई तो स्पष्ट नहीं है लेकिन यदि ऐसा है तो फिर यह कहना कि भ्रष्टाचार के हांथ लम्बे और मजबूत हैं गलत नहीं होगा और कार्यवाही शून्य हो जायेगी यह भी तय है।
संजय राठौर भ्रष्ट अधिकारी हैं इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि इनकी एक वॉयस रिकॉर्डिंग दैनिक घटती घटना के पास है
संजय राठौर भ्रष्ट एक अधिकारी हैं यह इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि ऐसा कहने के पीछे एक मजबूत कारण है,संजय राठौर कैसे भ्रष्टाचार में डूबे हुए थे पैसे लेनदेन को लेकर कितने यह खुलकर बात करते थे बिना हिचक बिना शर्म यह साबित करने दैनिक घटती घटना के पास एक वॉयस रिकॉर्डिंग है,रिश्वत या भ्रष्टाचार के लिए लिए गए पैसे को न लौटाना पड़े और उन्हें पैसा अपने पास ही रखने की छूट मिल जाए पैसा देने वाला बिना काम हुए ही पैसा भूल जाए यह समझाते हुए उनकी रिकॉर्डिग सुरक्षित है,वैसे शर्म की बात है कि एक अधिकारी चंद पैसे के लिए कैसे बातें बना रहा है फुसला रहा है पैसा देने वाले को और जिसने पैसा किसी ऐसे काम के लिए दिया है जो काम होना बिना पैसों के चाहिए जिसके लिए ही अधिकारी नियुक्त हैं लेकिन हो नहीं रहा है क्योंकि अधिकारियों को वेतन से अतिरिक्त की आदत लगी हुई है और यह आदत उन्हें भिखारी जैसी याचना से भी परहेज से नहीं बचा रहा है।
सूरजपुर कलेक्टर ने दो मामले में संजय राठौर को पाया दोषी और कार्यवाही की उसमें की अनुशंसा
संजय राठौर तहसीलदार भ्रष्टाचार मामले में सुरजपुर कलेक्टर ने दो मामलों में संजय राठौर को दोषी पाया है और उन्होंने कार्यवाही की अनुशंसा के साथ कार्यवाही आगे बढ़ा दी है,संजय राठौर अब सुरजपुर जिले के बगल के जिले से यह प्रयास कर रहे हैं कि सभी मामले में उन्हें राहत मिले जिसके लिए वह यहां से आ जाकर तथ्य प्रभावित करने में लगे हुए हैं।


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