डबरीपारा पंचायत में 15 वें वित्त की राशि के गबन की शिकायत
-रवि सिंह-
बैकुंठपुर/पटना,03 सितंबर 2025(घटती-घटना)। कोरिया जिले के कलेक्टर जनदर्शन कार्यक्रम में ग्राम पंचायत डबरीपारा के महिला और पुरुष बड़ी संख्या में पहुंचे और कलेक्टर महोदय को ज्ञापन सौंपते हुए अपनी गंभीर शिकायत दर्ज कराई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पंचायत के सरपंच, सचिव एवं सरपंच पति की मिली भगत से 15 वें वित्त मद की राशि का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया है। ग्रामीणों के अनुसार पंचायत में बिना किसी प्रस्ताव पारित किये फर्जी बिल, वाउचर, लगाकर राशि आहरित की गई है। शिकायत में बताया गया है की आंगनवाड़ी मरम्मत, शौचालय मरम्मत, हैंडपंप मरम्मत, नहानी मरम्मत, शाला में रनिंग वाटर मरम्मत, सड़क में मिट्टी मुरम भरने और थाली वितरण जैसे कार्यों के नाम पर लाखों रुपए खर्च दिखाकर गबन किया गया, जिसका भौतिक रूप से कोई प्रमाण नहीं है, और जमीनी स्तर पर कोई कार्य नहीं कराया गया है। इतना ही नहीं पंचायत में टेबल कुर्सी और बर्तन खरीद में भी बड़े-बड़े बिल लगाकर शासकीय राशि दुरुपयोग करने की शिकायत दर्ज कराई गई है। ग्रामीणों ने यह आरोप लगाया है कि पंचायत सचिव प्रस्ताव पंजी, स्टाक पंजी और कैश बुक अपने घर पर रखते हैं, और वहीं बैठकर फर्जी प्रस्ताव तैयार कर राशि आहरण कर लेते हैं। प्रस्ताव पंजी में पंचों के हस्ताक्षर तक नहीं है, और ना ही ग्राम सभा में आय व्यय की जानकारी दी जाती है। ग्रामीणों ने बताया कि यह सभी जानकारी उन्हें सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त हुई है, इसकी प्रति प्रमाण स्वरूप आवेदन के साथ संलग्न की गई है। ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की है कि इस मामले की उच्च स्तरीय भौतिक जांच कर कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में पंचायत स्तर पर इस तरह के भ्रष्टाचार की पुनरावृत्ति ना हो और शासकीय राशि का सदुपयोग ग्रामीणों की भलाई के लिए किया जा सके।
अधिकांश पंचायत में मूलभूत और वित्त की राशि का होता है दुरुपयोग
बैकुंठपुर विधानसभा के अंतर्गत आने वाले अधिकांश ग्राम पंचायत का यही हाल है, जहां मूलभूत की राशि और 15वें वित्त की राशि का उपयोग ग्रामीण जनता और पंचायत के निर्माण कार्यों के लिए किया जाना चाहिए। वहां सरपंच और सचिव आपसी मिली भगत कर फर्जी प्रस्ताव और फर्जी बिल लगाकर राशि आहरण कर लेते हैं। जबकि जमीनी स्तर पर कोई कार्य होता नहीं है, अगर कोई कार्य होता भी है, तो कम कार्य का अधिक बल लगाकर फर्जी आहरण किया जाता है। मूलभूत की राशि से जहां ग्रामीणों के संसाधन की मरम्मत का प्रावधान है,वहां फाइल में फर्जी बिल लगाकर ऐशो आराम के लिए पूरा पैसा आहरण कर लिया जाता है। अधिकांश ग्राम पंचायत में सचिव द्वारा आय व्यय की जानकारी प्रस्तुत नहीं की जाती है, और प्रस्ताव भी मनमानी तरीके से तैयार किया जाता है, जो की पंचायत में पंचों के समक्ष नहीं होता। कार्यों के प्रस्ताव में और बिल आहरण में पंचों का केवल नाम लिख दिया जाता है,उनके हस्ताक्षर तक नहीं कराए जाते।
ग्रामीणों के सजग न रहने से सरपंच और सचिव करते हैं मनमानी
अधिकांश ग्राम पंचायत में ग्रामीणों के सजग न रहने और पंचों के निष्कि्रय रहने से सरपंच और सचिव के द्वारा मनमानी तरीके से फर्जीवाड़ा करने की घटना सामान्य बात है। यदि शासन द्वारा पंचायत में जनप्रतिनिधियों की बैठक लेकर मामले का पूरा यौरा जाना जाए तो पंचायत में पदस्थ सचिवों की पूरी पोल खुल जाएगी। अधिकांश पंचायत में आदिवासी संवर्ग से आने वाले सरपंचों को पढ़े-लिखे सचिव मनमाने तरीके से चला रहे हैं।
ऑडिट में भी ले देकर चल जाता है काम, भौतिक सत्यापन होता नहीं
पंचायत के आय, व्यय और कार्य की सालाना ऑडिट में भी ले देकर के सारा कार्य संपन्न कर लिया जाता है,क्योंकि ऑडिटर तथा सत्यापनकर्ता अधिकारी द्वारा कोई भौतिक निरीक्षण किया नहीं जाता, जिसका लाभ पंचायत में पदस्थ सचिव और सरपंच उठाते हैं और भुगतना ग्रामीणों को पड़ता है।
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