जांजगीर और कांकेर की घटनाओं पर तलब किया जवाब…
रायपुर,15 जुलाई 2025 (ए)। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बच्चों की सुरक्षा पर गहरी चिंता जताई है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की बेंच ने साफ कहा कि बच्चों की सुरक्षा तय करना सरकार की जिम्मेदारी है, भले ही हादसों के लिए सीधे जिम्मेदार न हो। हाईकोर्ट ने जांजगीर चांपा में तालाब में डूबने से चार बच्चों की मौत और कांकेर में जान जोखिम में डालकर स्कूल जाने वाले बच्चों के मामले को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने इसे जनहित याचिका के तौर पर स्वीकार किया और मुख्य सचिव से 29 जुलाई तक खुद शपथपत्र दाखिल कर जवाब मांगा है।
जांजगीर चांपा में तालाब निगला चार जिंदगियां…
हाईकोर्ट ने मीडिया में छपी दो खबरों को जनहित याचिका के रूप में लिया है। पहली घटना जांजगीर चांपा जिले के भैंसतारा गांव की है। 12 जुलाई को चार बच्चे स्कूल से लौटकर खेलने निकले थे। वे घटोली डबरी तालाब में नहाने गए और गहरे पानी में डूब गए। जब बच्चों के शव पानी में तैरते दिखे, तब ग्रामीणों को पता चला। इस दुखद घटना ने स्थानीय प्रशासन की लापरवाही को सामने ला दिया।
कांकेर में जानलेवा नाला पार कर स्कूल जाते हैं बच्चे..
दूसरी घटना कांकेर जिले के केसलपारा गांव की है। यहां बच्चे रोज कमर तक पानी में डूबकर स्कूल जाने को मजबूर हैं। गांव में सिर्फ प्राइमरी स्कूल है, मिडिल स्कूल के लिए बच्चों को कनागांव जाना पड़ता है। रास्ते में एक गहरा और खतरनाक नाला पड़ता है, जो बारिश में उफान पर रहता है। इसे पार करना बच्चों के लिए बेहद
खतरनाक है। ग्रामीणों ने कई बार पुल बनाने की मांग की,लेकिन सिर्फ आश्वासन मिले।
हाईकोर्ट का सरकार को कड़ा निर्देश..
इन दोनों मामलों की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया। कोर्ट ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा राज्य सरकार की पहली जिम्मेदारी है। स्कूलों के आसपास तालाबों, नालों, पुलिया और दूसरी खतरनाक जगहों को तुरंत पहचान कर वहां सुरक्षा उपाय किए जाएं। कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाना जरूरी है।
मुख्य सचिव से मांगा गया जवाब..
हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को 29 जुलाई तक खुद शपथपत्र के साथ जवाब देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने पूछा है कि सरकार ऐसी घटनाओं को रोकने में क्यों नाकाम रही। साथ ही, इन दोनों मामलों में अब तक क्या कार्रवाई की गई,इसकी पूरी जानकारी भी मांगी गई है।
बच्चों की सुरक्षा के लिए कुछ सुझाव..
हाईकोर्ट के इस कदम से बच्चों की सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ने की उम्मीद है। जानकार कहते हैं कि सरकार को ये कदम उठाने चाहिए
स्कूलों के आसपास तालाबों और नालों की घेराबंदी की जाए।
खतरनाक नालों पर तुरंत पुल बनाए जाएं।
बच्चों को तैराकी और सुरक्षा के बारे में जागरूक करने के लिए ीस्कूलों में खास क्लासें लगाई जाएं।
ग्रामीण इलाकों में स्कूलों तक सुरक्षित रास्ते बनाए जाएं।
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