पुलिस को भी थाना की सुरक्षा के लिए लगाना पड़ता है गेट में ताला
अंबिकापुर 01 फरवरी 2022 (घटती-घटना)। सरगुजा जिला मुख्यालय अंबिकापुर में पिछले कुछ दिनों से चोरी की घटनाएं लगातार बढ़ी हुई है। पिछले रिकॉर्ड के अनुसार चोरी में बेतहाशा वृद्धि होने से जिले के व्यवसाय भी काफी चिंतित हैं। जिले के व्यवसाई उन्हें भी अंबिकापुर में बढ़ रही चोरी की घटनाओं को लेकर पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा चुके हैं। वही चोरी डर केवल शहर के नागरिकों के बीच ही नहीं बल्कि पुलिस को भी सता रही है। चोरी के डर से सरगुजा पुलिस चौकी व थाने को रात में बंद करना मुनासिब समझ रहे हैं। जी हां अंबिकापुर मणिपुर चौकी में रात के 12:00 बजे के बाद गेट में ताला बंद कर दिया जाता है। इस बीच फरियादी अपनी शिकायत लेकर रात में चौकी पहुंचते हैं तो वहां रात में गेट में ताला लटका देख उन्हें वापस घर लौटना पड़ता है। और सुबह 6:00 बजने का इंतजार करना पड़ता है।
गौरतलब है की कोई भी पुलिस थाना हो या पुलिस चौकी फरियादियों के लिए हर समय खुली रहती है, परंतु शहर के अंदर मणिपुर पुलिस चौकी की। यहां मुख्य द्वार पर ही नहीं बल्कि चौकी के अंदर का दरवाजा भी पूरी तरह से लॉक रहता है। बाहर अगर फरियादी रात को चिल्लाता भी रहा तो यहां के पुलिस वालों की नींद नहीं खुलती। पुलिस वाले यहां नशे में सोते हैं ना फिर सर्द रातों के इस समय में रजाई से बाहर निकलना नहीं चाहते। इसका जवाब तो वरिष्ठ अधिकारी ही दे सकते हैं। शनिवार की सुबह 5 बजे की यह तस्वीर जब एक फरियादी कडक़ड़ाती ठंड में कंबल लपेटे चौकी के बाहर खड़ा पुलिस चौकी के खुलने का इंतजार कर रहा था। सुबह 6 बजे तक जब चौकी का दरवाजा नहीं खुला तब फरियादी बिना अपनी शिकायत सुनाएं वहां से वापस घर लौटना ही उचित समझा। खैर यह तो आज की बात थी यहां के हालात फिलहाल रोज ऐसे ही है।
क्षेत्र में अपराधिक गतिविधियों के कारण ही खोला गया था चौकी
मणिपुर चौकी की स्थापना जिन कारणों से की गई थी यह कारण आज भी किसी से छुपा नहीं है पूरा क्षेत्र कई अपराध का गढ़ लंबे समय से है। अवैध शराब जुआ मारपीट व भू माफियाओं के इस गढ़ में खास तौर पर रात के समय कितने अनैतिक काम होते हैं यह भी किसी से छुपा नहीं है। इन सबके बाद भी दिन में अपराधी तत्वों और भू माफियाओं को अक्सर थाने के अंदर बकायदा कुर्सी प्रदान की जाती है। दूसरी भाषा में ऐसे यह भी कह सकते हैं कि उनके लिए इस चौकी में हर समय रेड कार्पेट बिछाना हो तो वह भी बिछ सकता है, परंतु रात के समय गरीब दुखी फरियादियों की फरियाद यहां सुनने वाला कोई नहीं। सुनने में जरूर अचरज होता है कि किसी पुलिस चौकी या थाने का दरवाजा बंद रखा जाता है। परंतु मणिपुर चौकी की बात करें तो यहां हर रात यही आलम देखने को मिलता है। तडक़े अगर कोई मारपीट हो जाए या फिर बड़ा कांड हो जाए तो पीड़ित को अपनी बात रखने के लिए सुबह 6 बजे का इंतजार करना यहां के लिए मजबूरी बन चुकी है। खैर यहां की शिकायतें तो बहुत है परंतु किसी पुलिस चौकी का दरवाजा फरियादियों के लिए रात के समय बंद रखना अपने आप में एक बड़ा सवाल है।
चौकी में भी चोरी का डर तो आप अनुमान लगा सकते हैं कितना है सुरक्षित
मणिपुर चौकी के मुख्य गेट रात में बंद रहने की पुष्टि के लिए हमारा रिपोर्टर ने चौकी प्रभारी उप निरीक्षक अनीता आयाम से पूछा गया तो पहले वह इस मामले में बताने से इंकार कर दी। उन्होंने कहा कि मैं कुछ नहीं बताऊंगी। रिपोर्टर के सवाल पर फिर उन्होंने कहा कि रात के 11:30 बजे के बाद आवाजाही बंद होने पर चौकी में ताला बंद कर दिया जाता है। क्योंकि चौकी परिसर में कई वाहन खड़े है। सुरक्षा के दृष्टिकोण से चौकी बंद करना पड़ता है। इससे शहर के लोग अनुमान लगा सकते हैं कि खुद कितना सुरक्षित है।
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