कई राज्यों को लगाई फटकार
नई दिल्ली,29 नवंबर 2021 (ए)। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण के स्तर पर चिंता व्यक्त की है। कोर्ट ने दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और यूपी सरकारों से वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के निर्देशों के अनुपालन में उठाए गए कदमों की रिपोर्ट मांगी है। इस मामले पर अब दो दिसंबर को सुनवाई होगी।
सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि अगर राज्य सरकारें उसके, केंद्र और वायु प्रदूषण आयोग द्वारा जारी निर्देशों को लागू नहीं करती हैं, तो वह प्रदूषण को कम करने के उपायों के कार्यान्वयन के लिए एक टास्क फोर्स का गठन करेगी। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि सभी निर्देश और सलाह जारी की जाती हैं और अधिकारियों को उम्मीद है कि सब अच्छा होगा, लेकिन जमीनी स्तर पर नतीजा शून्य है। कोर्ट का कहना है कि हमें केंद्र द्वारा पहले से निर्देशित उपायों का कड़ाई से अनुपालन करने की आवश्यकता है। दिल्ली-एनसीआर में जारी प्रदूषण के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में आज भी चर्चा हुई। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से कई तीखे सवाल पूछे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम दिल्ली में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, चाहे वह सेंट्रल विस्टा हो या कुछ और। ऐसा मत सोचें कि हम कुछ नहीं जानते हैं। ध्यान भटकाने के लिए कुछ मुद्दों को नहीं उछालें। सॉलिसिटर जनरल को इस पर जवाब देना होगा। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि वह केंद्र से पूछेगा कि क्या सेंट्रल विस्टा परियोजना में निर्माण कार्य जारी रखने से धूल प्रदूषण बढ़ रहा है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से यह बताने के लिए कहा है कि दिल्ली में परियोजना के कारण होने वाले वायु प्रदूषण को रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन को मेट्रो विस्तार परियोजना के पांचवें चरण के लिए पेड़ों को काटने के लिए मुख्य वन संरक्षक की अनुमति लेने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को दिल्ली में पेड़ और पौधे लगाने के लिए एक व्यापक योजना तैयार करने और उसके समक्ष पेश करने का निर्देश दिया। योजना को 12 सप्ताह के भीतर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।
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